उत्तर प्रदेश के बरेली में एसआईटी ने करीब 100 करोड़ रुपये के बड़े जीएसटी फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि फर्जी फर्में बनाकर बिना किसी वास्तविक कारोबार के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का गलत तरीके से लाभ लिया जा रहा था। इस पूरे नेटवर्क का संचालन बरेली से लेकर नेपाल तक फैला हुआ था। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गिरोह के सरगना समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वहीं, इस मामले में छह अन्य आरोपियों की तलाश अभी जारी है।
पुलिस के अनुसार, इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था। जांच के दौरान पता चला कि गिरोह ने कई फर्जी कंपनियां बनाकर उनके नाम से बिल तैयार किए। इन बिलों में सामान की खरीद-बिक्री दिखाई जाती थी, जबकि वास्तव में कोई लेनदेन नहीं होता था। इसके आधार पर जीएसटी के तहत बोगस आईटीसी क्लेम किया जाता था। इस तरह सरकारी राजस्व को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया।
इस मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों में बरेली निवासी सागर अग्रवाल, फरजान हाशमी, विनीत अरोड़ा, अनुज अग्रवाल और शिवम गुप्ता उर्फ लाला शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक सागर अग्रवाल इस पूरे सिंडिकेट का मुख्य सरगना था। वहीं फरजान हाशमी फर्जी फर्म से जुड़ा मुख्य ऑपरेटर बताया गया है। गिरोह के सदस्य अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालते थे। कोई फर्जी फर्मों के रिटर्न तैयार करता था तो कोई पैसों के लेनदेन और उन्हें अलग-अलग लोगों तक पहुंचाने का काम करता था।
जांच में यह भी पता चला कि इस नेटवर्क में करीब 17 फर्मों के नाम सामने आए हैं। इनमें कुछ फर्मों का इस्तेमाल फर्जी बिल बनाने के लिए किया जाता था, जबकि कुछ को लाभ लेने वाली फर्मों के रूप में इस्तेमाल किया गया। पुलिस के अनुसार नेटवर्क का संबंध बरेली के अलावा दिल्ली, रामपुर और नेपाल से भी जुड़ा हुआ था। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह कोई छोटा-मोटा फर्जीवाड़ा नहीं, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से चलाया जा रहा बड़ा नेटवर्क था।
पुलिस के मुताबिक फरजान हाशमी जीएसटी अधिकारियों की कार्रवाई के बाद नेपाल भाग गया था। वहां वह कथित तौर पर दूसरे नाम से रह रहा था और एक मैसेजिंग एप के जरिए बरेली में मौजूद अपने साथियों के संपर्क में था। जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी आधार और पैन कार्ड की मदद से नई फर्में तैयार की जाती थीं। इसके बाद इन फर्मों के नाम पर कागजों में लेनदेन दिखाकर जीएसटी का फर्जी क्लेम किया जाता था।
इस फर्जीवाड़े में पैसों के लेनदेन का तरीका भी काफी संगठित बताया गया है। पुलिस के अनुसार रकम अलग-अलग खातों और लोगों के माध्यम से घुमाई जाती थी। इसके बाद पैसे गिरोह के सदस्यों तक पहुंचाए जाते थे और कथित तौर पर हवाला के जरिए हिस्सेदारी बांटी जाती थी। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से लैपटॉप और छह मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
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इस मामले की शुरुआत एक फर्म के जरिए करीब 59 लाख रुपये के फर्जी आईटीसी क्लेम की शिकायत से हुई थी। इसके बाद जांच आगे बढ़ी तो पूरा नेटवर्क सामने आता गया। अब कई अन्य फर्में और कारोबारी भी जांच के दायरे में आ गए हैं। पुलिस ने छह फरार आरोपियों की पहचान भी कर ली है और उनकी गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई जारी है।
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जीएसटी फर्जीवाड़े का यह मामला बताता है कि फर्जी दस्तावेजों और कंपनियों के जरिए सरकारी टैक्स व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की कोशिश किस तरह की जा सकती है। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों के लिए फर्जी फर्मों, बैंक खातों, डिजिटल रिकॉर्ड और पैसों के लेनदेन की पूरी कड़ी को जोड़ना महत्वपूर्ण होता है। बरेली एसआईटी की इस कार्रवाई के बाद आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और फर्मों के बारे में भी और जानकारी सामने आने की संभावना है।





