कोलकाता में पिछले कुछ दिनों के दौरान आग लगने की कई घटनाओं ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था और अग्निशमन इंतजामों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। एयरपोर्ट के पास कार शोरूम में लगी भीषण आग से लेकर मिर्जा गालिब स्ट्रीट के होटल में हुई दर्दनाक घटना तक, लगातार सामने आ रही आग की घटनाओं ने लोगों को परेशान कर दिया है। इन घटनाओं में संपत्ति के नुकसान के साथ-साथ कई लोगों की जान भी गई है।
सबसे पहले कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास आग की घटना सामने आई। एयरपोर्ट के पास स्थित एक कार शोरूम में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और शोरूम से ऊंची-ऊंची लपटें उठने लगीं। घटना के समय इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
आग की सूचना मिलने के बाद दमकल की टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू किया गया। इसी दौरान एयरपोर्ट पर विमानों की आवाजाही को लेकर भी लोगों में चिंता बढ़ गई, क्योंकि घटनास्थल हवाई अड्डे के आसपास का संवेदनशील इलाका था।
इसके अलावा जेसोर रोड और बांकड़ा इलाके में भी आग लगने की घटनाओं ने स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ाई। व्यावसायिक इलाकों में आग लगने की घटनाएं विशेष रूप से चिंताजनक होती हैं, क्योंकि दुकानों और शोरूम में बड़ी मात्रा में ज्वलनशील सामग्री मौजूद हो सकती है। ऐसे में छोटी-सी चिंगारी भी कुछ ही समय में बड़े हादसे में बदल सकती है।
हालांकि, इन घटनाओं के बीच सबसे दर्दनाक हादसा मध्य कोलकाता की मिर्जा गालिब स्ट्रीट में सामने आया। 19 अगस्त की तड़के एक होटल में लगी भीषण आग में कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई, जबकि छह लोग घायल हुए। मृतकों में आठ बांग्लादेशी नागरिक और एक भारतीय नागरिक शामिल थे। आग देर रात करीब दो बजे लगी, जब होटल में मौजूद अधिकांश लोग सो रहे थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार धुएं के कारण कई लोगों की जान चली गई।
मिर्जा गालिब स्ट्रीट का इलाका बांग्लादेश से आने वाले पर्यटकों और इलाज के लिए कोलकाता पहुंचने वाले लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है। इस वजह से यहां कई होटल और गेस्टहाउस संचालित होते हैं। हादसे के बाद इलाके में सुरक्षा मानकों और आपातकालीन निकासी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे हैं। यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी व्यावसायिक या होटल भवन में आग लगने की स्थिति में सुरक्षित निकासी के पर्याप्त रास्ते और अग्निशमन उपकरण बेहद जरूरी होते हैं।
घटना की गंभीरता को देखते हुए मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है। अधिकारियों की कोशिश है कि आग लगने के वास्तविक कारण का पता लगाया जाए और यह भी जांच की जाए कि कहीं सुरक्षा नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ था। पश्चिम बंगाल फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज की जिम्मेदारी केवल आग बुझाने तक सीमित नहीं है, बल्कि आग से बचाव, जागरूकता और विभिन्न भवनों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था लागू करवाना भी उसके काम का हिस्सा है।
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कोलकाता में लगातार सामने आ रही आग की घटनाएं एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती हैं कि शहर के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, होटलों और अन्य भीड़भाड़ वाले स्थानों में अग्नि सुरक्षा मानकों की नियमित जांच कितनी प्रभावी है। ऐसी घटनाओं से बचने के लिए प्रशासन के साथ-साथ भवन मालिकों और संस्थानों को भी सुरक्षा नियमों का गंभीरता से पालन करना होगा।
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इन हादसों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आग से सुरक्षा केवल घटना के बाद राहत और बचाव तक सीमित नहीं होनी चाहिए। नियमित निरीक्षण, सुरक्षित निकासी मार्ग, अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता और कर्मचारियों की ट्रेनिंग जैसे उपाय किसी बड़े हादसे को टालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। कोलकाता की हालिया घटनाएं इसी दिशा में सतर्कता बढ़ाने की जरूरत को रेखांकित करती हैं।





