केरल हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़की के अपहरण और करीब 45 दिनों तक उसके साथ दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी है। अदालत ने आरोपी की अपील खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले में किसी तरह के हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। यह मामला उस समय का है, जब पीड़िता की उम्र करीब साढ़े 14 वर्ष थी और आरोपी की उम्र लगभग 36 वर्ष थी।
क्या है पूरा मामला ?
मामला साल 2009 का है, जब केरल में 10वीं कक्षा में पढ़ने वाली 14 साल 6 महीने की एक नाबालिग छात्रा अपने माता-पिता के साथ रहती थी। अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक, छात्रा की आरोपी से एक शादी समारोह में पहचान हुई थी। उस समय आरोपी की उम्र 36 साल थी और वह सिंचाई विभाग में कर्मचारी था।
28 अगस्त 2009 की सुबह आरोपी छात्रा को उसके माता-पिता की हिरासत से अपने साथ ले गया। उसने छात्रा को बताया कि वह उसे केरल के कट्टप्पना स्थित एक चर्च में प्रार्थना कराने ले जा रहा है और वहां प्रार्थना करने से उसे भगवान का आशीर्वाद मिलेगा, जिससे 10वीं की परीक्षा में उसके अच्छे नंबर आएंगे। छात्रा उसके झांसे में आ गई और आरोपी के साथ चली गई। इसके बाद आरोपी उसे केरल और तमिलनाडु की अलग-अलग जगहों पर ले गया।
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हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार, करीब 45 दिनों तक आरोपी ने छात्रा के साथ उसकी इच्छा के खिलाफ दुष्कर्म किया और उसे डराया-धमकाया। छात्रा ने अदालत को बताया कि जब वह आरोपी की यौन मांगों का विरोध करती थी तो वह उसके साथ मारपीट करता था और उसे डर था कि भागने की कोशिश करने पर आरोपी उसे पकड़ लेगा।
बाद में छात्रा को अदालत के सामने पेश किया गया और मामले की जांच के बाद आरोपी के खिलाफ अपहरण और दुष्कर्म की धाराओं में मुकदमा चला। 7 दिसंबर 2019 को थोडुपुझा के अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद और दो लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई, जबकि अपहरण के मामले में पांच साल की कठोर कैद और 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
इसके बाद आरोपी ने अपनी सजा के खिलाफ केरल हाईकोर्ट में अपील की। आरोपी की ओर से दावा किया गया कि उसे झूठे मामले में फंसाया गया है और छात्रा अपनी मर्जी से उसके साथ गई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
मामले में मुख्य आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 363 और 376 के तहत मुकदमा चलाया गया था। वहीं, अन्य आरोपियों पर घटना की जानकारी होने के बावजूद संबंधित अधिकारियों को सूचना नहीं देने के आरोप लगाए गए थे।
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निचली अदालत ने सुनाई थी उम्रकैद
इस मामले में थोडुपुझा की अतिरिक्त सत्र अदालत ने 7 दिसंबर 2019 को मुख्य आरोपी को दोषी करार दिया था। अदालत ने उसे दुष्कर्म के अपराध में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके अलावा उस पर दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।
फैसले के खिलाफ दोषी ने केरल हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। अपील में निचली अदालत के फैसले और सजा को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड और अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों की समीक्षा की।
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हाईकोर्ट ने सजा में दखल देने से किया इनकार
केरल हाईकोर्ट की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि निचली अदालत के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है। अदालत ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों और मामले की परिस्थितियों पर विचार करने के बाद दोषसिद्धि को सही माना।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अपराध की गंभीरता और जिस परिस्थिति में नाबालिग को ले जाकर उसके साथ अपराध किया गया, उसे देखते हुए उम्रकैद की सजा में कमी करने का कोई कारण नहीं बनता। इसके साथ ही अदालत ने दोषी की अपील खारिज कर दी और निचली अदालत की सजा को बरकरार रखा।
अन्य आरोपियों के खिलाफ भी हुई थी कार्रवाई
इस मामले में मुख्य आरोपी के अलावा चार अन्य लोगों पर भी भारतीय दंड संहिता की धारा 118 के तहत आरोप लगाए गए थे। यह धारा ऐसे मामलों से जुड़ी है, जिनमें किसी गंभीर अपराध की जानकारी होने के बावजूद संबंधित अधिकारियों को सूचना नहीं दी जाती।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद मुख्य आरोपी की उम्रकैद की सजा कायम है। अदालत ने अपने आदेश की प्रति संबंधित विशेष अदालत को भेजने का निर्देश भी दिया है, ताकि आगे की आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा सके।





