भारत की बुलेट ट्रेन जापानी तकनीक से शुरू हुआ सफर अब मेक इन इंडिया को मिल रही नई रफ्तार।
भारत में हाई स्पीड रेल का सपना अब धीरे-धीरे हकीकत में बदलता नजर आ रहा है मुंबई अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना है।
जिसे भारतीय रेलवे के इतिहास में एक बड़ी तकनीकी बदलाव के तौर में देखा जा रहा है। वर्ष 2017 में शुरू हुई इस परियोजना का उद्देश्य केवल मुंबई और अहमदाबाद के बीच तेज यात्रा उपलब्ध करना नहीं बल्कि भारत में हाई स्पीड रेल से जुड़ी तकनीक निर्माण क्षमता और विशेषज्ञ को विकसित करना भी था।
508 किलोमीटर लंबा हाई स्पीड कॉरिडोर
मुंबई अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की लंबाई करीबन 508 किलोमीटर है इस मार्ग पर 12 स्टेशन बनाए जा रहे हैं। परियोजना में जापान की स्पेशल तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है और ट्रेन की डिजाइन गति करीब 320 किलोमीटर प्रति घंटा दिखाई दे रही है। परियोजना की शुरुआती लागत लगभग 1.08 लाख करोड रुपए बताई जा रही है। इसे जापान ODA सहायता में भी समर्थन मिला है।
परियोजना की शुरुआत के बाद भूमि अधिग्रहण और विभिन्न मंजूरियों से जुड़े कर्म के चलते निर्माण की गति प्रभावित हुई थी हालांकि बाद के वर्षों में काम में तेजी आई और बड़े पैमाने पर पुल पिलर तथा अन्य सिविल निर्माण आगे बढ़े है।
जापान से मिली तकनीक,भारत ने बढ़ाई अपनी क्षमता
परियोजना की सबसे बड़ी खास बात यह है कि इसकी शुरुआत जापानी तकनीक के सहारे हुई लेकिन निर्माण के कई हिस्सों में भारतीय कंपनियों और इंजीनियरों की भूमिका लगातार बड़ी है प्रीकास्ट तकनीक फुल स्पैन लॉन्चिंग बड़े बायोडाटा और आधुनिक निर्माण प्रणालियों के इस्तेमाल से भारतीय इंजीनियरिंग क्षेत्र को हाई स्पीड ट्रेन के लिए जरूरी तकनीक अब अनुभव मिल रहा है।
इस परियोजना का प्रभाव केवल रेलवे तक सीमित नहीं है बल्कि स्टील सीमेंट प्री कास्ट कंक्रीट ब्रिज इंजीनियरिंग इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम कई सारे भारी निर्माण उपकरण जैसे कहीं क्षेत्र को इससे काम और तकनीकी अवसर मिल रहे हैं। यही वजह है की बुलेट ट्रेन को भारत के लिए एक बड़े औद्योगिक और तकनीकी प्रयोग के तौर पर भी देखा जा रहा है।
मेक इन इंडिया को मिल सकता है बड़ा फायदा
हाई स्पीड रेल के क्षेत्र में भारत के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि केवल तेज ट्रेन चलाना नहीं बल्कि उससे जुड़ी तकनीकी क्षमता विकसित करना है। भारतीय इंजीनियरिंग और तकनीकी कर्मचारियों को हाई स्पीड रेल से जुड़ी प्रतिक्रियाओं का प्रशिक्षण मिल रहा है इसे भविष्य में देश को ऐसे बड़े प्रोजेक्ट के लिए विदेशी विशेषज्ञ पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
भारत और भविष्य के हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए स्वदेशी क्षमता विकसित करने पर भी जोर दे रहा है हालिया घटनाक्रमों से संकेत मिलता है कि देश हाई स्पीड ट्रेन निर्माण के साथ-साथ स्वदेशी और अन्य तकनीकियों की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहता है।
सामने है कहीं चुनौतियां
बुलेट ट्रेन परियोजना के सामने चुनौतियां अभी भी काम नहीं है परियोजना की लागत संचालन खर्च रखराव टिकट कराया और यात्रियों की संख्या जैसे मुद्दे इसकी आर्थिक सफलता तय करेंगे यदि किराया बहुत अधिक रहता है तो आम यात्रियों के लिए इसकी पहुंच सीमित हो सकती है।
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सरकार का लक्ष्य 2027 में इस हाई स्पीड रेल सेवा की शुरुआत करने का है शुरुआती परिचालन के लिए सूरत बिलिमोरा क्षेत्र को प्राथमिकता दिए जाने की योजना है जिसके बाद चरणबद्ध तरीके से विस्तार किया जाना है।
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कुल मिलाकर मुंबई अहमदाबाद बुलेट ट्रेन भारत के लिए केवल एक तेज परिवहन परियोजना नहीं है यह देश की इंजीनियरिंग क्षमता, हाई स्पीड रेल तकनीकी परीक्षा भी है अगर परियोजना से हासिल अनुभव को भविष्य में कॉरिडोरों में सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया जाएगा तो भारत आने वाले वर्षों में हाई स्पीड रेल तकनीक और निर्माण के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बन सकता है।





