उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सर गर्मियां लगातार तेज हो रही है। भारतीय जनता पार्टी भाजपा ने अभी से चुनावी तैयारी को गति दे दी है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों का दौरा कर संगठन और सरकार दोनों को मजबूत करने में जुटे हैं।
दूसरी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी की सक्रियता फिलहाल अधिकतर दिल्ली केंद्र से दिखाई दे रही है। ऐसे में प्रदेश की राजनीति में भाजपा और विपक्ष की रणनीतियों की तुलना भी शुरू हो गई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले लगभग 2 महीने से उत्तर प्रदेश के सभी 18 मंडलों का दौरा किया है इस दौरान उनकी सीधी पहुंचकर यह 219 विधानसभा क्षेत्र तक बनी है पूर्वांचल पश्चिमी उत्तर प्रदेश बुंदेलखंड और अवध समेत प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में उन्होंने विकास परियोजनाओं का उद्घाटन शिलान्यास जनसभाएं और प्रशासनिक समीक्षा बैठकर की है।
साथ ही जनता दर्शन कार्यक्रमों के जरिए आम लोगों की समस्या भी सुनी है। जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री अभी तक 41 जिलों में दौरा कर चुके हैं। इनमें आगरा गाजियाबाद वाराणसी गोरखपुर प्रयागराज अयोध्या बिजनौर झांसी सहारनपुर मुरादाबाद नोएडा बहराइच बाराबंकी और कहीं अन्य जिले शामिल है।
भाजपा संगठन का मानना है कि चुनाव से पहले इस तरह की लगातार जनसंपर्क गतिविधियों पार्टी के लिए लाभदायक साबित हो सकती है। मुख्यमंत्री योगी केवल चुनाव सभाओं तक सीमित नहीं है मैं कानून व्यवस्था की समीक्षा विकास योजनाओं की प्रगति प्रशासनिक बैठकों और पार्टी कार्यक्रमों में भी सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं इसके अलावा विभिन्न प्रतिनिधि मंडलों से मुलाकात और जनता से सीधे संवाद के माध्यम से सरकार की मौजूदगी मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं।
वहीं समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव की बात करें तो उन्होंने मार्च 2026 में दादरी में एक बड़ी जनसभा की थी जिसे 2027 चुनाव अभियान की शुरुआत माना गया था इसके बाद उनकी बड़ी चुनाव सभाओं की संख्या सीमित रही है हालांकि अखिलेश लगातार प्रेस कॉन्फ्रेंस सोशल मीडिया और पार्टी कार्यकर्मों के माध्यम से भाजपा सरकार पर हमले बोलते रहे और विभिन्न मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया देते रहे।
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बहुजन समाजवादी पार्टी की स्थिति भी अपेक्षाकृत शांत नजर आ रही है भाजपा प्रमुख मायावती की प्रदेश में आखिरी बड़ी रैली अक्टूबर 2025 में हुई थी इसके बाद पार्टी मुख्य रूप से सोशल मीडिया और संगठन आत्मक गतिविधियों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कर रही है बड़े पैमाने पर जनसभाओं की संख्या फिलहाल कम दिखाई दे रही है।
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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव में अभी कई महीने बाकी है और जैसे-जैसे मतदान का समय नजदीक आएगा सभी दल अपनी चुनावी रणनीति को और आक्रामक बनाएंगे। फिलहाल भाजपा प्रदेश भर में संगठन को मजबूत करने और सरकार की उपलब्धियां को जनता तक पहुंचने में लगी हुई है जबकि विपक्ष विभिन्न राजनीतिक मुद्दों के जरिए सरकार को गिरने की कोशिश कर रहा है।





