तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार ने चेन्नई शहर में विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं की निगरानी को मजबूत करने के लिए नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (GCC) के सभी 15 जोन की जिम्मेदारी राज्य सरकार के मंत्रियों को सौंपी गई है। प्रत्येक मंत्री अपने निर्धारित जोन में चल रही विकास परियोजनाओं, नागरिक सुविधाओं और कल्याणकारी योजनाओं की प्रगति पर नजर रखेंगे।
सरकार के अनुसार, इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य प्रशासन को जोन स्तर तक अधिक प्रभावी बनाना, विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और नागरिकों से जुड़ी समस्याओं का तेजी से समाधान करना है। चेन्नई जिले के प्रभारी मंत्री आधव अर्जुन इन सभी मंत्रियों के बीच समन्वय की भूमिका निभाएंगे और नगर निगम की सीमा में सरकारी कार्यक्रमों के व्यापक क्रियान्वयन की निगरानी करेंगे।
किस मंत्री को कौन सा जोन मिला?
सरकार ने चेन्नई के 15 जोन को अलग-अलग मंत्रियों के बीच बांटा है। हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती मंत्री रमेश को तिरुवोट्टियूर और मनाली यानी जोन 1 और 2 की जिम्मेदारी दी गई है। सूचना प्रौद्योगिकी एवं डिजिटल सेवा मंत्री टी. लोकेश तमिलसेल्वन माधववरम और टोंडियारपेट यानी जोन 3 और 4 की निगरानी करेंगे।
स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. केजी अरुणराज को रोयापुरम और थिरु-वी-का नगर यानी जोन 5 और 6 सौंपे गए हैं। वहीं हथकरघा, कपड़ा एवं खादी मंत्री एम. विजय बालाजी को अंबाटूर, अन्ना नगर और तेयनमपेट यानी जोन 7, 8 और 9 की जिम्मेदारी मिली है।
पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. टीके बीजू कोडंबक्कम और वलसरवक्कम यानी जोन 10 और 11 की निगरानी करेंगे। परिवहन मंत्री विजय तमिलन पार्थिबन को अलंदूर और अड्यार यानी जोन 12 और 13 की जिम्मेदारी दी गई है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री के. विग्नेश पेरुंगुडी को पेरुंगुडी और शोलिंगनल्लूर यानी जोन 14 और 15 सौंपे गए हैं।
मंत्रियों की क्या होगी भूमिका?
नई व्यवस्था में मंत्रियों को केवल औपचारिक जिम्मेदारी नहीं दी गई है। उनसे अपने-अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों की नियमित समीक्षा करने की उम्मीद की गई है। किसी परियोजना में देरी होने पर उसके कारणों की पहचान करना और संबंधित विभागों के साथ मिलकर बाधाओं को दूर करना भी उनकी भूमिका का हिस्सा होगा।
इसके अलावा, मंत्री यह भी देखेंगे कि सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में पात्र लोगों तक पहुंच रहा है या नहीं। सड़क, जल निकासी, परिवहन, सार्वजनिक सेवाओं और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़ी स्थानीय समस्याओं की समीक्षा भी की जाएगी। इसके लिए मंत्रियों को GCC अधिकारियों और अन्य सरकारी विभागों के साथ समन्वय करना होगा।
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जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश
चेन्नई जैसे बड़े महानगर में अलग-अलग इलाकों की जरूरतें अलग होती हैं। ऐसे में पूरे शहर के लिए एक ही स्तर की निगरानी व्यवस्था कई बार स्थानीय समस्याओं के समाधान में देरी कर सकती है। सरकार की नई जोन-आधारित व्यवस्था का उद्देश्य इसी अंतर को कम करना है।
हर जोन को एक मंत्री की निगरानी मिलने से स्थानीय स्तर पर जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है। नियमित समीक्षा के जरिए विकास परियोजनाओं की प्रगति पर नजर रखी जा सकेगी और प्रशासनिक अड़चनों को जल्द दूर करने का प्रयास किया जाएगा।
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कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री विजय सरकार की यह पहल चेन्नई में प्रशासन और विकास कार्यों को अधिक विकेंद्रीकृत तरीके से संचालित करने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है। सरकार को उम्मीद है कि मंत्रियों की प्रत्यक्ष निगरानी से राज्य प्रशासन, नगर निगम और स्थानीय नागरिकों के बीच बेहतर तालमेल बनेगा तथा विकास परियोजनाओं और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।





