हर माता पिता का सपना होता है कि वह अपने बच्चे को सबसे अच्छी परवरिश दे और वह बड़ा होकर गुणवान और समझदार बने ताकि लोग अपने बच्चों को उसके जैसा बनने की नसीहत दे। एक्सपर्ट्स कहते है कि बच्चे हमेशा अपने माता-पिता की परछाई होते है चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट श्वेता गांधी ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर शेयर किए गए एक वीडियो में बच्चों को सुलाने से पहले तीन आसान काम करने की सलाह दी है।
इसके अलावा बताया जाता है कि बच्चों की नींद सिर्फ उनकी पूरे दिन की थकान या आराम के लिए नहीं है बल्कि इसका असर उनके व्यवहार, ध्यान, सीखने और भावनाओं को संभालने की क्षमता पर भी पड़ता है। इसी कारण माता-पिता के लिए बच्चे की रात की दिनचर्या पर ध्यान देना काफी जरूरी है।
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अगर माता पिता अपने बच्चों के साथ सोने से पहले यह काम जरूर करें। इससे बच्चा कई चीजें सीख सकता है, साथ ही बच्चे पर अच्छा असर पड़ सकता है। अगर आप भी चाहते हैं कि आपका बच्चा आपके नक्शेकदम पर चले तो सोने से पहले यह 3 काम करना न भूलें।
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1. बच्चों को प्रयाप्त नींद दे
बच्चों के लिए पर्याप्त नींद उनकी सेहत और रोजमर्रा के व्यवहार के लिए बेहद जरूरी है। नींद पूरी होने पर बच्चा सुबह ज्यादा तरोताजा महसूस करता है और दिनभर पढ़ाई, खेल और दूसरी गतिविधियों पर बेहतर ध्यान लगा पाता है। अच्छी नींद का असर उसकी याददाश्त, सीखने की क्षमता और मूड पर भी पड़ता है। वहीं, अगर बच्चा लगातार कम सोता है तो वह दिन में चिड़चिड़ा, थका हुआ या छोटी-छोटी बातों पर परेशान हो सकता है।
कुछ बच्चों में नींद की कमी के कारण ध्यान लगाने में परेशानी और व्यवहार में बदलाव भी देखने को मिल सकता है। इसलिए माता-पिता को बच्चे की उम्र के हिसाब से उसके सोने का समय तय करना चाहिए और कोशिश करनी चाहिए कि वह रोज लगभग एक ही समय पर सोए और उठे।
सोने से पहले मोबाइल, टीवी और टैबलेट से दूरी बनाना, कमरे का माहौल शांत रखना और रोज एक जैसी रात की दिनचर्या अपनाना भी मददगार हो सकता है। खासतौर पर छोटे बच्चों के लिए कहानी सुनाना, किताब पढ़ना या कुछ मिनट प्यार से बात करना उन्हें शांत करने और सोने के लिए तैयार करने का अच्छा तरीका है।
माता-पिता को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि छुट्टी वाले दिन बच्चे की नींद का समय बहुत ज्यादा न बदले। अगर बच्चा नियमित रूप से पर्याप्त नींद लेता है, तो इससे उसके शारीरिक विकास के साथ-साथ भावनात्मक और मानसिक विकास को भी बेहतर सहारा मिलता है।

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बच्चों की उम्र के हिसाब से नींद वाली टेबल
| बच्चे की उम्र | 24 घंटे में जरूरी नींद |
|---|---|
| 4 से 12 महीने | 12 से 16 घंटे |
| 1 से 2 साल | 11 से 14 घंटे |
| 3 से 5 साल | 10 से 13 घंटे |
| 6 से 12 साल | 9 से 12 घंटे |
| 13 से 18 साल | 8 से 10 घंटे |
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2. बच्चे के साथ प्रार्थना करें
रात को सोने से पहले बच्चे के साथ कुछ मिनट प्रार्थना करने की आदत डाल सकते हैं। दिनभर की भागदौड़ के बाद यह समय बच्चे के साथ शांति से बैठने और उससे बात करने का अच्छा मौका होता है। आप बच्चे के साथ परिवार की सलामती के लिए प्रार्थना कर सकते हैं या उससे पूछ सकते हैं कि वह आज किस चीज के लिए शुक्रिया कहना चाहता है। इससे बच्चे को अपने मन की बातें बताने का मौका मिलता है और वह माता-पिता के करीब महसूस करता है।
इस दौरान उसे किसी बात के लिए डांटने या उपदेश देने के बजाय माहौल को हल्का और प्यार भरा रखें। धीरे-धीरे यह छोटी सी आदत बच्चे की रात की दिनचर्या का हिस्सा बन सकती है और उसे सोने से पहले मन शांत करने में मदद मिल सकती है।

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3. दिन की अच्छी बात के लिए बच्चे की तारीफ करें
बच्चे को सोने से पहले उसकी किसी अच्छी कोशिश के लिए शाबाशी देना भी एक छोटी लेकिन अच्छी आदत बन सकती है। जरूरी नहीं कि उसने कोई बहुत बड़ा काम किया हो। अगर उसने आज अपना खिलौना खुद समेटा, भाई-बहन की मदद की, होमवर्क समय पर किया, किसी से अच्छे से बात की या गुस्सा आने के बावजूद खुद को संभाला, तो उसकी तारीफ करें।

माता-पिता जब बच्चे की अच्छी कोशिशों पर ध्यान देते हैं तो बच्चे को यह महसूस होता है कि घर में उसकी मेहनत और व्यवहार दोनों देखे जाते हैं। रात का समय डांटने या सजा देने के बजाय शांत तरीके से दिन खत्म करने का होना चाहिए। अगर कोई जरूरी बात समझानी है तो उसे भी प्यार और धैर्य के साथ समझाएं।





