दिल्ली में हाल फिलहाल में ही हुए छात्र आंदोलन का विरोध प्रदर्शनों के बाद दर्ज हुई फिर और पुलिस कार्रवाई का मामला अब कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। इस बीच वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने प्रदर्शनकारी छात्रों और युवाओं की कानूनी मदद के लिए बड़ा कदम उठाया है।
छात्र आंदोलन के बीच कानूनी सहायता की बड़ी पहल
उन्होंने CJP (citizen of justice and peace) द्वारा बनाए गए लीगल एंड फंड में एक करोड रुपए देने की घोषणा की है। इस राशि का प्रयोग उन छात्रों और प्रदर्शन कार्यों की कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए किया जाएगा जिनके खिलाफ विभिन्न राज्यों में मामले दर्ज हैं।
हाल के दिनों में विभिन्न राज्यों में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में एफआईआर दर्ज हुई है कहीं छात्रों का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बावजूद उनके खिलाफ कठोर धाराओं में मामले दर्ज है। दूसरी और पुलिस का कहना है कि कहीं स्थान पर हिंसा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान और कानून व्यवस्था बिगड़ने जैसी घटना भी सामने आई जिनकी जांच की जा रही है।
कपिल सिब्बल ने लीगल एड फंड में दिए एक करोड रुपए
इसी पृष्ठभूमि में कपिल सिब्बल ने कहा कि हर नागरिक को न्याय पाने का अधिकार है और आर्थिक स्थिति किसी की कानूनी लड़ाई में बाधा नहीं बननी चाहिए। उनका मानना है कि जिन लोगों के खिलाफ मामले दर्ज हुए उन्हें निष्पक्ष कानूनी सहायता मिलनी चाहिए ताकि अदालत में उनका पक्ष पूरी मजबूती से रखा जा सके। इसी उद्देश्य से उन्होंने एक करोड रुपए के योगदान की घोषणा की।
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किन छात्रों को मिलेगी कानूनी सहायता?
CJP ने बताया कि यह लीगल ऐड फंड केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रहेगा संगठन देशभर में वकीलों का नेटवर्क तैयार करेगा। जरूरतमंद छात्रों को मुफ्त कानून में सलाह देगा और उनके मामलों की पर भी के लिए विशेषज्ञ अधिवक्ताओं की टीम भी उपलब्ध करवाएगा। इसके साथ ही संगठन एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी शुरू करने की तैयारी में है जहां प्रभावित छात्र सहायता के लिए आवेदन कर सकेंगे।
संगठन का कहना है कि यदि किसी छात्र के खिलाफ केवल प्रदर्शन में शामिल होने के कारण मामला दर्ज हुआ है तो उसे उचित कानूनी संरक्षण मिलना चाहिए। वहीं सरकार और पुलिस का पक्ष है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उनके जिम्मेदारी है और हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई कानून के अनुसार की जाएगी। ऐसे मामलों में अंतर निर्णय अदालत के माध्यम से ही होगा।
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सरकार और विपक्ष के बीच बड़ी राजनीतिक बहस
इस पूरे घटना करने में राजनीतिक बहस को भी तेज कर दिया है। विपक्षी दल से लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं जबकि सरकार का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध और हिंसक गतिविधियों के बीच स्पष्ट अंतर किया जाना चाहिए। दोनों पक्ष अपने तर्कों के साथ सामने आए हैं।
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और मामला अब न्यायिक प्रक्रिया के साथ-साथ राजनीतिक चर्चा का भी हिस्सा बन गया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े स्तर पर कानूनी सहायता उपलब्ध होने से कई छात्रों को न्यायिक प्रक्रिया समझने और अपने अधिकारों की रक्षा करने में मदद मिल सकती है।





