महाराष्ट्र में चिकित्सा व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े हो रहे हैं। महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल ( MCC) ने होम्योपैथिक डॉक्टरों को आधुनिक एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति 8 जुलाई 2025 को दी थी जिसको लेकर तभी से चर्चा शुरू हो गई थी।
कई डॉक्टरों ने इसका समर्थन किया वहीं कुछ डॉक्टर इसके विरुद्ध थे और तभी से इस मुद्दे को लेकर महाराष्ट्र डॉक्टरों के बीच तनातनी जारी है। बता दें कि हाल ही में महाराष्ट्र में आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) और होम्योपैथी को लेकर वर्षों से चला आ रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है।
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राज्य सरकार के निर्देश के बाद महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल ( MCC) ने सर्टिफिकेट कोर्स इन मॉडर्न फार्माकोलॉजी (CCMP) पूरा करने वाले होम्योपैथिक डॉक्टरों के पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस फैसले के बाद तय कानूनी पॉलिसी के मुताबिक होम्योपैथिक डॉक्टरों को एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति मिल सकेगी।
सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और अन्य डॉक्टरों के संगठन महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (MARD) ने जमकर विरोध किया। और अब MARD संगठन के डॉक्टरों ने आज यानी 5 अगस्त को हड़ताल शुरू कर दी है।
महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल ने पहले जारी अधिसूचना के आधार पर CCMP कोर्स पूरा कर चुके BHMS डॉक्टरों के पंजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके बाद ऐसे डॉक्टर आधुनिक (एलोपैथिक) दवाएं लिख सकेंगे। इस कदम को सरकार ग्रामीण और डॉक्टरों की कमी वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत करने की दिशा में एक प्रयास बता रही है।
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रेजिडेंट डॉक्टर क्यों कर रहे हैं विरोध?
इस फैसले के खिलाफ IMA, MARD, FAIMA, ASMI समेत कई एलोपैथिक चिकित्सा संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। उनका कहना है कि यह प्रदर्शन करने का सबसे बड़ा कारण यह है कि सिर्फ 1 साल का CCMP प्रशिक्षण किसी भी डॉक्टर को इतना सर्टिफाइड नहीं बना सकता जितना अनुभवी एलोपैथिक डॉक्टर होते है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर को अनुभवी चिकित्सा का सुरक्षित और व्यापक अभ्यास करने के लिए पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
डॉक्टरों का कहना है कि इससे मरीजों की सुरक्षा पर बात बिगड़ सकती है और इसी के साथ एक्सपेरिएंस्ड डॉक्टर के संग भी समझौते का खेल खेला जाएगा। गलत इलाज से मरीजों में डर का माहौल भी बन सकता है। इसी तहत डॉक्टरों ने कुछ मांगे रखी हैं।
- BHMS-CCMP पंजीकरण प्रक्रिया तुरंत रोकी जाए।
- अदालत के अंतिम फैसले तक किसी भी तरह का रजिस्ट्रेशन न किया जाए।
- आधुनिक चिकित्सा के लिए स्पष्ट और वैज्ञानिक नियामक व्यवस्था बनाई जाए।
- सरकार रेजिडेंट डॉक्टरों की लंबित मांगों पर भी चर्चा करे।
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हड़ताल का स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
डॉक्टरों के हड़ताल ने स्वास्थ्य सेवाओं को बुरी तरह से प्रभावित किया है, MARD ने कहा है कि हड़ताल से पहले सिर्फ इमरजेंसी और कैजुअल्टी सेवाएं जारी रहेंगी इसके अलावा ओपीडी, वार्ड राउंड, इलेक्टिव सर्जरी और क्लासेज सभी पूरी तरह से बंद रहेंगी।
बता दें कि प्रदर्शन में मुंबई के प्रमुख मेडिकल कॉलेज और मेडिकल सेंटर शामिल है। मुंबई के केईएम, सायन, नायर, JJ हॉस्पिटल समेत राज्य के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों के रेजिडेंट डॉक्टर भी शामिल हैं। संगठन ने चेतावनी देते हुए सरकार को कहा है कि यदि सरकार ने जल्द कोई समाधान नहीं निकाला तो 6 अगस्त से इमरजेंसी सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।





