बिहार में फर्जी IAS के घर मिले बारहसिंगा के दो सींग, जानें कितनी हो सकती है सजा

बिहार के खगड़िया में फर्जी IAS अधिकारी बनकर घूम रहे मनीष कुमार गुप्ता की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसके घर से कई चौंकाने वाली चीजें बरामद की हैं। तलाशी में महंगी गाड़ियां, विदेशी शराब, क्रेडिट-डेबिट कार्ड और लैपटॉप के अलावा बारहसिंगा के दो सींग भी मिले। आरोपी कथित तौर पर करीब 10 वर्षों से फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर रहा था और खुद को NSA अजीत डोभाल का अंडरकवर एजेंट भी बताता था। अब पुलिस फर्जी पहचान और वन्यजीव से जुड़े मामले की जांच कर रही है।

Shakshi Chauhan

11 अगस्त 2026

1 min read
बिहार में फर्जी IAS के घर मिले बारहसिंगा के दो सींग, जानें कितनी हो सकती है सजा

बिहार के खगड़िया जिले में फर्जी IAS अधिकारी बनकर घूम रहे एक व्यक्ति की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को उसके घर से कई चौंकाने वाली चीजें बरामद हुई हैं। आरोपी की पहचान मनीष कुमार गुप्ता के रूप में बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार, आरोपी लंबे समय से खुद को IAS अधिकारी बताकर लोगों पर प्रभाव जमाता था। इतना ही नहीं, वह खुद को देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का अंडरकवर एजेंट भी बताता था।

पुलिस की छापेमारी के दौरान आरोपी के घर से महंगी गाड़ियों, विदेशी शराब की बोतलों, कई क्रेडिट और डेबिट कार्ड, लैपटॉप सहित अन्य सामान बरामद किए गए। हालांकि, इन बरामदगी में सबसे ज्यादा चर्चा बारहसिंगा के दो सींगों की हो रही है। संरक्षित वन्यजीव से संबंधित इन सींगों की बरामदगी ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

करीब दस साल से चला रहा था फर्जी पहचान

पुलिस के मुताबिक, आरोपी कथित तौर पर करीब दस वर्षों से अपनी झूठी पहचान का इस्तेमाल कर रहा था। वह खुद को सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को प्रभावित करता था और अपनी गाड़ियों पर भी सरकारी बोर्ड लगाकर घूमता था। जांच के दौरान पुलिस को उसके बारे में कई ऐसी जानकारियां मिलीं, जिनसे उसके फर्जी अधिकारी बनने की कहानी सामने आई।

अब पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि उसने फर्जी IAS अधिकारी बनकर किन लोगों को प्रभावित किया और क्या इस पहचान का इस्तेमाल किसी तरह के आर्थिक लाभ या धोखाधड़ी के लिए किया गया था।

बारहसिंगा के सींग रखना क्यों है अपराध?

बारहसिंगा भारत के संरक्षित वन्यजीवों में शामिल है। ऐसे वन्यजीवों के शिकार, उनके अंगों को रखने या उनकी खरीद-बिक्री पर कानून के तहत प्रतिबंध है। यही कारण है कि किसी संरक्षित जानवर के सींग या शरीर के अन्य हिस्से का निजी तौर पर रखा जाना भी गंभीर कानूनी मामला बन सकता है।

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के तहत संरक्षित वन्यजीवों से जुड़े अपराधों में जेल और जुर्माने का प्रावधान है। रिपोर्ट के अनुसार, इस तरह के अपराध में दोषी पाए जाने पर तीन से सात वर्ष तक की सजा और जुर्माना हो सकता है।

फर्जी IAS बनने पर भी हो सकती है कार्रवाई

किसी व्यक्ति द्वारा बिना अधिकार खुद को सरकारी अधिकारी बताना भी कानूनन गंभीर मामला है। यदि कोई व्यक्ति फर्जी सरकारी पहचान का इस्तेमाल करके दूसरे लोगों को गुमराह करता है या धोखाधड़ी के जरिए आर्थिक अथवा अन्य लाभ प्राप्त करता है, तो उसके खिलाफ संबंधित आपराधिक धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर तीन वर्ष तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान हो सकता है। यदि फर्जी पहचान के जरिए किसी व्यक्ति को बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया हो, तो मामले की गंभीरता के अनुसार अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।

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फर्जी IAS अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब बरामद सामान और उसकी गतिविधियों की जांच कर रही है। बारहसिंगा के सींग कहां से आए, उन्हें आरोपी ने कब और कैसे हासिल किया तथा उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा था, इन सवालों के जवाब जांच के दौरान सामने आ सकते हैं।

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यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि वन्यजीवों के अंगों को घर में रखना केवल शौक या सजावट का विषय नहीं है, बल्कि संरक्षित प्रजातियों से जुड़े मामलों में इसके गंभीर कानूनी परिणाम हो सकते हैं। साथ ही, सरकारी अधिकारी होने का झूठा दावा करके लोगों को प्रभावित करना भी कानून की नजर में अपराध है।

Shakshi Chauhan
लेखक परिचय
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Shakshi Chauhan is a college student. she writes with her mind completely involved in writing. Even though she is into commerce field, but she…और पढ़ें
Shakshi Chauhan is a college student. she writes with her mind completely involved in writing. Even though she is into commerce field, but she still has passion for writing. It was her hobby and now she wants to hone the same and work on it. She really enjoys articulating things in her own way