कभी-कभी हमारे इमोशंस हमारे कंट्रोल में नहीं रहते हैं। कभी बहुत ज्यादा गुस्सा आ जाता है जिसके कारण हम बाद में अफसोस करते हैं तो कभी ऐसा लगता है कि सब कुछ छोड़कर चले जाए। कुछ लोग कोई ऐसी चिंता को अपने ऊपर बुरी तरह से हावी कर लेते है की उनका दिमागी संतुलन बिगड़ जाता है जिसकी वजह से वह गुस्सैल और चिड़चिड़े बन जाते है। गुस्सा अपने आप में कोई मानसिक बीमारी नहीं है। देखने में यह एक सामान्य भावना होती है लेकिन अगर सिर पर चढ़ जाती है तो अपने भी दूर होने लग जाते है।
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अब आप सभी के दिमाग में यह सवाल ज़रूर चल रहा होगा की गुस्से की यह समस्या की शुरुआत कहाँ से होती है ? बता दें कि गुस्से के पीछे कई शारीरिक और मानसिक कारण हो सकते हैं। जैसे कि स्वास्थ्य से लेकर जीवन की स्थितियों में कोई बड़ा बदलाव हो सकता है। इसलिए यहां समस्या के मूल कारण को समझने और उसे ठीक करने की जरूरत है। यह समस्या तब बनती है, जब गुस्सा बार-बार आए, बहुत तेज हो, उस पर नियंत्रण न रहे या उसका असर काम और रिश्तों पर पड़ने लगे।

क्या है गुस्से की वजह ?
गुस्सा आने की एक ही वजह नहीं होती। कई बार इसके पीछे लगातार बना हुआ तनाव, काम का दबाव, परिवार में विवाद, आर्थिक परेशानी, नींद पूरी न होना या ज्यादा थकान हो सकती है। जब इंसान लंबे समय तक परेशान या तनाव में रहता है तो उसका धैर्य कम होने लगता है और छोटी-सी बात भी उसे बड़ी लग सकती है।
कई बार अपनी बात न कह पाना, बार-बार अपमानित या नजरअंदाज महसूस करना और पुरानी नाराजगी भी गुस्से को बढ़ा सकती है। इसके अलावा भूख, शराब या कुछ नशीले पदार्थों का सेवन और कुछ मानसिक या शारीरिक समस्याएं भी चिड़चिड़ापन बढ़ा सकती हैं।
इसलिए अगर किसी व्यक्ति को बार-बार छोटी बातों पर तेज गुस्सा आता है, तो केवल गुस्से को दोष देने के बजाय यह समझना जरूरी है कि उसके पीछे असली वजह क्या है।
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गुस्से को किस प्रकार करें नियंत्रित ?
| गुस्सा आने पर क्या करें | कैसे करें | इससे क्या फायदा होगा |
|---|---|---|
| थोड़ी देर चुप हो जाएं | तुरंत बहस करने के बजाय कुछ मिनट के लिए शांत जगह पर चले जाएं | गुस्से में गलत प्रतिक्रिया देने से बचेंगे |
| गहरी सांस लें | धीरे-धीरे सांस अंदर लें और फिर आराम से बाहर छोड़ें | शरीर का तनाव और बेचैनी कम करने में मदद मिलेगी |
| पानी पिएं | धीरे-धीरे एक गिलास पानी पिएं | ध्यान थोड़ी देर के लिए गुस्से वाली स्थिति से हटेगा |
| 10 तक गिनें | जवाब देने से पहले धीरे-धीरे 1 से 10 तक गिनें | तुरंत प्रतिक्रिया देने की आदत कम होगी |
| टहलने निकलें | 10-15 मिनट पैदल चलें | तनाव कम करने और मन शांत करने में मदद मिल सकती है |
| अपनी बात बाद में रखें | गुस्सा शांत होने के बाद परिवार से बात करें | बातचीत झगड़े में बदलने की संभावना कम होगी |
| गुस्से का कारण लिखें | नोट करें कि किस बात से गुस्सा आया और आपने कैसी प्रतिक्रिया दी | अपने ट्रिगर पहचानने में मदद मिलेगी |
| नियमित एक्सरसाइज करें | रोज पैदल चलना, योग या कोई पसंदीदा व्यायाम करें | तनाव और चिड़चिड़ापन संभालने में मदद मिल सकती है |
