भारत-पाक दौरे पर US राष्ट्रपति ने क्यों लिया था ‘सीक्रेट प्लेन’? 26 साल पुराना किस्सा

अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए कई बार ऐसी गुप्त रणनीतियां अपनाई जाती हैं, जिनमें डिकॉय प्लेन का इस्तेमाल भी शामिल है। ट्रंप की हालिया गुप्त विमान यात्रा ने इस रणनीति को फिर चर्चा में ला दिया है। इससे पहले बिल क्लिंटन समेत कई अमेरिकी राष्ट्रपति संवेदनशील यात्राओं के दौरान अपनी वास्तविक लोकेशन छिपाने की ऐसी रणनीति अपना चुके हैं।

Shakshi Chauhan

12 अगस्त 2026

1 min read
भारत-पाक दौरे पर US राष्ट्रपति ने क्यों लिया था ‘सीक्रेट प्लेन’? 26 साल पुराना किस्सा

अमेरिका राष्ट्रपति की सुरक्षा दुनिया की सबसे बड़ी सुरक्षा व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। राष्ट्रपति जब विदेश यात्रा पर जाते हैं तो उनकी सुरक्षा के लिए कई तरह की योजनाएं बनाई जाती है इनमें से कुछ इतनी गुप्त होती है यह राष्ट्रपति के साथ यात्रा कर रहे लोगों को भी इसकी जानकारी नहीं होती।

हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप एक गुप्त बीमारी यात्रा में इस व्यवस्था को फिर चर्चा में ला दिया है रिपोर्टर्स के अनुसार ट्रंप को सुरक्षा खतरा के चलते एक विमान से दूसरे विमान में बेहद को तरीके से भेजा गया था इस दौरान एक विमान को डिकॉय यानी भ्रम पैदा करने वाली विमान के तौर पर इस्तेमाल किया गया।

क्या होता है डिकॉय प्लेन?

डिकॉय प्लेन का मतलब ऐसे विमान से है जिसका इस्तेमाल दुश्मन या संभावित हमलावर को भ्रमित करने के लिए किया जाता है इसमें जरूरी नहीं कि राष्ट्रपति खुद मौजूद हो विमान को इस तरह से उड़ाया जाता है कि बाहर से देखने वाले को ऐसा लगे कि राष्ट्रपति की समान में सफर कर रहे हैं।

इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रपति की वास्तविक स्थिति को छुपाना होता है अगर किसी हमले का खतरा हो तो हमलावर के लिए यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि राष्ट्रपति वास्तव में किस विमान में है अमेरिकी राष्ट्रपति की यात्राओं में इस तरह की सुरक्षा रणनीतिक इस्तेमाल पहले भी किया जा चुका है।

ट्रंप के साथ क्या हुआ?

होलिया मामले में ट्रंप जुलाई 2026 में तुर्की में नाटो शिखर सम्मेलन के बाद ब्रिटेन के लिए रवाना हुए थे। रिपोर्टरों के मुताबिक उसे समय अमेरिकी अधिकारियों को ट्रंप पर संभावित खतरे की विश्वसनीय जानकारी मिली थी इसके बाद सुरक्षा एजेंटीयों ने राष्ट्रपति को सामान्य तरीके से यात्रा करने के बजे एक बेहद गुप्त योजना बनाएं।

रिपोर्टर्स के अनुसार ट्रंप पहले पुराने एयर फोर्स वन विमान पर सवार हुए इसके बाद उन्हें एयरपोर्ट के एक कैटरिंग वहां के जरिए चुपचाप छोटे सी 32 ए सैन्य विमान तक पहुंचाया गया ट्रंप इस विमान से ब्रिटेन पहुंचे जबकि पत्रकारों और कुछ अमेरिकी अधिकारियों को लेकर बड़ा विमान अलग से रवाना हुआ इस विमान को ही डिकॉय के तौर पर इस्तेमाल किया गया।

पत्रकारों को भी नहीं थी पूरी जानकारी

इस घटना की सबसे बड़ी खास बात यही है कि विमान में मौजूद कई लोगों को ट्रंप के अल सफर की जानकारी थी ही नहीं रिपोर्टर के अनुसार विमान में मौजूद पत्रकारों से खिड़कियों के पर्दे बंद रखने के लिए कहा गया था यह सुरक्षा व्यवस्था आमतौर पर संवेदनशील या युद्ध क्षेत्र की परिस्थितियों में देखने को मिलती है।

