सऊदी अरब में एयरपोर्ट और तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं ने सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। यमन के हूती विद्रोही समूह ने हाल के दिनों में सऊदी अरब के अहम ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया है। इन घटनाओं में रियाद का किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको से जुड़ी सुविधाएं शामिल हैं।
लगातार हमलों के कारण एयरपोर्ट संचालन, यात्रियों की सुरक्षा और ऊर्जा प्रतिष्ठानों की हिफाजत पर दबाव बढ़ा है। हालांकि, हर घटना में हमले के लिए जिम्मेदारी और नुकसान से जुड़ी जानकारी अलग-अलग है। इसलिए एयरपोर्ट पर हुए हमलों और तेल क्षेत्र में हालिया घटना के आंकड़ों को एक ही घटना से जोड़कर देखना सही नहीं होगा।
रियाद एयरपोर्ट पर हमले में एक भारतीय की मौत
रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर अक्टूबर में हुए हमलों में कई लोगों की जान गई और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। 10 अक्टूबर को हुए एक बड़े हमले के बाद सऊदी अधिकारियों ने कम से कम 12 लोगों की मौत और 300 से ज्यादा लोगों के घायल होने की जानकारी दी थी। बाद में सामने आई जानकारी के मुताबिक, मृतकों की संख्या 13 तक पहुंच गई थी। इस हमले की जिम्मेदारी हूती विद्रोहियों ने ली थी।
भारत के विदेश मंत्रालय और रियाद स्थित भारतीय दूतावास से मिली जानकारी के अनुसार, इस हमले में घायल हुए एक भारतीय नागरिक की बाद में मौत हो गई थी। इसके अलावा 10 अन्य भारतीयों के घायल होने की खबर सामने आई थी। भारतीय दूतावास ने स्थानीय अधिकारियों और अस्पतालों के संपर्क में रहते हुए प्रभावित नागरिकों की स्थिति के बारे में जानकारी जुटाई थी। भारतीय अधिकारियों ने मृतक के परिवार के प्रति संवेदना जताई और जरूरी सहायता उपलब्ध कराने की बात कही थी।
इसके बाद 11 अक्टूबर को भी रियाद एयरपोर्ट पर एक और घटना हुई। सऊदी अधिकारियों के अनुसार, एयरपोर्ट के टर्मिनल-4 के पास एक अज्ञात प्रक्षेप्य गिरने से आग लग गई थी। इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हुई और 11 लोग घायल हुए। अधिकारियों ने नुकसान का आकलन करने और सुरक्षा जांच करने की बात कही थी। लगातार हुई घटनाओं के चलते एयरपोर्ट पर परिचालन प्रभावित हुआ और उड़ानों को लेकर भी अनिश्चितता बनी रही।
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शायबा तेल क्षेत्र के पास ड्रोन घटना में दो लोगों की मौत
सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों के आसपास भी सुरक्षा खतरा बना हुआ है। 21 अक्टूबर को सऊदी अरामको के संचालन वाले शायबा तेल क्षेत्र को निशाना बनाकर ड्रोन हमला किए जाने की खबर सामने आई। सऊदी अरब की वायु रक्षा प्रणाली ने ड्रोन को रोकने की कोशिश की, लेकिन इस दौरान गिरे मलबे से दो लोगों की मौत हो गई और एक भारतीय नागरिक सहित अन्य लोग घायल हुए। घटना के बाद भारतीय दूतावास ने स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में रहने और घायल भारतीय को आवश्यक सहायता देने की बात कही।
यह घटना रियाद एयरपोर्ट पर पहले हुए हमलों से अलग है। रियाद एयरपोर्ट मामले में एक भारतीय नागरिक की मौत और 10 भारतीयों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी, जबकि शायबा तेल क्षेत्र से जुड़ी घटना में भारतीय नागरिक के घायल होने की खबर दी गई। दोनों घटनाओं के आंकड़ों को मिलाकर यह नहीं कहा जाना चाहिए कि हालिया तेल क्षेत्र वाले हमले में एक भारतीय की मौत हुई।
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अरामको के ठिकानों को निशाना बनाने की धमकी
हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के एयरपोर्ट और तेल प्रतिष्ठानों पर आगे भी हमले करने की धमकी दी है। 14 अक्टूबर को समूह ने सऊदी अरामको के मुख्यालय और अन्य ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाने का दावा किया था। यह परिसर पूर्वी शहर धहरान में स्थित है और सऊदी अरब के तेल तथा ऊर्जा संचालन से जुड़े अहम कामकाज का केंद्र है।
सऊदी ऊर्जा मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, अरामको के मुख्यालय परिसर पर हुए हमले के कारण सीमित आग लगी थी। उस घटना में किसी के मारे जाने या घायल होने की जानकारी नहीं दी गई थी। हालांकि, एक कंपनी सूत्र के हवाले से आई रिपोर्ट में परिसर की एक इमारत को नुकसान पहुंचने की बात कही गई थी। इससे स्पष्ट है कि अलग-अलग घटनाओं में नुकसान की स्थिति एक जैसी नहीं रही है।
अक्टूबर के पहले तीन सप्ताह में सऊदी अरब के एयरपोर्ट और ऊर्जा प्रतिष्ठानों से जुड़ी कई घटनाएं सामने आई हैं। रियाद एयरपोर्ट पर बार-बार हुए हमलों के कारण उड़ानों के संचालन और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर कदम उठाने पड़े। कुछ समय के लिए एयरपोर्ट बंद रखने और उड़ानों में बदलाव की खबरें भी सामने आई थीं। इसके अलावा धहरान में अरामको परिसर और शायबा तेल क्षेत्र से जुड़ी घटनाओं ने सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बढ़ा दी हैं।
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इन घटनाओं को लेकर एक महत्वपूर्ण बात यह है कि सभी हमलों की जिम्मेदारी हूती विद्रोहियों ने सीधे तौर पर स्वीकार नहीं की है। कुछ मामलों में समूह ने हमले करने का दावा किया, जबकि अन्य घटनाओं में अधिकारियों ने हमलावर की पहचान की पुष्टि नहीं की। इसलिए किसी भी घटना को हूती विद्रोहियों से जोड़ते समय संबंधित अधिकारियों के बयान और उपलब्ध पुष्ट जानकारी को ध्यान में रखना जरूरी है।
क्षेत्र में जारी संघर्ष का असर समुद्री परिवहन और महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। सऊदी अरब और यमन के बीच बढ़ते तनाव के कारण अन्य देशों की सरकारें भी स्थिति पर नजर रख रही हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या हमलों की संख्या घटती है या एयरपोर्ट और ऊर्जा सुविधाओं पर खतरा बना रहता है।





