FIR में फंसे प्रदर्शनकारी छात्रों को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया रास्ता; गंभीर अपराध वालों को नहीं मिलेगा लाभ

परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ हुए छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में प्रदर्शनकारी छात्रों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए दिल्ली पुलिस की ओर से दर्ज 13 एफआईआर रद्द करने की मांग की है।

Palak Gupta

1 सितम्बर 2026

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FIR में फंसे प्रदर्शनकारी छात्रों को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया रास्ता; गंभीर अपराध वालों को नहीं मिलेगा लाभ

जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आज यानी 1 सितंबर को बड़ा फैसला लिया है। शीर्ष अदालत ने अनुच्छेद 142 की शक्तियों का इस्तेमाल करके प्रदर्शनकारी छात्रों के दर्ज FIR रद्द करने का आदेश दिया है। इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट में CJI की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनवाई की।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल और असम पर हुए छात्रों के खिलाफ FIR को पूर्ण रूप से रद्द करने का आदेश दे दिया है। जंतर-मंतर प्रदर्शन में दिल्ली पुलिस ने करीब 2873 छात्रों के खिलाफ कंप्लेंट और FIR दर्ज की थी जो अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश से रद्द की गई है।

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इसके अलावा चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर किसी राज्य में कोई FIR है जिसकी जानकारी अभी हमें नहीं दी गई है तो उसे रद्द करने की मांग का राज्य विरोध नहीं करेंगे। अदालत ने कहा कि वह अनुच्छेद 142 के तहत इन आवेदनों को स्वीकार करते हुए दिल्ली पुलिस को यह आदेश देती है कि अगर किसी भी राज्य में इन्हीं मामलों को लेकर और FIR हैं, तो उन पर जांच बंद कर दी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पेपर लीक के खिलाफ धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ अब कोई नई FIR दर्ज नहीं होगी।

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सौरव दास ने हाथ जोड़ कर जजों को धन्यवाद कहा

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर काक्रोच जनता पार्टी के सदस्य सौरव दास ने कहा कि परीक्षाओं के चलते जान देने वाले छात्रों के परिवार के लिए मुआवजे को लेकर केंद्र राज्यों से बात कर नई नीति बनाए। इसके बाद सौरव दास ने हाथ जोड़ कर जजों को धन्यवाद कहा। इसके बाद चीफ जस्टिस ने उन्हें शुभकामनाएं दीं।

इसके अलावा CJI के मेंबर सूर्यकांत ने कहा कि जहां तक NEET परीक्षा, 2026 के चलते आत्महत्या करने वाले छात्रों के मुआवजे का सवाल है, हमें बताया गया है कि इसके बारे में नीति 3 महीने में बना ली जाएगी। इस नीति को 3 महीने में पूरा कर मुआवजा दिया जाए।

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सीजेपी ने वापस लिया आंदोलन

CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि हम इस आदरणीय कोर्ट और सभी वकीलों को धन्यवाद देते हैं। 5 सितंबर के मार्च का आह्वान वापस लिया जा रहा है। यह मामला पहली बार नहीं है जब सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारी छात्रों को लेकर राहत की बात कही है।

28 जुलाई 2026 को अदालत ने छात्रों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा था कि प्रदर्शन करना लोकतंत्र का हिस्सा है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR की जांच जारी रह सकती है, लेकिन पात्र छात्रों के खिलाफ कोई जबरदस्ती की कार्रवाई नहीं की जाए।

प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज 13 FIR को लेकर अब सरकार और पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। केंद्र चाहता है कि सामान्य प्रदर्शनकारियों से जुड़े मामले खत्म किए जाएं, जबकि गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2,873 लोगों के खिलाफ अलग जांच की जाए। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर है। अगर अदालत केंद्र की मांग मान लेती है, तो जुलाई के छात्र प्रदर्शन से जुड़े कई युवाओं को बड़ी कानूनी राहत मिल सकती है।

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Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate,…और पढ़ें
Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate, credible, and reader-centric reporting, driven by a commitment to ethical journalism and continuous professional growth.

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