बॉन्ड तोड़कर जंतर-मंतर क्यों गए?’ दिल्ली हाईकोर्ट में CJP की मुश्किलें बढ़ीं, उठे कई सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट में 21 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की ओर से न्यायिक हिरासत दो दिन बढ़ाने के आदेश को चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने सवाल उठाया कि जब दोनों ने 10 अक्टूबर को शांति बनाए रखने का बॉन्ड दिया था, तो अगले ही दिन उसके उल्लंघन का आरोप क्यों सामने आया। कोर्ट ने यह भी पूछा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करना था तो संबंधित प्रशासन से अनुमति क्यों नहीं मांगी गई। अदालत की टिप्पणियों के बाद दोनों नेताओं ने अपनी याचिका वापस लेने का फैसला किया।

Palak Gupta

21 अक्टूबर 2026

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बॉन्ड तोड़कर जंतर-मंतर क्यों गए?’ दिल्ली हाईकोर्ट में CJP की मुश्किलें बढ़ीं, उठे कई सवाल

दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की मुश्किलें बढ़ती नजर आईं। बुधवार, 21 अक्टूबर को दिल्ली हाईकोर्ट में उनकी याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों नेताओं ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की ओर से उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन बढ़ाने के आदेश को चुनौती दी थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान अदालत ने उनके वकील से कई सवाल किए। कोर्ट की टिप्पणियों के बाद दोनों ने अपनी याचिका वापस ले ली है।

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10 अक्टूबर को बॉन्ड दिया, अगले दिन उल्लंघन का आरोप

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सुब्रमणियम प्रसाद ने इस बात पर सवाल उठाया कि जब सौरव दास और आशुतोष रांका ने 10 अक्टूबर को शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड दिया था, तो उसके अगले ही दिन यानी 11 अक्टूबर को उसके उल्लंघन का आरोप कैसे सामने आया। अदालत ने पूछा कि ऐसी स्थिति में प्रशासन उनसे दोबारा शांति बनाए रखने का भरोसा किस आधार पर करे।

यह मामला जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने और वहां लगाए गए प्रतिबंधों से जुड़ा है। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों नेताओं ने पहले शांति बनाए रखने का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में प्रतिबंधित प्रदर्शन स्थल पर पहुंचने और बैरिकेड पार करने की घटना सामने आई। इसी आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।

बता दें कि ल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह सवाल भी उठाया कि अगर दोनों नेता जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करना चाहते थे, तो उन्होंने संबंधित जिला प्रशासन से अनुमति लेने का रास्ता क्यों नहीं अपनाया। अदालत ने यह भी पूछा कि जब किसी स्थान पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं थी, तो वहां जाने की जरूरत क्या थी।

जंतर-मंतर लंबे समय से विरोध-प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र रहा है, लेकिन वहां प्रदर्शन की अनुमति और जगह से जुड़े नियम लागू होते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, संबंधित स्थल को प्रदर्शन के लिए अधिसूचित स्थानों की सूची से हटाया जा चुका था। ऐसे में अदालत ने कानून और प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन करने के महत्व पर जोर दिया।

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बैरिकेड पार करने पर भी कोर्ट ने जताई चिंता

सुनवाई के दौरान अदालत ने बैरिकेड लगाए जाने के उद्देश्य पर भी सवाल उठाए। कोर्ट की चिंता थी कि यदि प्रदर्शनकारी बैरिकेड पार करके प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करते हैं, तो इससे दूसरे लोग भी ऐसा करने के लिए प्रेरित हो सकते हैं और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है।

अदालत ने इस बात पर भी ध्यान दिलाया कि किसी प्रदर्शन के दौरान नेताओं के आचरण का असर वहां मौजूद अन्य लोगों पर पड़ सकता है। ऐसे में सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शन करते समय तय नियमों का पालन करना जरूरी है। इसके अलावा सौरव दास और आशुतोष रांका ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के 19 अक्टूबर के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इस आदेश के तहत दोनों की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई थी। इससे पहले उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।

याचिका में दोनों पक्षों की ओर से हिरासत बढ़ाने की प्रक्रिया और जमानतदारों को अस्वीकार किए जाने पर सवाल उठाए गए थे। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी पूछा कि जब मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देने के लिए अपील का विकल्प उपलब्ध है, तो सीधे हाईकोर्ट में याचिका क्यों दाखिल की गई।

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सुनवाई के दौरान अदालत की टिप्पणियों के बाद सौरव दास और आशुतोष रांका ने अपनी याचिका वापस लेने की मांग की, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। बता दें कि मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया संबंधित मजिस्ट्रेट और उपलब्ध वैकल्पिक उपायों के तहत जारी रह सकती है।

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Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate,…और पढ़ें
Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate, credible, and reader-centric reporting, driven by a commitment to ethical journalism and continuous professional growth.

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