राहुल गांधी ने बुधवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन छात्र-छात्राओं को सामने बुलाया, जिन्होंने प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई में घायल होने का दावा किया है। इनमें दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा अथिरा भी शामिल थी। अथिरा के मुताबिक, मंगलवार को प्रदर्शन के दौरान उसे हिरासत में लिया गया और पुलिस बस में बैठाया गया। उसने आरोप लगाया कि बस में कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी। इस पर उसने महिला पुलिसकर्मी की मौजूदगी को लेकर सवाल किया, जिसके बाद कथित तौर पर उसके साथ मारपीट की गई।
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छात्रा ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
अथिरा ने दावा किया कि पुलिसकर्मियों ने उसके चेहरे पर कई बार मारा, जिससे आंख और कान के आसपास चोट आई। उसका कहना है कि अब उसे एक कान से सुनने में परेशानी हो रही है। राहुल गांधी ने इस मामले का जिक्र करते हुए कहा कि इससे पहले भी एक प्रदर्शनकारी के आंख की रोशनी प्रभावित होने का मामला सामने आया था और अब एक छात्रा ने सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचने की बात कही है। ये आरोप छात्रा और राहुल गांधी की ओर से लगाए गए हैं; चोटों की स्थिति और उनके कारणों की स्वतंत्र चिकित्सकीय पुष्टि को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने आना बाकी है।
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एक अन्य प्रदर्शनकारी छात्रा ने भी पुलिस पर मारपीट का आरोप लगाया है। छात्रा के मुताबिक, एनएसयूआई के कार्यकर्ता शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे, तभी उन्हें तीन बसों में बैठाकर हिरासत में ले लिया गया। हर बस में करीब 30 से 40 लोग मौजूद थे। छात्रा ने बताया कि उनकी बस में दो लड़कियों के साथ कई अन्य कार्यकर्ता भी थे।
छात्रा का आरोप है कि बस में चंचल यादव नाम की एक महिला पुलिस कॉन्स्टेबल मौजूद थीं। हिरासत के दौरान जब प्रदर्शनकारियों ने बस से उतरकर अपना विरोध जारी रखने की कोशिश की और बस के नीचे बैठ गए, तो कॉन्स्टेबल ने उसकी गर्दन पकड़कर धक्का दिया।
इससे वह पीछे की ओर सीट पर गिर गई। छात्रा के मुताबिक, इसके बाद महिला पुलिसकर्मी ने अपने नाखूनों से उसके चेहरे पर खरोंच मारी, जिससे चेहरे और कान के पास निशान पड़ गए। छात्रा ने यह भी आरोप लगाया कि विरोध करने पर पुलिसकर्मी ने उसे जोरदार थप्पड़ मारा और तंज कसते हुए एक और थप्पड़ मारने की बात कही।
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राहुल गांधी ने छात्रों से क्या कहा?
राहुल गांधी ने छात्रों की बात सुनने के बाद उन्हें घटनाओं से जुड़े वीडियो, तस्वीरें और अन्य सबूत सुरक्षित रखने की सलाह दी। उनका कहना था कि इन सबूतों के जरिए मामले को आगे उठाया जा सकता है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा सकती है।
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हालांकि, इस मामले में अभी छात्रों के आरोपों, चोटों और कथित सुनने की क्षमता प्रभावित होने के दावे की स्वतंत्र जांच जरूरी है। पुलिस की ओर से घटना के हर पहलू पर विस्तृत जवाब सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हिरासत के दौरान क्या हुआ और आरोपों की पुष्टि किस हद तक होती है।





