बिहार में बिजली उत्पादन को लेकर एक बड़ी योजना सामने आई है। भागलपुर जिले के पीरपैंती में बन रहे अडानी पावर के थर्मल पावर प्रोजेक्ट की क्षमता दोगुनी करने की तैयारी है। अब तक यहां 2,400 मेगावाट बिजली उत्पादन की योजना थी, लेकिन ताजा मंजूरी के बाद इसे बढ़ाकर 4,800 मेगावाट किया जाएगा। इसके लिए तीन नई इकाइयां जोड़ी जाएंगी।
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पीरपैंती में यह परियोजना पहले से ही बिहार के बड़े ऊर्जा निवेशों में गिनी जा रही है। क्षमता बढ़ने के बाद इसका दायरा और बड़ा हो जाएगा। बता दें कि वर्तमान में प्लांट की तीन यूनिट का निर्माण कार्य चल रहा है, जिसके बाद विस्तार योजना के तहत तीन अतिरिक्त नई यूनिट की स्थापना की जाएगी। यह विशाल प्लांट अडानी पावर लिमिटेड द्वारा पीरपैंती अंचल के सिरमतपुर, हरिनकोल, मुंडवा (तुंडवा), सुंदरपुर और आसपास के गांवों के चिह्नित क्षेत्र में लगाया जा रहा है।
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तीन नई इकाइयां जुड़ने से बढ़ेगी क्षमता
पीरपैंती थर्मल पावर प्रोजेक्ट की शुरुआती योजना 800 मेगावाट की तीन इकाइयां लगाने की थी। इनसे कुल 2,400 मेगावाट बिजली पैदा होनी थी। अब क्षमता बढ़ाकर 4,800 मेगावाट करने के लिए तीन और इकाइयां जोड़ने की योजना है। यानी परियोजना पूरी होने पर यहां कुल छह इकाइयां होंगी।
इस तरह पीरपैंती में बड़े स्तर पर बिजली उत्पादन की व्यवस्था तैयार की जाएगी। बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए इस तरह की परियोजनाएं अहम मानी जाती हैं, खासकर उन राज्यों में जहां उद्योग, शहरीकरण और घरेलू खपत के साथ बिजली की जरूरत लगातार बढ़ रही है।
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करीब 30 हजार करोड़ रुपये का निवेश
पीरपैंती परियोजना पर अडानी पावर की ओर से पहले करीब 30 हजार करोड़ रुपये के निवेश की योजना बताई गई थी। शुरुआती 2,400 मेगावाट वाले प्लांट के लिए बिहार सरकार के साथ बिजली आपूर्ति का समझौता भी किया गया था। कंपनी के मुताबिक, इस परियोजना से निर्माण के दौरान प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 10 हजार से 12 हजार लोगों को काम मिलने की संभावना है। प्लांट चालू होने के बाद भी रोजगार के अवसर बनने की उम्मीद है।
इस परियोजना का एक बड़ा उद्देश्य बिहार की बिजली जरूरतों को पूरा करने में मदद करना है। शुरुआती योजना के तहत 2,400 मेगावाट बिजली की आपूर्ति के लिए राज्य की बिजली कंपनियों के साथ समझौता किया गया था। क्षमता बढ़ने से कुल उत्पादन की संभावना तो बढ़ेगी, लेकिन अतिरिक्त बिजली का कितना हिस्सा बिहार को मिलेगा और कितनी बिजली अन्य जगहों पर दी जाएगी, यह संबंधित समझौतों और आगे के फैसलों पर निर्भर करेगा।
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बता दें कि पीरपैंती परियोजना की क्षमता 4,800 मेगावाट करने का फैसला बिहार के ऊर्जा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि तीन नई इकाइयों के निर्माण की प्रक्रिया कब शुरू होती है, कुल निवेश में कितना बदलाव आता है और परियोजना को पूरा करने के लिए क्या समयसीमा तय की जाती है।





