दो दिन के युद्धविराम के बाद अमेरिका ईरान के द्वेष और हमले दोबारा क़तार में लग गए हैं। हाल में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बातचीत का मौका देने के लिए हमलों पर रोक लगाई थी लेकिन कल यानी 29 जुलाई को ईरान ने बातचीत के इस प्रस्ताव को ठुकराते हुए अमेरिकी सैनिकों और सऊदी ऊर्जा क्षेत्रों पर ड्रोन और मिसाइल से हमले किये।
बता दें कि हाल ही में इंटरनेशनल रिपोर्ट्स से पता चला है कि अमेरिकी जहाज पर ईरान से करीब 3000 किलोमीटर की दूरी पर भूमध्य सागर में हमला हुआ है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले के होने की कल्पना भी नहीं की थी।
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क्या है पूरा मामला ?
मिस्र के दमियत्ता बंदरगाह पर बुधवार को हुए एक जोरदार विस्फोट के बाद दो गैस जहाजों में आग लग गई। इनमें अमेरिका की कंपनी एनर्जोस इंफ्रास्ट्रक्चर के मालिकाना हक वाला फ्लोटिंग गैस स्टोरेज टैंकर एनर्जोस विंटर और ग्रीस की शिपिंग कंपनी गैसलॉग की ओर से ऑपरेट किया जाने वाला LNG कैरियर गैसलग सलेम शामिल हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक पहले इस हमले को ड्रोन हमला बताया गया, हालांकि अभी मिस्र इलाके के अधिकारियों ने अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि जहाज पर हमला ऐसे समुद्री मार्ग में हुआ, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है।
वहीं दूसरी ओर समुद्री खुफिया जांच कंपनी ने बताया कि कम से कम एक जहाज पर ड्रोन ने निशाना बनाया। अभी अमेरिका के बीच सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर हमला किया किसने है। क्या ये यमन के हूती विद्रोहियों ने किया या ईरान ने किसी तरह से ऐसा किया है?
हमले के बाद क्या हुआ ?
मिस्र के पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया की हमले की खबर पहुंचते ही तुरंत आपातकालीन प्रतिक्रिया योजना को शुरू किया गया और कुछ ही समय में जहाजों में लगी भीषण आग को काबू में लाया गया। राहत की बात यह है की मंत्रालय ने किसी के घायल होने की पुष्टि नहीं की है। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक शिपिंग सर्विस कंपनी इंचकेप ने कहा कि LNG टर्मिनल पर विस्फोट हुआ था। आग बुझाने के बाद दोनों जहाजों को बंदरगाह से सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया और अन्य टर्मिनलों पर ऑपरेशन दोबारा शुरू करने की तैयारी की गई।
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ट्रंप ने ईरान पर जताया शक
यह हमला तब हुआ जब वैश्विक तनाव अपने चरम पर है। अमेरिकी जहाजों को किसी प्रकार का नुकसान सीधा ईरान की तरफ शक पैदा करता है। इसी कारण अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी दे दी गई है और उन्होंने संकेत दिया कि इसके पीछे ईरान का हाथ हो सकता है।
ट्रंप ने कहा कि सबूतों का आकलन करने पर यदि ईरान का हमले में हाथ हुआ तो उन्हें करारा जवाब देने से अमेरिकी सेना पीछे नहीं हटेगी। हालांकि ईरान की ओर से इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
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ईरान-अमेरिका तनाव से क्या है कनेक्शन?
पिछले कुछ दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ा है। अमेरिका ने ईरान से जुड़े ठिकानों पर कार्रवाई की है, जबकि ईरान की ओर से भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के दावे सामने आए हैं। ऐसे माहौल में समुद्री हमलों को भी उसी व्यापक संघर्ष का हिस्सा माना जा रहा है।
वहीं दूसरी ओर समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जबकि शिपिंग कंपनियां भी जोखिम का आकलन कर रही हैं।