| परिवार से माफी मांगें | अगर गुस्से में किसी को डराया या चोट पहुंचाई है तो जिम्मेदारी लें | रिश्तों में भरोसा दोबारा बनाने की शुरुआत होगी |
| जरूरत पड़े तो विशेषज्ञ से मिलें | गुस्सा बार-बार बेकाबू हो रहा हो तो मनोवैज्ञानिक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें | गुस्से के कारणों को समझने और व्यवहार बदलने में मदद मिल सकती है |
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गुस्सा और तनाव को संभालने में नियमित शारीरिक गतिविधि मददगार हो सकती है। खासकर ऐसी एक्सरसाइज जिनसे शरीर की अतिरिक्त ऊर्जा निकलती है और मन को शांत करने का मौका मिलता है। ध्यान रखें, बहुत तेज गुस्से के समय तुरंत भारी या बहुत जोरदार एक्सरसाइज करने के बजाय पहले सुरक्षित जगह पर जाकर धीरे-धीरे सांस लेना और खुद को शांत करना बेहतर है।
- तेज चाल से चलना: 20–30 मिनट की वॉक तनाव और चिड़चिड़ापन कम करने में मदद कर सकती है।
- हल्की दौड़: जॉगिंग जैसी कार्डियो एक्सरसाइज मूड बेहतर करने और तनाव कम करने में मदद कर सकती है।
- योग: रोज योग करने से शरीर को रिलैक्स करने और तनाव संभालने में मदद मिल सकती है।
- प्राणायाम: धीमी और नियंत्रित सांस लेने वाली एक्सरसाइज गुस्से के समय शरीर को शांत करने में मदद कर सकती है।
- स्ट्रेचिंग: गर्दन, कंधे, हाथ-पैर की हल्की स्ट्रेचिंग शरीर में जमा तनाव कम करने में मदद कर सकती है।
- साइकिलिंग: 20–30 मिनट साइकिल चलाना भी तनाव कम करने का अच्छा तरीका हो सकता है।
- तैराकी: अगर सुविधा हो तो तैराकी एक अच्छी पूरी शरीर की एक्सरसाइज है और तनाव कम करने में मदद कर सकती है।

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अगर बार-बार कोशिश करने के बाद भी गुस्सा काबू में नहीं आ रहा है, गुस्से में चीजें टूट जाती हैं, किसी को मारने या नुकसान पहुंचाने का डर रहता है या इसका असर परिवार और काम पर पड़ने लगा है, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। ऐसी स्थिति में किसी प्रशिक्षित मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना मददगार हो सकता है।
काउंसलिंग और कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (सीबीटी) जैसी तकनीकों के जरिए गुस्से के पीछे की वजह समझने, उन बातों को पहचानने जिनसे गुस्सा बढ़ता है और उस समय अपनी प्रतिक्रिया को बेहतर तरीके से संभालने पर काम किया जाता है।
गुस्सा आना अपने आप में गलत नहीं है, क्योंकि यह एक सामान्य भावना है। परेशानी तब होती है जब गुस्सा इतना बढ़ जाए कि इंसान खुद पर काबू खो दे या उसके व्यवहार से किसी दूसरे को डर या नुकसान पहुंचे। इसलिए गुस्सा पूरी तरह खत्म करना नहीं, बल्कि उसे सही तरीके से संभालना सीखना जरूरी है।
अगर कभी लगे कि गुस्से में आप खुद को या किसी दूसरे व्यक्ति को चोट पहुंचा सकते हैं, तो उस समय बहस जारी रखने के बजाय वहां से थोड़ी देर के लिए हट जाएं, खुद को शांत करें और जरूरत पड़ने पर तुरंत किसी भरोसेमंद व्यक्ति या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लें।





