जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में अगस्त के दौरान बिजली की मांग बढ़ने के कारण पीक ऑवर्स में बिजली की कमी का सामना करना पड़ सकता है। अधिकारियों के अनुमान के अनुसार, अगस्त 2026 में दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में पीक समय के दौरान बिजली की उपलब्धता और जरूरत के बीच करीब 13.9 प्रतिशत का अंतर रह सकता है। यह जानकारी बिजली व्यवस्था की निगरानी करने वाली नॉर्दर्न रीजनल पावर कमेटी (NRPC) की बैठक में सामने आई है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त के पीक ऑवर्स में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की कुल बिजली की जरूरत लगभग 2,710 मेगावाट रहने का अनुमान है। इसके मुकाबले करीब 2,334 मेगावाट बिजली उपलब्ध होने की संभावना जताई गई है। यानी मांग और उपलब्धता के बीच लगभग 376 मेगावाट का अंतर रह सकता है। इसी वजह से पीक समय में बिजली की कमी की स्थिति बनने की आशंका है।
हालांकि, इस अनुमान का मतलब यह नहीं है कि पूरे दिन बिजली की कमी बनी रहेगी। रिपोर्ट के अनुसार, पीक ऑवर्स के अलावा बाकी समय में स्थिति बेहतर रहने की उम्मीद है। अधिकारियों ने अन्य घंटों के दौरान लगभग 4.7 प्रतिशत बिजली सरप्लस रहने का अनुमान लगाया है। इसका मतलब है कि समस्या मुख्य रूप से उन घंटों में सामने आ सकती है, जब बिजली की मांग अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचती है।
बिजली की मांग में लगातार बढ़ोतरी जम्मू-कश्मीर के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बनती जा रही है। आने वाले वर्षों में भी यहां बिजली की जरूरत बढ़ने का अनुमान है। अधिकारियों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में जम्मू-कश्मीर की पीक बिजली मांग लगभग 3,813 मेगावाट तक पहुंच सकती है। इसके बाद 2027-28 में यह मांग बढ़कर करीब 3,964 मेगावाट और 2028-29 में लगभग 4,117 मेगावाट तक पहुंचने का अनुमान है।
सिर्फ पीक डिमांड ही नहीं, बल्कि कुल बिजली खपत भी आने वाले वर्षों में बढ़ने की संभावना है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जम्मू-कश्मीर में बिजली की ऊर्जा आवश्यकता करीब 23,372 मिलियन यूनिट रहने का अनुमान लगाया गया है। 2027-28 में यह बढ़कर 24,559 मिलियन यूनिट और 2028-29 में करीब 25,780 मिलियन यूनिट तक पहुंच सकती है। इससे साफ है कि आने वाले समय में बिजली की बढ़ती जरूरत को पूरा करने के लिए व्यवस्था को और मजबूत करना जरूरी होगा।
हालांकि, 2026 के शुरुआती छह महीनों में बिजली आपूर्ति की स्थिति काफी हद तक नियंत्रण में रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से जून 2026 के बीच जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बिजली की unmet demand एक प्रतिशत से भी कम रही। जून में यह अंतर सबसे ज्यादा 0.9 प्रतिशत था। इससे पता चलता है कि सामान्य परिस्थितियों में बिजली की उपलब्धता काफी बेहतर रही है, लेकिन पीक समय में बढ़ती मांग अब भी चुनौती बनी हुई है।
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पीक ऑवर्स में बिजली की कमी का असर घरों, दुकानों, उद्योगों और दूसरे जरूरी कामों पर पड़ सकता है। खासतौर पर गर्मी के मौसम में बिजली की मांग बढ़ने से एयर कंडीशनर, कूलर और अन्य उपकरणों का इस्तेमाल ज्यादा होता है। ऐसे में मांग और उपलब्धता के बीच अंतर को कम करना जरूरी हो जाता है।
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कुल मिलाकर, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए अगस्त में 13.9 प्रतिशत संभावित बिजली शॉर्टफॉल एक चिंता का विषय जरूर है, लेकिन यह मुख्य रूप से पीक ऑवर्स तक सीमित रहने का अनुमान है। आने वाले वर्षों में बिजली की मांग लगातार बढ़ने की संभावना को देखते हुए नई बिजली क्षमता बढ़ाने, ट्रांसमिशन व्यवस्था मजबूत करने और बिजली वितरण को बेहतर बनाने पर ध्यान देना जरूरी होगा। इससे भविष्य में बढ़ती मांग को आसानी से पूरा किया जा सकेगा और लोगों को बेहतर एवं भरोसेमंद बिजली आपूर्ति मिल सकेगी।





