भारत अमेरिका अपनी मित्रता को बढ़ाते हुए अपना युद्ध अभ्यास 2026 राजस्थान के रेगिस्तान से उत्तराखंड के पहाड़ों तक चल रहा है। दोनों देशों की सेनाएं इस समय अलग-अलग तरह के युद्ध मैदानों में साथ प्रशिक्षण ले रही हैं। 22वें संस्करण का यह संयुक्त सैन्य अभ्यास उत्तराखंड के औली और राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में एक साथ चल रहा है। दोनों देशों के करीब 600-600 सैनिक इसमें हिस्सा ले रहे हैं।
बता दें कि राजस्थान की रेत से लेकर उत्तराखंड के ऊँचे पहाड़ों में भारतीय सेना के AH-64E अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर ग्राउंड सैनिकों के साथ मिलकर विमानों को नई ऊंचाइयाँ दे रहे हैं। इसी दौरान अपाचे की प्रैक्टिस में दुश्मन इलाके में सटीकता से वार करना और क्लोज एयर सपोर्ट की भी ट्रेनिंग दी जा रही है।
युद्ध अभ्यास में भारत की धनुष तोप और पिनाका रॉकेट सिस्टम के साथ अमेरिकी M777 हॉवित्जर और HIMARS भी शामिल हैं। ड्रोन के खतरे से निपटने के लिए काउंटर-ड्रोन सिस्टम और L70 एयर डिफेंस गन की भी ड्रिल की जा रही है।
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औली में पहाड़ों पर युद्ध की तैयारी
उत्तराखंड के औली में भारतीय और अमेरिकी सैनिक ऊँचाई वाले पहाड़ी इलाके में युद्ध की ट्रेनिंग कर रहे हैं। यहां दोनों सेनाओं का फोकस पहाड़ी और अर्ध-पहाड़ी इलाकों में संयुक्त अभियान चलाने पर है। सैनिकों को ठंडे मौसम में ऑपरेशन, पैदल युद्ध, निगरानी और ड्रोन से जुड़ी गतिविधियों का अभ्यास कराया जा रहा है।
इस अभ्यास का एक अहम हिस्सा मानव रहित प्रणालियां यानी ड्रोन और काउंटर-ड्रोन तकनीक है। आधुनिक युद्ध में ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी, टारगेट की पहचान और हमले के लिए तेजी से बढ़ा है। ऐसे में दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे की रणनीति और तकनीक को समझने के साथ मिलकर इन प्रणालियों का इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग ले रही हैं।
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राजस्थान के रेगिस्तान में हथियारों की फायरिंग
दूसरी तरफ राजस्थान की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में सैनिकों को खुले और रेगिस्तानी इलाके में फायरिंग का अभ्यास कराया जा रहा है। यहां आधुनिक हथियार प्रणालियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। अमेरिकी सेना के मुताबिक अभ्यास में हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम यानी HIMARS, स्टिंगर और काउंटर-ड्रोन सिस्टम M-LIDS जैसी क्षमताओं को भी शामिल किया गया है।
इस दौरान भारतीय सेना की तरफ से पिनाका जैसे रॉकेट सिस्टम और अन्य तोपखाने की क्षमताओं को भी अभ्यास का हिस्सा बनाया गया है। वहीं भारतीय सेना के एएच-64ई अपाचे अटैक हेलिकॉप्टरों की मौजूदगी ने भी इस अभ्यास को खास बनाया है।
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600-600 सैनिक ले रहे हिस्सा
‘युद्ध अभ्यास 2026’ में भारत और अमेरिका की ओर से करीब 600-600 सैनिक हिस्सा ले रहे हैं। भारतीय दल का नेतृत्व 14वीं इन्फैंट्री डिवीजन से जुड़ी इकाइयां कर रही हैं, जबकि अमेरिकी दल में 11वीं एयरबोर्न डिवीजन की 1st इन्फैंट्री ब्रिगेड कॉम्बैट टीम के सैनिक शामिल हैं।
इस अभ्यास में दोनों सेनाएं सिर्फ मैदान में हथियार चलाने की ट्रेनिंग नहीं कर रही हैं, बल्कि कमांड और कंट्रोल, योजना बनाने और अलग-अलग यूनिट के बीच तालमेल पर भी काम कर रही हैं। बता दें कि इस साल के अभ्यास में पहाड़ी युद्ध, ठंडे मौसम में ऑपरेशन, ड्रोन और काउंटर-ड्रोन तकनीक के साथ-साथ सटीक फायरिंग और आधुनिक हथियार प्रणालियों पर ध्यान दिया जा रहा है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, अभ्यास से दोनों सेनाओं को अलग-अलग परिस्थितियों में संयुक्त अभियान की योजना बनाने और उसे लागू करने की क्षमता को बेहतर करने का अवसर मिल रहा है।





