मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बाद अब रूस ने अपनी मजबूती कायम रखने का फैसला कर लिया है। बता दें कि हाल ही में द सन की रिपोर्ट के मुताबिक खबर आई है कि रूस अपनी एक खतरनाक मिसाइल का टेस्ट करने जा रहा है। आशंका है कि व्लादिमीर पुतिन न्यूक्लियर पावर से चलने वाले भयानक ‘फ्लाइंग चेरनोबिल’ का परीक्षण करने जा रहे हैं।
आर्कटिक सर्किल के इलाके में विमानों की गतिविधि ने सभी देशों में चिंता बढ़ा दी है जिससे विपक्षी देशों को यह अनुमान लग रहा है कि जल्द ही रूस क्रूज मिसाइल दाग सकते हैं, न्यूक्लियर रिएक्टर के ईंधन से चलता है। बता दें कि रूस लंबे समय से अजेय’ बुरेवेस्टनिक मिसाइल की गढ़ना और वाह-वाही करते नजर आया है। इस मिसाइल की प्रशंसा में कहा जाता है कि यह मिसाइल असीमित रेंज तक जा सकती है।
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कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर पुतिन कभी भी पश्चिम पर हमला करते हैं, तो यह मिसाइल UK को निशाना बना सकती है। पिछले कुछ हफ्तों की सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि मॉस्को के शक्तिशाली विमान आर्कटिक में नोवाया जेमल्या द्वीप समूह पर उतर रहे हैं।
बता दें कि रूस इससे पहले भी मिसाइल की टेस्टिंग कर चुका है और इसी के साथ एक बार रूस ने इन मिसाइलों का इस्तेमाल मुख्य परमाणु ठिकानों में से एक पर तैनाती भी की है। इसमें 1961 में अब तक के सबसे बड़े न्यूक्लियर हथियार, 50MT AN602 जार बॉम्बा हाइड्रोजन बम का परीक्षण शामिल था। खबरों के मुताबिक, इस हफ्ते मिसाइल के रास्ते पर नजर रखने और टेस्ट का डेटा इकट्ठा करने के लिए इस्तेमाल होने वाले दो खास Il-976 SKIP एयरक्राफ्ट रोगाचेवो एयरबेस पर पहुंचे।
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टेस्टिंग के लिए तैयार है बुरेवेस्टिनिक मिसाइल
रूस ने बुरेवेस्टनिक मिसाइल के नए परीक्षण को लेकर अभी कुछ साफ नहीं कहा है। लेकिन नॉर्वे के रक्षा विशेषज्ञ थोर्ड अरे इवरसेन का कहना है कि सैटेलाइट तस्वीरों में ऐसी हलचल दिख रही है, जो पहले हुए परीक्षणों जैसी ही है। उनके मुताबिक, रूस इस मिसाइल का उड़ान परीक्षण करने की तैयारी में हो सकता है। इस मिसाइल के अब तक करीब 14 परीक्षण होने की बात कही गई है, जिनमें सिर्फ दो को सफल बताया गया है।
रूस ने 2025 के एक परीक्षण को सफल बताते हुए दावा किया था कि मिसाइल ने करीब 15 घंटे में 14 हजार किलोमीटर की दूरी तय की। बुरेवेस्टनिक को लेकर सबसे ज्यादा चिंता इसकी परमाणु तकनीक को लेकर है। इसी वजह से इसे ‘फ्लाइंग चर्नोबिल’ और नाटो की ओर से ‘स्काईफॉल’ कहा जाता है। जानकारों को डर है कि अगर परीक्षण के दौरान कोई गड़बड़ी हुई तो रेडियोधर्मी खतरा पैदा हो सकता है।





