बदलते एशिया में भारत-चीन की रेस, कूटनीति में कौन कितना आगे?

एशिया में चीन की बढ़ती ताकत के बीच भारत अपनी कूटनीतिक और रणनीतिक भूमिका मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। QUAD, BRICS, SCO और BIMSTEC जैसे मंचों के जरिए भारत क्षेत्रीय सहयोग बढ़ा रहा है। आने वाले समय में कनेक्टिविटी, सॉफ्ट पावर, तकनीक और रणनीतिक स्वायत्तता भारत की विदेश नीति के अहम आधार बन सकते हैं।

Shakshi Chauhan

10 अगस्त 2026

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बदलते एशिया में भारत-चीन की रेस, कूटनीति में कौन कितना आगे?

एशिया में तेजी से बदलते राजनीतिक और राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत की विदेश नीति की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। चीन की बढ़ती आर्थिक और सैन्य ताकत हिंद प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और दक्षिण एशिया के देशों में बदलते राजनीतिक हालात भारत के समान कई नई चुनौती खड़ी कर रहे हैं।

ऐसे समय में भारत के लिए केवल अपनी सुरक्षा पर ध्यान देना ही काफी नहीं है बल्कि क्षेत्र सहयोग आर्थिक साझेदारी और वैश्विक स्तर पर अपनी भूमिका को भी मजबूत करना है भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में चीन और पाकिस्तान की रणनीतिक साझेदारी भी शामिल है।

खासकर चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा यानी CPEC भारत के लिए केवल एक आर्थिक परियोजना नहीं है इसके रणनीतिक प्रभाव भी हैं विशेषज्ञों के अनुसार चीन जिस तेजी से क्षेत्र में कनेक्टिविटी और दूसरे प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है भारत को भी अपनी परियोजनाओं को और तेजी से पूरा करने कीजरूरत है। केवल योजनाओं की घोषणा करने से भारत चीन की बढ़ती मौजूदगी का मुकाबला नहीं कर सकता।

भारत अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करने के लिए कहीं अंतरराष्ट्रीय मंच पर सक्रिय है। BRICS, SCO, BIMSTEC जैसे संगठनों में भारत की भागीदारी अलग-अलग उद्देश्यों को पूरा करती है। इन मंजू के जरिए भारत व्यापार संस्कृति और रणनीतिक सहयोग को बढ़ाने के साथ दूसरे देशों के साथ द्विपक्ष संबंध को भी मजबूत कर सकता है।

इस संगठनों को केवल आर्थिक मंच मानना सही नहीं होगा क्योंकि इनके पीछे रणनीतिक हित भी जुड़े होते हैं।
भारत के विदेश नीति में रणनीतिक सहायता का विचार भी महत्वपूर्ण है। इसका मतलब है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर स्वतंत्र फैसले लेने की क्षमता बनाए रखें। समय के साथ भारत की विदेश नीति में नए आयाम जुड़े हैं।

एक्ट ईस्ट पॉलिसी इसका एक उदाहरण है जिसमें आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों के साथ रणनीतिक सहयोग पर भी जोर दिया गया है। वही मेक इन इंडिया के जरिए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की कोशिश भी भारत की रणनीतिक क्षमता को मजबूत करती है।

हिंद महासागर क्षेत्र में भी भारत के लिए समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा बेहद जरूरी है। b आधुनिक तकनीक ने समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नए रास्ते खोले हैं भारतीय नौसेना ने पनडुब्बियों सैटेलाइट निगरानी और आधुनिक नौकाओं जैसे तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा रहा है।

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भारत के सामने केवल पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियां ही नहीं आतंकवाद सीमा विवाद साइबर सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसी गैर पारंपरिक चुनौतियां भी महत्वपूर्ण है। इसे नहीं पढ़ने के लिए तकनीक शिक्षा और मानव संसाधन के विकास पर ध्यान देना जरूरी है खासकर साइबर सुरक्षा आने वाले समय में भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा का एक अहम हिस्सा बनने वाली है।

आने वाले वर्षों में भारत के एशिया की एक बड़ी शक्ति के रूप में उभरने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपनी क्षमताओं को मजबूत करते हुए एशिया में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसमें भारत की सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक कूटनीतिक भी अहम भूमिका निभाएगी।

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भारत को एशिया में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए व्यापार संस्कृति और कनेक्टिविटी पर ज्यादा ध्यान देना होगा सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे माध्यमों का इस्तेमाल करके भारत अपनी सॉफ्ट पावर को दुनिया तक पहुंचा सकता है।

Shakshi Chauhan
लेखक परिचय
Shakshi Chauhan
Shakshi Chauhan is a college student. she writes with her mind completely involved in writing. Even though she is into commerce field, but she…और पढ़ें
Shakshi Chauhan is a college student. she writes with her mind completely involved in writing. Even though she is into commerce field, but she still has passion for writing. It was her hobby and now she wants to hone the same and work on it. She really enjoys articulating things in her own way