यूक्रेन युद्ध के बीच रूस और नॉर्थ कोरिया के बढ़ते सैन्य सहयोग ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान खींचा है। दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, नॉर्थ कोरिया रूस में अतिरिक्त सैनिक भेजने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, अभी ऐसी किसी नई तैनाती के तुरंत होने के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। यह आकलन ऐसे समय सामने आया है जब यूक्रेन की ओर से दावा किया गया है कि प्योंगयांग रूस की मदद के लिए बड़ी संख्या में अतिरिक्त सैनिक भेजने की योजना बना रहा है।
रूस को लगातार हथियारों की सप्लाई
दक्षिण कोरियाई खुफिया आकलन के अनुसार, नॉर्थ कोरिया रूस को सैन्य सहायता देना जारी रखे हुए है। इसमें तोपों के गोले और कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल हैं। अनुमान है कि प्योंगयांग ने रूस को 152 मिलीमीटर के 1.5 करोड़ से अधिक तोपखाने के गोले उपलब्ध कराए हैं। दोनों देशों के बीच यह सैन्य सहयोग खास तौर पर 2022 में रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के बाद तेजी से बढ़ा। 2023 से हथियारों और मिसाइलों की आपूर्ति तथा 2024 से सैनिकों की तैनाती की खबरें सामने आती रही हैं।
यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, नॉर्थ कोरियाई सैनिक पहले रूस के कुर्स्क क्षेत्र में भी तैनात किए गए थे। दक्षिण कोरिया और यूक्रेन के आकलनों में इनकी संख्या हजारों में बताई गई है। रूस और नॉर्थ कोरिया लंबे समय तक हथियारों और सैनिकों के हस्तांतरण से इनकार करते रहे, लेकिन बाद में नॉर्थ कोरिया ने रूस में अपने सैनिकों की मौजूदगी की पुष्टि की।
मिसाइलों की क्षमता में हो रहा सुधार
दक्षिण कोरियाई रक्षा मंत्रालय के अनुसार, युद्ध में इस्तेमाल की गई कुछ नॉर्थ कोरियाई बैलिस्टिक मिसाइलों की सटीकता में सुधार हुआ हो सकता है। माना जा रहा है कि युद्धक्षेत्र से मिले अनुभव और रूस के तकनीकी सहयोग ने इस सुधार में भूमिका निभाई है। इसके अलावा, नॉर्थ कोरिया कुछ नई बैलिस्टिक मिसाइलों और मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर प्रणालियों के विकास को भी आगे बढ़ा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम में Hwasong-12 Intermediate-Range Ballistic Missile (IRBM) विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। दक्षिण कोरियाई आकलन के मुताबिक इसे तैनाती के लिए तैयार किया जा रहा है। यह मिसाइल अमेरिकी क्षेत्र गुआम तक पहुंचने की क्षमता रखने वाली प्रणाली के तौर पर जानी जाती है।
इसके अलावा नॉर्थ कोरिया के इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को लेकर भी चिंता बनी हुई है। हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक इनके वॉरहेड की री-एंट्री तकनीक की वास्तविक क्षमता को लेकर अभी कुछ महत्वपूर्ण सवाल बाकी हैं।
रूस और नॉर्थ कोरिया दोनों को फायदा
रूस के साथ बढ़ता सैन्य सहयोग नॉर्थ कोरिया के लिए भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। युद्धक्षेत्र से मिलने वाला वास्तविक अनुभव उसकी सैन्य तकनीक और मिसाइल प्रणालियों को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। दूसरी ओर, रूस को अतिरिक्त गोला-बारूद, मिसाइलों और जनशक्ति का समर्थन मिल रहा है।
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हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, एक नॉर्थ कोरियाई मिसाइल यूनिट के रूस में तैनाती की खबरें भी सामने आई थीं, जिसे यूक्रेन के खिलाफ बैलिस्टिक मिसाइल हमलों से जोड़ा गया।
दक्षिण कोरिया के लिए यह स्थिति इसलिए चिंताजनक है क्योंकि रूस से तकनीकी सहयोग मिलने के बाद नॉर्थ कोरिया की मिसाइल क्षमताओं में और सुधार हो सकता है। इसका असर केवल यूक्रेन युद्ध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कोरियाई प्रायद्वीप की सुरक्षा स्थिति पर भी पड़ सकता है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए भी रूस-नॉर्थ कोरिया सैन्य साझेदारी एक बड़ी रणनीतिक चुनौती बनती जा रही है।
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फिलहाल दक्षिण कोरिया का आकलन यह है कि अतिरिक्त सैनिक भेजने की तैयारियां जारी हैं, लेकिन तत्काल बड़े पैमाने पर नई तैनाती के स्पष्ट संकेत नहीं हैं। फिर भी हथियारों की लगातार आपूर्ति, सैनिकों की संभावित तैनाती और मिसाइल तकनीक में सुधार यह संकेत देते हैं कि मॉस्को और प्योंगयांग के बीच सैन्य संबंध पहले की तुलना में कहीं अधिक गहरे हो चुके हैं। आने वाले समय में यह साझेदारी यूक्रेन युद्ध के साथ-साथ एशिया की सुरक्षा व्यवस्था को भी प्रभावित कर सकती है।





