रिपोर्ट: इजराइल ने ट्रंप को हत्या की साजिश का अलर्ट दिया, ईरान पर गंभीर आरोप

हॉर्मुज़ में 3 व्यापारिक टैंकर पर हमला के बाद अमेरिका ने ईरान पर नई एयर स्ट्राइक की और तेल निर्यात की छूट भी वापस ले ली। इन हमलों से जून 2026 के संघर्ष विराम समझौते पर खतरा मंडरा रहा है। यह जल मार्ग दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है। इसलिए यहाँ की अस्थिरता का असर वैश्विक बाज़ार पर भी पड़ता है।

Shakshi Chauhan

10 जुलाई 2026

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रिपोर्ट: इजराइल ने ट्रंप को हत्या की साजिश का अलर्ट दिया, ईरान पर गंभीर आरोप

हॉर्मुज़ में फिर बढ़ा तनाव अमेरिका ने ईरान पर की फिर एक नई एयर स्ट्राइक। मिडल ईस्ट में फिर एक बार हॉर्मुज़ में मंगलवार को तीन व्यापारिक टैंकर जहाजो पर हमला हुआ। इसके बाद अमेरिका ने उसी शाम ईरान के ठिकानों पर नई एयर स्ट्राइक कर दी। इस घटना के कुछ समय पहला हुए संघर्ष विराम समझौते पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है और आगे की बातचीत मुश्किल में पड़ती दिख रही है।

अमेरिका सेंट्रल कमांड के मुताबिक़ यह हमले इसलिए किए गए ताकि निर्दोष नागरिकों द्वार संचालित व्यापारिक जहाजों पर हमला करने की भारी क़ीमत ईरान को चुकाने पड़ी। इसी दिन अमेरिका वित्त मंत्रालय ने जून में दी गई वह अनुमति भी वापस ले ली। जिसके तहत ईरान को तेल निर्यात करने की छूट दी गई थी।

घटना की बात करे तो यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड सेंटर के मुताबिक़ अल रिकायत नाम के जहाज़ पर ओमान के लिमाह से करीब आठ मिल दूर हमला हुआ। जिसमें किसी अज्ञात प्रोजेक्टाइल ने जहाज़ के कई बायीं तरफ़ टक्कर मारी और आग लग गई। इसके आलवा एक और टैंकर हॉर्मुज़ से बाहर निकलते समय प्रोजेक्टाइल की चपेट में आया। जब की तीसरा जहाज ओमान के मुसंडम प्रायदीप के पास ड्रोन हमले को शिकार हुआ। राहत की बात यह रही की इन हमलों में किसी की जान नहीं गई हालांकि जहाँजो को मामूली नुकसान जरूर पहुँचा है।

इन हमलों के बाद ट्रेड ऑपरेशन सेंटर ने हॉर्मुज़ के लिए खतरे के स्तर बढ़ाकर गंभीर कर दिया है। एजेंसी ने कहा की माहौल अब भी बेहद संवेदनशील बना हुआ है। और खासतौर पर उन जहाजो को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए जिनका पहचान सिस्टम सक्रिय रहता है।

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गौरतलब है की हॉर्मुज़ दुनिया के लिए बेहद अहम जल मार्ग माना जाता है। दुनिया के करीब एक चौथाई समुद्री तेल व्यापार का यह मुख्य रास्ता है। इसलिए यहाँ किसी भी तरह से अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों और आपूर्ति पर पड़ता है। बीते कुछ महीनों से ईरान इस जल मार्ग को लेकर लगा तार सख़्त रूख अपनाया हुए हैं। और सिर्फ़ अपनी बताए हुए रास्ते से ही जहाजो को गुज़रने की इजाज़त देने की बात करता रहा है।

जून 2026 में अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौता हुआ था, जिसका मकसद इस जल मार्ग को फिर से सामान्य रूप से खोलना और युद्ध को ख़त्म करना था। लेकिन ईरान की तरफ़ से इस इलाके पर नियंत्रण हक़ जमाने और गुज़रने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने वाले कोशिश जारी रही। जिसे अमेरिका ने पूरी तरह से ख़ारिज कर दिया है। अमेरिकी अधिकारियों ने साफ़ कहा है की इस तरह की किसी भी शुल्क प्रणाली को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसमें मदद करने वालों को भी सख़्त प्रतिबंध लगाएं जाएँगे।

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विशेषज्ञों मानना है की यह ताज़ा हमले संघर्ष विराम को और कमजोर कर सकते हैं। ऐसे में दुनिया भर की नज़र अब इस बात पर टिकी है की आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या इस अहम जल मार्ग पर शांति बहाल हो पाएगी भी या नहीं।

Shakshi Chauhan
लेखक परिचय
Shakshi Chauhan
Shakshi Chauhan is a college student. she writes with her mind completely involved in writing. Even though she is into commerce field, but she…और पढ़ें
Shakshi Chauhan is a college student. she writes with her mind completely involved in writing. Even though she is into commerce field, but she still has passion for writing. It was her hobby and now she wants to hone the same and work on it. She really enjoys articulating things in her own way