तमिलनाडु की राजनीति में गुरुवार को उस समय हलचल तेज हो गई, जब मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब दक्षिणी राज्यों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा के लिए दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद (Southern Zonal Council) की 31वीं बैठक तमिलनाडु के कोवलम में आयोजित की जा रही है। अमित शाह इस बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं।
बैठक से पहले अमित शाह और विजय की मुलाकात
अमित शाह ने 19 अगस्त को चेन्नई में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय से मुलाकात की थी। मुलाकात की तस्वीरें भी सामने आईं। शाह ने सोशल मीडिया पर बताया कि उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक से पहले मुलाकात की। यह विजय के मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद दोनों नेताओं के बीच पहली मुलाकात बताई जा रही है।
दोनों नेताओं की मुलाकात को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि विजय अब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद के उपाध्यक्ष की भूमिका में हैं, जबकि अमित शाह इसके अध्यक्ष हैं। ऐसे में परिषद की बैठक से पहले दोनों के बीच बातचीत का राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है।
दक्षिणी राज्यों के कई मुद्दों पर होगी चर्चा
दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना शामिल हैं। इसके अलावा पुडुचेरी, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह और लक्षद्वीप भी परिषद के दायरे में आते हैं। परिषद का उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाने तथा राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादों और साझा समस्याओं के समाधान के लिए मंच उपलब्ध कराना है।
बैठक में अंतरराज्यीय विवाद, जल बंटवारा, आंतरिक सुरक्षा, आर्थिक विकास, औद्योगिक निवेश, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। दक्षिण भारत के राज्यों के बीच नदियों के पानी के बंटवारे का मुद्दा लंबे समय से संवेदनशील रहा है। ऐसे में इस बैठक पर राज्यों के साथ-साथ राजनीतिक दलों की भी नजर है।
विजय उठा सकते हैं गोदावरी-कावेरी लिंक का मुद्दा
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय बैठक में गोदावरी-कावेरी नदी जोड़ो परियोजना का मुद्दा भी उठा सकते हैं। यह परियोजना तमिलनाडु में पानी की उपलब्धता, सिंचाई और सूखे की समस्या से जुड़ी एक महत्वपूर्ण मांग रही है। दक्षिणी राज्यों में जल संसाधनों को लेकर मतभेदों के बीच इस मुद्दे को परिषद की बैठक में उठाया जाना राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विजय ने बैठक के दौरान सहकारी संघवाद यानी केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग की जरूरत पर भी जोर दिया। उनका कहना है कि मजबूत राज्य ही मजबूत भारत का आधार बन सकते हैं और साझा आर्थिक हितों तथा प्राकृतिक संसाधनों को राज्यों के बीच विवाद के बजाय सहयोग का माध्यम बनाया जाना चाहिए।
राजनीतिक नजरिए से भी अहम है मुलाकात
अमित शाह और विजय की मुलाकात ऐसे समय हुई है जब तमिलनाडु में नई राजनीतिक परिस्थितियां बनी हैं। विजय ने 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद संभाला है और अब राष्ट्रीय स्तर के नेताओं के साथ उनकी बातचीत पर भी नजर रखी जा रही है।
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हालांकि, दोनों नेताओं की मुलाकात को आधिकारिक तौर पर दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक से पहले की मुलाकात के तौर पर पेश किया गया है। इसलिए इसे सीधे किसी राजनीतिक गठजोड़ या भविष्य की रणनीति से जोड़ना जल्दबाजी होगी। फिर भी, केंद्र सरकार और तमिलनाडु की नई सरकार के बीच संवाद के लिहाज से यह मुलाकात महत्वपूर्ण है।
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दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में अलग-अलग राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी साझा समस्याओं पर चर्चा कर रहे हैं। ऐसे में अमित शाह और विजय की मुलाकात ने बैठक से पहले ही राजनीतिक चर्चा को तेज कर दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि बैठक में जल विवाद, विकास, सुरक्षा और केंद्र-राज्य संबंधों से जुड़े मुद्दों पर क्या सहमति बनती है और तमिलनाडु सरकार अपनी प्राथमिकताओं को किस तरह सामने रखती है।





