भारत के सैन्य इतिहास में ऑपरेशन सिंदूर को केवल सटीक हवाई हमलों के लिए ही नहीं, बल्कि इसके पीछे लिए गए बेहद कठिन और जोखिम भरे फैसलों के लिए भी याद किया जाएगा। अब इस ऑपरेशन से जुड़ा एक ऐसा खुलासा सामने आया है, जिसने मिशन के दौरान भारतीय वायुसेना के कमांडरों पर मौजूद दबाव की झलक दिखाई है।
एयर मार्शल नगेश कपूर ने बताया कि पाकिस्तान के Bholari एयरबेस पर महत्वपूर्ण हमले से ठीक पहले उन्होंने तत्कालीन एयर चीफ एयर चीफ मार्शल एपी सिंह को विमानों के उड़ान भरने के समय को लेकर पूरी जानकारी नहीं दी थी।
Bholari एयरबेस क्यों था अहम?
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया था। इनमें Bholari एयरबेस भी शामिल था, जो भारतीय सीमा से काफी दूरी पर स्थित पाकिस्तान का एक महत्वपूर्ण एयरबेस है। इस एयरबेस पर मौजूद एक हैंगर भारतीय वायुसेना के लिए खास महत्व रखता था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, भारतीय पक्ष को अंदाजा था कि इस परिसर में पाकिस्तान की Saab Erieye एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल प्रणाली से जुड़ा महत्वपूर्ण विमान मौजूद हो सकता है।
10 मई 2025 को मिशन को अंजाम देने की तैयारी पूरी हो चुकी थी। भारतीय वायुसेना के Sukhoi-30 MKI लड़ाकू विमान हथियारों से लैस होकर तैयार थे। इन विमानों के पास हवा से जमीन पर हमला करने वाली BrahMos मिसाइलें थीं। मिशन का उद्देश्य बेहद सटीक हमला करना था, ताकि निर्धारित लक्ष्य को निशाना बनाया जा सके।
एयर चीफ का आया फोन
मिशन के दौरान दक्षिण पश्चिमी वायु कमान के तत्कालीन प्रमुख एयर मार्शल नगेश कपूर के पास एयर चीफ का फोन आया। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने विमानों की स्थिति और उनके उड़ान भरने के बारे में जानकारी मांगी।
कपूर के मुताबिक, उस समय विमानों को वास्तव में उड़ान भरने में लगभग 15 मिनट और लगने वाले थे। इसके बावजूद उन्होंने एयर चीफ को बताया कि विमान अब उड़ान भरने वाले हैं। बाद में उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने समय को लेकर एयर चीफ को पूरी सच्चाई नहीं बताई थी।
कपूर ने इस घटना को याद करते हुए बताया कि विमान लंबे समय से हथियारों के साथ तैयार खड़े थे। ऐसे में उन्हें वापस बुलाना या मिशन को रोक देना उन्हें उचित नहीं लगा। उनके सामने एक तरफ वरिष्ठ कमांड का निर्देश और दूसरी तरफ वर्षों की तैयारी के बाद मिले ऑपरेशनल अवसर को बनाए रखने की चुनौती थी।
Sukhoi और BrahMos ने निभाई अहम भूमिका
Bholari मिशन में Sukhoi-30 MKI लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया गया। इन विमानों को भारतीय आवश्यकताओं के अनुसार बड़े स्तर पर संशोधित किया गया है और वे लंबी दूरी तक मार करने वाली BrahMos मिसाइल ले जाने में सक्षम हैं।
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मिशन के दौरान विमानों ने निर्धारित क्षेत्र की ओर उड़ान भरी। इस दौरान पायलटों को दुश्मन के रडार और संभावित हवाई खतरों पर लगातार नजर रखनी थी। लक्ष्य तक पहुंचने के बाद हथियार दागे गए और इसके बाद विमान वापस लौटने लगे। कपूर ने बताया कि मिसाइल लॉन्च होने के बाद उन्होंने एयर चीफ को मिशन पूरा होने की जानकारी दी और विमानों की सुरक्षित वापसी का इंतजार किया।
हैंगर पर हुआ सटीक हमला
Bholari एयरबेस पर हमले के बाद सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों में एक हैंगर की छत पर बड़ा और अनियमित छेद दिखाई दिया। आसपास के क्षेत्र में मलबा भी नजर आया। इस हमले को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना की सटीक स्ट्राइक के प्रमुख उदाहरणों में गिना गया।
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इस पूरे घटनाक्रम से यह भी पता चलता है कि आधुनिक युद्ध में केवल हथियार और तकनीक ही निर्णायक नहीं होते। सही समय पर सही फैसला लेने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। Bholari मिशन में कमांड स्तर पर लिया गया फैसला इसी बात को दर्शाता है।
ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े इस खुलासे ने पहली बार उस तनावपूर्ण माहौल की एक झलक दी है, जिसमें भारतीय वायुसेना के अधिकारियों और पायलटों ने मिशन को अंजाम दिया। एयर मार्शल नगेश कपूर की यह कहानी बताती है कि किसी बड़े सैन्य अभियान की सफलता के पीछे सिर्फ अत्याधुनिक हथियार नहीं, बल्कि अनुभव, प्रशिक्षण, साहस और बेहद कठिन परिस्थितियों में लिए गए फैसले भी अहम भूमिका निभाते हैं।





