बैंक में नकद जमा करने वालों के लिए जरूरी खबर, समझिए कब भेजता है आयकर विभाग नोटिस?

बैंक में नगद इकट्ठा करने वालों के लिए ITAT का बड़ा नियम आया सामने, जानिए किन-किन चीजों का अबसे रखना पड़ेगा ध्यान।
बैंक में नकद जमा करने वालों के लिए जरूरी खबर, समझिए कब भेजता है आयकर विभाग नोटिस?
बैंक में ज्यादा कैश जमा कर रहे हैं? सावधान! जानिए कब आता है इनकम टैक्स विभाग का नोटिस और कैसे बचें परेशानी से

बैंक में नकद जमा करने वालों के लिए बड़ी खबर सामने आई है, यदि आप बैंक में अपने कार्यालो के लिए बड़ी राशि बैंक में जमा करते हैं, तो आयकर विभाग का यह बड़ा नोटिस जाना आवश्यक है। कहा जा रहा है कि अब से यदि आप बैंक में बड़ी नकद जमा करते हैं तो आपके अकाउंट और आपके स्टेटस पर आयकर विभाग कड़ी नजर रखना शुरू कर देगी।

आयकर अपीलीय अधिकरण यानी ITAT के तहत, बैंक में कितना अमाउंट जमा हुआ यह मायने नहीं रखता बल्कि वह पैसा कहाँ से आया और उसका स्रोत क्या है यह जांच पड़ताल का मुख्य मुद्दा है। नियमों का उल्लंघन करने पर सीधे नोटिस भेजा जा सकता है। कई मामलों में देखा गया है कि लोगों को अचानक नोटिस मिल जाता है, जिससे वे घबरा जाते हैं। लेकिन अगर नियमों को पहले से समझ लिया जाए, तो ऐसी परेशानी से आसानी से बचा जा सकता है।

क्यों लिया ITAT ने बड़ा फैसला?

कहा जा रहा है कि आयकर विभाग ने नोटबंदी के समय के दौरान जमा की गई बड़ी रकम को अघोषित आय मानकर टैक्स की मांग की है। इसी की जांच-पड़ताल करते हुए एक मामले में स्क्रैप कारोबारी के खाते में 1.28 करोड़ नकद जमा हुए थे। विभाग ने इसे शक के दायरे में मानते हुए भारी टैक्स मांग बनाई। आईटीएटी ने तभी यह नियम निकाला कि अगर कारोबार का पुराना रिकॉर्ड, बहीखाते और बिक्री का पैटर्न नकद जमा को समर्थन देते हैं, तो केवल बैंक में पैसा जमा होने से इसे अघोषित आय नहीं कहा जा सकता।

कब आता है ITAT का नोटिस?

आईटीएटी  के अनुसार जब भी साल भर में 1 खाते में बैंक के जरिए 10 लाख से अधिक राशि जमा की जाती है, तब नोटिस भेजने की संभावना है। यदि आप करंट अकाउंट पर भारी राशि में एक साथ लेनदेन करते हैं, तब आईटीएटी  के लिए उसका कारण जाना जरूरी होता है। अगर आपकी घोषित आय (ITR) कम है लेकिन बैंक में भारी नकद जमा हो रहा है, तो यह मिसमैच माना जाता है। ऐसे मामलों में स्क्रूटनी (जांच) के लिए केस चुना जा सकता है। अगर कोई व्यक्ति बार-बार छोटे-छोटे अमाउंट में बड़ी राशि जमा करता है ऐसा सोचकर कि वह लिमिट से बच जाएगा, तो इसे भी ट्रैक किया जा सकता है।

आईटीएटी का संदेश क्या है?

इसी का यह संदेश है कि यदि आपके साथ किसी तरह की जांच पड़ताल या नोटिस भेजा जा रहा है तो इसमें डरने या चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है, आपसे सिर्फ बैंक में जमा नकद आपकी आय, कारोबार, पुराने रिकॉर्ड, खरीद-बिक्री बिल, स्टॉक रजिस्टर और कैश बुक से मेल खाती है, तो आपको कुछ सवालों का जवाब देना पड़ेगा।

यदि आपसे ऐसी पूछताछ की जाए तो आपका नियमित समय में उत्तर देना अनिवार्य है, इसी के साथ यदि कुछ न समझ आए तो CA की भी मदद ले सकते हैं।

कुछ मामलों में लोग अपने सेविंग अकाउंट का इस्तेमाल बिजनेस ट्रांजैक्शन के लिए करते हैं, जो कि नियमों के खिलाफ है। इससे नोटिस आने की संभावना भी बढ़ जाती है। आयकर विभाग ऐसे मामलों को गंभीरता से लेता है क्योंकि इससे टैक्स चोरी की आशंका होती है। इसलिए यह गलती करने से बचें।

दूसरी ओर जो व्यापार या नकद बिक्री से अपने बैंक में पैसे जमा करते हैं, उन्हें इसे साबित करने के लिए खरीद-बिक्री बिल, स्टॉक रजिस्टर, कैश बुक, बैंक स्टेटमेंट, जीएसटी रिटर्न, आयकर रिटर्न, पिछले वर्षों का टर्नओवर और ग्राहक-सप्लायर रिकॉर्ड होना चाहिए। अगर व्यापारी कहता है कि नकद जमा बिक्री से आया है, तो उसे यह दिखाना होगा कि उसके पास इतना स्टॉक था, बिक्री वास्तव में हुई थी और राशि बहीखातों में सही तरीके से दर्ज की गई थी।

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