सऊदी-अमेरिका परमाणु समझौते पर सवाल, पाकिस्तान को लेकर क्यों बढ़ीं आशंकाएं?

अमेरिका और सऊदी अरब ने असैन्य परमाणु सहयोग के लिए ऐतिहासिक "एग्रीमेंट 123" पर हस्ताक्षर किए हैं। समझौते से ऊर्जा और आर्थिक सहयोग बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन मध्य पूर्व में परमाणु हथियारों की संभावित होड़ को लेकर चिंताएं भी तेज हो गई हैं।

Shakshi Chauhan

24 जुलाई 2026

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सऊदी-अमेरिका परमाणु समझौते पर सवाल, पाकिस्तान को लेकर क्यों बढ़ीं आशंकाएं?

संयुक्त राज्य अमेरिका और सऊदी अरब के बीच एक ऐतिहासिक परमाणु समझौता हुआ जिसे दोनों देशों के रिश्ते में एक बड़ा रणनीतिक और आर्थिक कदम माना जा रहा है। इस समझौते के तहत अमेरिका सऊदी अरब को उसे सिविल परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के विकास में तकनीकी और वैज्ञानिक सहयोग देगा। हालांकि इस समझौते ने मध्य पूर्व में परमाणु हथियारों की संभावित होड़ को लेकर नई चिंताओं को भी जन्म दे दिया है।

अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट और सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुल्ला अजीज बिन सलमान ने एग्रीमेंट 123 पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता अमेरिका के परमाणु ऊर्जा अधिनियम के तहत किया गया है और किसी भी देश के साथ शांतिपूर्ण परमाणु सहयोग के लिए आवश्यक कानूनी ढांचा प्रदान करता है इसके साथ ही दोनों देशों ने परमाणु सुरक्षा और निगरानी से जुड़े एक अलग द्विपक्षीय समझाने पर भी हस्ताक्षर किए।

व्हाइट हाउस के अनुसार यह दोनों समझौते आने वाले कई दशकों तक अमेरिका और सऊदी अरब के बीच अरब डॉलर के निवेश और सहयोग का आधार बनेंगे। प्रशासन का कहना है कि इससे स्वच्छ ऊर्जा आधुनिक तकनीक रोजगार और दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी।
सऊदी अरब लंबे समय से अपनी अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से बाहर निकालने की दिशा में काम कर रहा है विजन 2030 के तहत देश ऊर्जा के नए सूत्रों को विकसित करना चाहता है इसी योजना के अंतर्गत परमाणु ऊर्जा को भविष्य की बिजली जरूरत और औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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अमेरिकी सहयोग मिलने से सऊदी अरब को आधुनिक परमाणु तकनीक विशेषज्ञ और सुरक्षा मानकों तक पहुंच प्राप्त होगी।
अमेरिका की ऊर्जा मंत्री कि राइट ने कहा कि यह समझौता परमाणु सुरक्षा और अप्रसार के सर्वोच्च अंतरराष्ट्रीय मानने को का पालन करता है उन्होंने विश्वास दिलाया कि इसे इस्तेमाल होने वाली तकनीक पूरी तरह सुरक्षित होगी और इसे केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जाएगा उनका कहना है कि अमेरिका दुनिया की सबसे उन्नत परमाणु तकनीक और वैज्ञानिक विशेषज्ञ के आधार पर यह सहयोग प्रदान करेगा।

हालांकि इस समझौते को लेकर कहीं विशेषज्ञों ने चिंता भी व्यक्त की है उनका मानना है कि मध्य पूर्व पहले से ही राजनीतिक और सैन्य तनाव वाले क्षेत्र है ऐसे में यदि सऊदी अरब परमाणु तकनीक विकसित करता है तो क्षेत्र के अन्य देश भी इसी दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं इससे भविष्य में परमाणु हथियारों की होड़ तेज होने की आकांक्षा जताई जा रही है भले ही वर्तमान समझौता केवल असैन्य उपयोग तक सीमित हो।

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विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि किसी भी परमाणु कार्यक्रम में यूरेनियम संवर्धन जैसी तकनीक भविष्य में संवेदनशील मुद्दा बन सकती है इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस समझाने के क्रिया नवीन और निगरानी पर विशेष नजर रखेगा अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि सभी गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा नियमों और निगरानी व्यवस्था के तहत संचालित होगी।

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लेखक परिचय
Shakshi Chauhan
Shakshi Chauhan is a college student. she writes with her mind completely involved in writing. Even though she is into commerce field, but she…और पढ़ें
Shakshi Chauhan is a college student. she writes with her mind completely involved in writing. Even though she is into commerce field, but she still has passion for writing. It was her hobby and now she wants to hone the same and work on it. She really enjoys articulating things in her own way