भारतीय रेलवे ने शुरू की खास नौकरी – डीपीआर में कमी रिपोर्ट करने पर एक लाख रुपये का वेतन पाएँ

रेलवे अब बड़े प्रोजेक्ट्स की डीपीआर रिटायर्ड अधिकारियों से जांच कराएगा ताकि देरी और बढ़ती लागत रोकी जा सके। सेक्टर एक्सपर्ट्स को इसके लिए प्रतिदिन एक लाख रुपये तक का मानदेय मिलेगा।
भारतीय रेलवे ने शुरू की खास नौकरी - डीपीआर में कमी रिपोर्ट करने पर एक लाख रुपये का वेतन पाएँ

भारतीय रेलवे ने अपने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में होने वाली देरी और बढ़ती लागत पर लगाम लगाने के लिए एक अहम और अलग तरह की पहल शुरू की है। अब नई रेल लाइनों और बड़े निर्माण कार्यों की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट यानी डीपीआर को अंतिम रूप देने से पहले अनुभवी रिटायर्ड अधिकारियों से उसकी गहन जांच कराई जाएगी।

रेलवे का मानना है कि काम शुरू होने से पहले ही अगर खामियां पकड़ ली जाएं तो समय और धन दोनों की बड़ी बचत की जा सकती है। रेलवे इन सेवानिवृत्त अधिकारियों को सेक्टर एक्सपर्ट के रूप में नियुक्त करेगा। ये अधिकारी लंबे समय तक रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े रहे हैं और जमीन पर काम करने का व्यापक अनुभव रखते हैं।

इन्हें उनके अनुभव के बदले प्रतिदिन एक लाख रुपये तक का मानदेय दिया जाएगा। रेलवे का उद्देश्य है कि बाहरी कंसल्टेंट्स द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में अगर कोई तकनीकी कमी, फिजूलखर्ची या अव्यवहारिक सुझाव हैं तो उन्हें पहले ही चिन्हित कर लिया जाए।

अक्सर देखा गया है कि प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद अलाइनमेंट बदलना पड़ता है या डिजाइन में सुधार करना पड़ता है। इससे काम रुकता है और बजट कई गुना तक बढ़ जाता है। रेलवे बोर्ड का मानना है कि यदि अनुभवी लोग पहले ही रिपोर्ट की बारीकी से जांच कर लें तो ऐसी स्थिति से बचा जा सकता है।

इन विशेषज्ञों का काम केवल फाइल पढ़ना नहीं होगा। उन्हें साइट पर जाकर प्रस्तावित रेल लाइन, मिट्टी की स्थिति, पुलों के डिजाइन और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को भी परखना होगा। यह भी देखा जाएगा कि स्थानीय जरूरतों का ध्यान रखा गया है या नहीं।

कहीं अनावश्यक खर्च तो नहीं जोड़ा गया, पेड़ों की कटाई को कम करने के उपाय हैं या नहीं, और लोगों के लिए जरूरी अंडरपास या रास्ते शामिल किए गए हैं या नहीं। अगर उन्हें लगे कि कुछ चीजें बेवजह जोड़ी गई हैं तो वे उन्हें हटाने की सिफारिश भी करेंगे।

मानदेय तय करने के लिए रेलवे ने दूरी के आधार पर एक व्यवस्था बनाई है। मैदानी क्षेत्रों में हर 50 किलोमीटर और पहाड़ी इलाकों में हर 30 किलोमीटर की जांच के लिए एक दिन का भुगतान होगा। इसके अलावा यात्रा और अन्य भत्ते भी वरिष्ठ अधिकारियों के बराबर मिलेंगे।

इन सेक्टर एक्सपर्ट्स का चयन एक उच्च स्तरीय समिति करेगी और जनरल मैनेजर की मंजूरी के बाद उन्हें तीन साल के लिए पैनल में रखा जाएगा। फिलहाल इसे पायलट आधार पर लागू किया जा रहा है। हर जोनल रेलवे से तीन प्रोजेक्ट चुनने को कहा गया है।

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इन प्रोजेक्ट्स पर काम के अनुभव और छह महीने के फीडबैक के बाद तय किया जाएगा कि इस व्यवस्था को आगे सभी बड़े प्रोजेक्ट्स में लागू किया जाए या नहीं। आवेदन प्रक्रिया भी जल्द शुरू होगी और योग्य रिटायर्ड अधिकारी रेलवे की वेबसाइट या अखबारों में जारी होने वाले विज्ञापन के जरिए आवेदन कर सकेंगे।

रेलवे को उम्मीद है कि अगले एक से दो महीनों में चयनित अधिकारी मैदान में उतरकर काम शुरू कर देंगे। अगर यह प्रयोग सफल रहा तो आने वाले समय में रेल परियोजनाओं की योजना बनाने और उन्हें समय पर पूरा करने की दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।