फ्रांस के न्यूक्लियर प्लांट पर जेलीफिश का ‘अटैक’, तीन रिएक्टर बंद; सुरक्षा को कितना खतरा?

फ्रांस के ग्रेवलाइन्स परमाणु ऊर्जा संयंत्र में जेलीफिश के बड़े झुंड ने कूलिंग सिस्टम के पंप और फिल्टर जाम कर दिए, जिसके बाद तीन रिएक्टरों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा।

Shakshi Chauhan

13 अगस्त 2026

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फ्रांस के न्यूक्लियर प्लांट पर जेलीफिश का ‘अटैक’, तीन रिएक्टर बंद; सुरक्षा को कितना खतरा?

फ्रांस में एक अजीबोगरीब घटना सामने आई है, जहां समुद्र में मौजूद जेलीफिश के एक बड़े झुंड की वजह से देश के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में से एक ग्रेवलाइन्स पावर प्लांट के कई रिएक्टरों को बंद करना पड़ा। यह घटना 11 अगस्त 2026 को हुई। बड़ी संख्या में जेलीफिश संयंत्र के कूलिंग सिस्टम में पहुंच गईं और पानी खींचने वाले पंपों तथा फिल्टर को जाम कर दिया। इसके बाद सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संयंत्र के तीन रिएक्टरों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया।

ग्रेवलाइन्स परमाणु ऊर्जा संयंत्र उत्तरी फ्रांस में स्थित है और पश्चिमी यूरोप की सबसे बड़ी परमाणु ऊर्जा सुविधाओं में गिना जाता है। इस संयंत्र के रिएक्टरों को ठंडा रखने के लिए समुद्र के पानी का इस्तेमाल किया जाता है। सामान्य तौर पर समुद्र का पानी पंपों के जरिए संयंत्र के कूलिंग सिस्टम तक पहुंचता है। लेकिन इस बार समुद्र में मौजूद जेलीफिश का झुंड इतनी बड़ी संख्या में पहुंच गया कि उसने पानी के फिल्टर और पंपों को प्रभावित कर दिया।

इस घटना के कारण रिएक्टर नंबर 2, 3 और 4 को बंद करना पड़ा। रिएक्टर नंबर 1 की बिजली उत्पादन क्षमता भी घटाकर लगभग 50 प्रतिशत कर दी गई। रिएक्टर नंबर 5 पहले से ही रखरखाव के लिए बंद था, जबकि रिएक्टर नंबर 6 सामान्य क्षमता पर काम करता रहा। इस तरह छह रिएक्टरों वाले संयंत्र में उस समय केवल एक रिएक्टर पूरी क्षमता से बिजली पैदा कर रहा था।

जेलीफिश के कारण परमाणु संयंत्र का बंद होना सुनने में भले ही असामान्य लगे, लेकिन इसके पीछे एक महत्वपूर्ण वजह है। परमाणु रिएक्टरों से निकलने वाली गर्मी को नियंत्रित करने के लिए लगातार कूलिंग की जरूरत होती है। इसके लिए समुद्र या अन्य जल स्रोतों से पानी लिया जाता है। अगर पानी की सप्लाई में किसी तरह की रुकावट आती है तो संयंत्र को सुरक्षित रखने के लिए बिजली उत्पादन कम करना या रिएक्टर को बंद करना जरूरी हो जाता है। इसी सुरक्षा प्रक्रिया के तहत ग्रेवलाइन्स के रिएक्टरों को बंद किया गया।

यह पहली बार नहीं है जब ग्रेवलाइन्स संयंत्र को जेलीफिश के कारण परेशानी हुई हो। लगभग एक साल पहले भी इसी तरह की घटना सामने आई थी। 2025 में भी बड़ी संख्या में जेलीफिश ने संयंत्र के कूलिंग सिस्टम को प्रभावित किया था। इस बार उस घटना को देखते हुए फ्रांसीसी बिजली कंपनी EDF ने पहले से निगरानी और बचाव के कई इंतजाम किए थे। समुद्र में जेलीफिश की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कैमरे लगाए गए और मछुआरों तथा समुद्री बचाव दलों की मदद भी ली गई।

EDF के अनुसार, शुरुआत में जेलीफिश की मात्रा कम थी, लेकिन कुछ ही समय में यह बढ़कर कई टन तक पहुंच गई। जेलीफिश को हटाने के लिए सफाई और वैक्यूम मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। कंपनी का कहना है कि इस घटना से संयंत्र की सुरक्षा, कर्मचारियों या आसपास के पर्यावरण को कोई खतरा नहीं हुआ। रिएक्टरों को बंद करना एक सावधानी भरा कदम था, ताकि कूलिंग सिस्टम में किसी बड़ी समस्या को पैदा होने से पहले ही रोका जा सके।

इस घटना ने वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों का ध्यान भी खींचा है। विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्र के बढ़ते तापमान, जलवायु परिवर्तन, अत्यधिक मछली पकड़ने और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में बदलाव जैसे कारण जेलीफिश की संख्या और उनके फैलाव को प्रभावित कर सकते हैं। यदि भविष्य में समुद्र का तापमान बढ़ता रहा और जेलीफिश के बड़े झुंड अधिक सामान्य होते गए, तो समुद्र के पानी पर निर्भर बिजली संयंत्रों के लिए यह एक नई चुनौती बन सकती है।

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फ्रांस पहले से ही गर्मी और कम पानी की समस्या के कारण अपने परमाणु बिजली उत्पादन को लेकर दबाव में है। ऐसे समय में ग्रेवलाइन्स जैसे बड़े संयंत्र में अचानक आई रुकावट बिजली आपूर्ति पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है। हालांकि, मौजूदा घटना को परमाणु दुर्घटना नहीं माना गया है और संयंत्र की सुरक्षा व्यवस्था ने स्थिति को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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कुल मिलाकर, ग्रेवलाइन्स परमाणु संयंत्र की घटना यह दिखाती है कि आधुनिक ऊर्जा ढांचे पर प्राकृति घटनाओं का भी असर पड़ सकता है। जेलीफिश का एक बड़ा झुंड परमाणु संयंत्र के लिए इतनी बड़ी परेशानी खड़ी कर सकता है, यह अपने आप में चौंकाने वाली बात है। साथ ही, यह घटना भविष्य में समुद्री पर्यावरण में हो रहे बदलावों को समझने और बिजली संयंत्रों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत को भी सामने लाती है।

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लेखक परिचय
Shakshi Chauhan
Shakshi Chauhan is a college student. she writes with her mind completely involved in writing. Even though she is into commerce field, but she…और पढ़ें
Shakshi Chauhan is a college student. she writes with her mind completely involved in writing. Even though she is into commerce field, but she still has passion for writing. It was her hobby and now she wants to hone the same and work on it. She really enjoys articulating things in her own way