बाद में ट्रंप ब्रिटेन में फिर अपने आधिकारिक विमान से जुड़े और अमेरिका लौट ट्रंप ने इस घटना को लेकर कहा कि उन्हें सुरक्षा अधिकारियों की सलाह पर दूसरे विमान में भेजा गया था उन्होंने संभावित खतरे को ज्यादा गंभीर बताने से भी इनकार किया।

बिल क्लिंटन भी कर चुके हैं ऐसी रणनीति का इस्तेमाल

डिकॉय प्लेन की रणनीति सिर्फ ट्रंप के मामले तक सीमित नहीं है अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने भी साल 2000 में भारत और पाकिस्तान की यात्रा के दौरान इसी तरह की सुरक्षा रणनीति अपनाई थी। क्लिंटन उसे समय दक्षिणी एशिया के दौरे पर थे भारत यात्रा के बाद उन्हें पाकिस्तान जाना था उसे समय भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी ज्यादा देखने को मिले थे ऐसे में उनकी सुरक्षा को लेकर विशेष सावधानी बढ़ती गई थी।

रिपोर्टरों के मुताबिक क्लिंटन को इस सैन्य विमान से जाते हुए दिखाया गया लेकिन वह वास्तव में दूसरे विमान में चले गए थे दोनों विमान ने पाकिस्तान की ओर से उड़ान भरी इस तरह राष्ट्रपति की वास्तविक लोकेशन को लेकर भ्रम बनाए रखा गया हालांकि उसे समय प्रेस टीम को यह जानकारी थी कि राष्ट्रपति किस विमान में है यह स्पष्ट नहीं किया गया था।

दूसरे राष्ट्रपतियों ने भी अपनी गुप्त यात्रा

अमेरिकी राष्ट्रपतियों की यात्राओं में सुरक्षा के लिए गोपनीयता कोई बड़ी बात नहीं है जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने 2003 में इराक की अचानक और गुप्त यात्रा की थी उनकी यात्रा भी जानकारी तक सार्वजनिक नहीं की गई थी। जब उनका विमान वापस अमेरिका की ओर उड़ान भर चुका था।

बराक ओबामा ने भी 2010 में अफगानिस्तान की एक गुप्त यात्रा की थी वही जो बिडेन ने 2023 में यूक्रेन के कीव अचानक यात्रा की थी। उनकी यात्रा को सुरक्षा कर्म से बेहद गुप्त रखा गया था हालांकि उनके साथ सीमित संख्या में पत्रकार भी मौजूद थे।

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सुरक्षा और पारदर्शिता के बीच सवाल

डिकॉय प्लेन की रणनीति राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण हो सकती है लेकिन इसके साथ प्रदर्शित को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। खासकर तब जब राष्ट्रपति के साथ यात्रा कर रहे हैं पत्रकारों या अधिकारियों को यह जानकारी ना हो की वास्तविक राष्ट्रपति किस विमान में मौजूद है।

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ट्रंप के मामले ने इस वजह से ज्यादा ध्यानखींचा है। राष्ट्रपति की सुरक्षा सबसे जरूरी है लेकिन ऐसी स्थिति में यह महत्वपूर्ण है कि खतरा कम होने के बाद जनता और प्रेस को उचित जानकारी दी जाए। कुल मिलाकर दिखाएं विमान की रणनीति अमेरिका की राष्ट्रपति सुरक्षा व्यवस्था का एक बेहद बुद्ध हिस्सा है ट्रंप का हालिया मामला बनेगी असाधारण दिखाई दे रहा हो लेकिन इतिहास बताता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने खतरनाक खिलाड़ी को और संविधान सियालदह के दौरान अपनी वास्तविक लोकेशन छुपाने के लिए पहली बार ऐसी रणनीति का सहारा लिया है।

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लेखक परिचय
Shakshi Chauhan
Shakshi Chauhan is a college student. she writes with her mind completely involved in writing. Even though she is into commerce field, but she…और पढ़ें
Shakshi Chauhan is a college student. she writes with her mind completely involved in writing. Even though she is into commerce field, but she still has passion for writing. It was her hobby and now she wants to hone the same and work on it. She really enjoys articulating things in her own way