20 सांसद और 60 विधायक छोड़ने की चर्चा, फिर भी ममता को मिला बड़ा समर्थन

ममता बनर्जी पर दिखाई दे रहा है बड़ा सियासी संकट। बड़े अध्यक्ष छोड़ रहे हैं पार्टी वही कुछ कर रहे अलग गुट बनाने की बात, क्या होंगे आने वाले टीएमसी के दिन?

Palak Gupta

13 जून 2026

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20 सांसद और 60 विधायक छोड़ने की चर्चा, फिर भी ममता को मिला बड़ा समर्थन

पिछले कुछ दिनों से टीएमसी यानि तृणमूल कांग्रेस पार्टी की मुख्या कार्यकर्ता ममता बैनर्जी को काफी परेशानी झेलनी पढ़ रही है। पार्टी के भीतर आपसी मतभेद इतना बढ़ गया है कि कई बड़ी हस्तियों ने पार्टी से रुख मोड़ लिए है। पार्टी के भीतर बड़ी राजनैतिक टकराव के कारण कई नहीं घटनाएँ पैदा हो रही है।

अब विधायकों टीएमसी के संसाध के लोग भी पार्टी को त्याग रहे है। पीछे ही कुछ दिन पहले पार्टी के राज्यसभा सुखेंदु रॉय ने अपने इस्तीफे का ऐलान किया था। उन्होंने यह फैसला तब लिया जब टीएमसी की मुख्य अध्य्क्ष ममता बनर्जी दिल्ली दौरे पर थी। बताया जा रहा है अब उनकी हवा अन्य संसद के अधिकारियों को भी लग गई है।

हाल ही में तीन राज्यसभा सांसदों ने टीएमसी से इस्तीफा दे दिया है। यहां तक कि टीएमसी के बचें 60 विधायकों ने भी बगावत की सीढ़ी चढ़ना शुरू कर दी है। अलग होने के संबंध में 18 मई को 19 लोकसभा सांसदों ने लोकसभा के स्पीकर को पत्र लिखकर अलग गुट बनाने की अपील भी कर दी है। तृणमूल कांग्रेस पार्टी के बीच की राजनीतिक हलचल ने सभी को अचम्भित कर दिया है, बताया जा रहा है कि हर दूसरे दिन पार्टी के बड़े पैमाने छोड़ने की बात कर रहे हैं जिसे लेकर ममता बनर्जी को बड़ा झटका नजर आ रहे हैं।

अब तक टीएमसी के 20 अध्यक्ष बगावत पर उतर आए हैं, लेकिन अभी इनमें से किसी का नाम भी सामने नहीं आया है। काकोलि घोष, युसुफ पठान, सायोनी घोष जैसे बड़े कार्यकर्ता ने राज्यसभा के स्पीकर को भेजी हुई चिट्टी पर हस्ताक्षर किए हैं। इसी तरह कुल 28 में से 20 अधिकारियों ने ममता के खिलाफ अलग गुट बनाने की ठान ली है। यह बगावत सांसद से सड़क तक उतर गई है क्योंकि अब सांसदों ने एनडीए (NDA) का समर्थन करने की हिम्मत जुटा ली है।

अभी तक सुकहेन्दु राय, सुष्मिता देव व प्रकाश चिग बढ़ाइक जैसे बड़े दर्ज़नों ने राज्यसभा संसद पद से इस्तीफा दे दिया है, उसी के साथ टीएमसी का बहिष्कार भी कर पार्टी से अलग रास्ता नाप लिया है। पश्चिम बंगाल में चल रही इस सियासी हलचल ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व पर बड़ा सवाल भी पैदा कर दिया है।

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आखिर क्यों उठा बगावत का मुद्दा?

इस राजनीतिक भगावत का सबसे बड़ा कारण पार्टी के भीतर बढ़ता असंतोष है। कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि टीएमसी की नेतृत्व शैली धीरे-धीरे गलत राह पकड़ रही है, जिसके कारण भीतर ही भीतर असंतोष उमड़ रहा है। वहीं दूसरा कारण चुनावी रणनीति और फैसलों पर मतभेद बढ़ना है, जिसका कारण नेताओं का पार्टी में अहंकारी व्यवहार है। फैसलों में भागीदारी न मिलने पर भी शिकायत की गई है।

लेकिन ममता बनर्जी के लिए राहत की बात यह है कि किर्ति आज़ाद और शत्रुगण सिन्हा जैसे बड़े अधिकारी अभी भी उनका साथ दिए हुए हैं। शत्रुगण सिन्हा का कहना है कि “इस बुरे समय में वे ममता जी के साथ मजबूती बनाए रखेंगे”। वहीं किर्ति का कहना है कि वे पार्टी पर अभी भी भरोसा रखती हैं, तथा उन्होंने यह विश्वास जताया कि ममता बनर्जी हालात को संभाल लेंगी। TMC के बीच यह द्वेष केवल आपसी पार्टी तक सीमित नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर असर डालने वाला मुद्दा है।

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लेखक परिचय
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Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate,…और पढ़ें
Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate, credible, and reader-centric reporting, driven by a commitment to ethical journalism and continuous professional growth.