प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर को अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस मौके पर उनकी घरेलू राजनीति के साथ-साथ विदेश नीति और वैश्विक नेताओं के साथ उनके संबंधों की भी चर्चा हो रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले वर्षों में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ लगातार संवाद बनाए रखा है। हालांकि, इन तीनों देशों के साथ भारत के रिश्तों की प्रकृति अलग-अलग रही है। कहीं रणनीतिक साझेदारी दिखाई देती है, तो कहीं प्रतिस्पर्धा और मतभेदों के बीच बातचीत का रास्ता कायम रखने की कोशिश होती है।
पुतिन के साथ भारत की पुरानी रणनीतिक साझेदारी
भारत और रूस के संबंध कई दशकों पुराने हैं। रक्षा, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, ऊर्जा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग रहा है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच व्यक्तिगत संवाद और नियमित मुलाकातें भी इस रिश्ते का अहम हिस्सा रही हैं।
जुलाई 2024 में प्रधानमंत्री मोदी ने मॉस्को का दौरा किया था। इस दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग के कई क्षेत्रों पर चर्चा की। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत पर पश्चिमी देशों की ओर से रूस से कच्चे तेल की खरीद कम करने का दबाव रहा, लेकिन भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय हितों के आधार पर रूस से व्यापार जारी रखा।
दूसरी ओर, प्रधानमंत्री मोदी ने रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान की जरूरत पर भी जोर दिया। सितंबर 2026 में ब्रिक्स सम्मेलन से पहले दोनों नेताओं ने रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और व्यापार समेत कई मुद्दों पर चर्चा की। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर भी बात की।
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ट्रंप के साथ दोस्ती और मतभेद दोनों
भारत और अमेरिका के संबंधों में रणनीतिक, रक्षा, व्यापार और तकनीकी सहयोग महत्वपूर्ण मुद्दे रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच व्यक्तिगत संपर्क की चर्चा उनके पहले कार्यकाल से ही होती रही है। ‘हाउडी मोदी’ और ‘नमस्ते ट्रंप’ जैसे कार्यक्रमों ने दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक जुड़ाव को मजबूत किया था।
हालांकि, ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में दोनों देशों के बीच व्यापार, रूस से तेल खरीद और भारत-पाकिस्तान तनाव जैसे मुद्दों पर मतभेद भी सामने आए। अमेरिका ने भारत पर टैरिफ लगाए और रूस से ऊर्जा खरीद को लेकर दबाव बनाया। वहीं, भारत ने कश्मीर या भारत-पाकिस्तान विवाद में तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के दावों को स्वीकार नहीं किया।
इसके बावजूद दोनों देशों के बीच संवाद जारी रहा। जून 2026 में प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप की मुलाकात के दौरान व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और तकनीक से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
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जिनपिंग के साथ रिश्तों में प्रतिस्पर्धा और संवाद
भारत और चीन के संबंधों में सीमा विवाद सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। वर्ष 2020 के गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ा। इसके बावजूद भारत और चीन ने सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी रखी, ताकि सीमा पर तनाव कम किया जा सके।
प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के दौरान कई मुलाकातें हुई हैं। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध भी महत्वपूर्ण हैं, हालांकि व्यापार असंतुलन, सीमा विवाद और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा को लेकर मतभेद बने हुए हैं।
सितंबर 2026 में दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान मोदी और जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक हुई। इस दौरान दोनों नेताओं ने आपसी सम्मान, संवेदनशीलता और हितों के आधार पर संबंधों को आगे बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।
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भारत की विदेश नीति में संतुलन पर जोर
अमेरिका, रूस और चीन के साथ भारत के रिश्ते अलग-अलग परिस्थितियों से प्रभावित होते हैं। रूस के साथ रक्षा और ऊर्जा सहयोग, अमेरिका के साथ रणनीतिक और तकनीकी साझेदारी तथा चीन के साथ सीमा और व्यापार से जुड़े मुद्दे भारत की विदेश नीति के प्रमुख हिस्से हैं।
इन संबंधों के बीच भारत लगातार अलग-अलग देशों के साथ संवाद और सहयोग बनाए रखने की कोशिश करता रहा है। इसे भारत की बहु-संरेखण या रणनीतिक स्वायत्तता की नीति के संदर्भ में देखा जाता है। हालांकि, इन रिश्तों में मौजूद मतभेद और चुनौतियाँ भी विदेश नीति के स्तर पर महत्वपूर्ण बनी हुई हैं।





