सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को लगाई फटकार, झीलों के सुंदरीकरण पर लगाई रोक

दरभंगा की गंगासागर, दिग्घी और हराही झीलों के सौंदर्यीकरण कार्य पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। अदालत ने बिहार सरकार से कहा कि सौंदर्यीकरण के नाम पर जलाशयों को नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता और अगली अनुमति तक सभी विवादित कार्य बंद रहेंगे।

Shakshi Chauhan

29 जुलाई 2026

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सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को लगाई फटकार, झीलों के सुंदरीकरण पर लगाई रोक

बिहार के दरभंगा शहर के तीन ऐतिहासिक झीलों गंगा सागर दिग्गड़ी और हराही के सौंदर्य करण कार्य पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत में बिहार सरकार को स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सौंदर्य करण के नाम पर जलाशयों के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जा सकती कोर्ट ने यह भी कहा कि उसकी अनुमति के बिना इन जिलों में कोई नया निर्माण या मिट्टी भरने का काम नहीं किया जाएगा।

क्या है पूरा मामला?

दरभंगा की यह तीनों झीलें कहीं 100 साल पुरानी है और शहर की पहचान मानी जाती है बिहार सरकार ने इन झीलों के सौंदर्य करण और पुनर्जीवन के लिए एक परियोजना शुरू की थी। इस योजना के तहत पैदल मार्ग, बैठने की जगह, शौचालय और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं विकसित की जानी थी।

हालांकि स्थानीय लोगों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संगठनों ने आरोप लगाया कि परियोजना के दौरान जिलों के कुछ हिस्सों में मिट्टी और पत्थर भरकर उनका आकर काम किया जा रहा है। उनका कहना था कि इससे जिलों का प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरण प्रभावित होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि जलाशयों और सौंदर्य करण के नाम पर नुकसान नहीं पहुँचाया जा सकता कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वह झीलों को हाथ ना लगाए और किसी भी तरह का निर्माण कार्य तुरंत रोक दें अदालत नहीं है अभी कहा कि जलाशयों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है और विकास कार्य पर्यावरण को नुकसान पहुंचाना गलत है।

बिहार सरकार का पक्ष

बिहार सरकार ने कोर्ट में कहा कि परियोजना का उद्देश्य जिलों को बेहतर बनाना है ना कि उन्हें नुकसान पहुंचाना। सरकार के अनुसार कुछ स्थानों पर मिट्टी भरने और पत्थर लगाने का काम केवल झील के किनारो को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है सरकार ने यह भी बताया कि परियोजना के तहत स्नान घाट शौचालय चेंजिंग रूम और अन्य सुविधाएं बनाए जा रहे हैं ताकि लोगों को बेहतर व्यवस्था मिल सके और झीलों के आसपास गंदगी कम हो।

Bihar
Bihar Jheel Images: Pexels

याचिका कर्ताओं का कहना है कि यह झीले केवल जलाशय नहीं बल्कि दरभंगा की ऐतिहासिक सांस्कृतिक विरासत का एक बड़ा हिस्सा है यदि उनके क्षेत्रफल को काम किया गया तो उसे जल संरक्षण भजन तारा और स्थानीय परिस्थितियों पर काफी असर पड़ सकता है उन्होंने कोर्ट से मांग की झीलों को उनके मूल स्वरूप में सुरक्षित रखा जाए किसी भी प्रकार के अतिक्रमण या भराव को रोका जाए।

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फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जिलों से जुड़े सभी विवादित कार्य रोक दिए गए हैं अब इस मामले में आगे की सुनवाई के दौरान अदालत सरकार और याचिकाकर्ता की अपीलों पर विचार करेगी इसके बाद यह तय होगा की परियोजना किस रूप में आगे बढ़ेगी।

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यह मामला केवल दरभंगा की तीन जिलों तक सीमित नहीं है बल्कि देशभर में जल जलाशयों और प्राकृतिक साधनों के संरक्षण से जुड़ा एक महत्वपूर्ण उदाहरण भी बन सकता है अदालत का संदेश साफ है कि विकास जरूरी है लेकिन पर्यावरण और ऐतिहासिक धरोहर की कीमत पर नहीं।

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लेखक परिचय
Shakshi Chauhan
Shakshi Chauhan is a college student. she writes with her mind completely involved in writing. Even though she is into commerce field, but she…और पढ़ें
Shakshi Chauhan is a college student. she writes with her mind completely involved in writing. Even though she is into commerce field, but she still has passion for writing. It was her hobby and now she wants to hone the same and work on it. She really enjoys articulating things in her own way