Delhi HC: सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस

हाल फिलहाल में ही सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल के जरिए अपनी मांग सरकार के आगे रखी है लेकिन यह बात बहुत ज्यादा बढ़ चुकी है। सोनम वांग्चो की पबिगड़ती सेहत पर दिल्ली हाई कोर्ट पर याचिका पहुंची है कि उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया जाए और फोर्स फीडिंग करवाई जाए।

Shakshi Chauhan

16 जुलाई 2026

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Delhi HC: सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस

सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर दिल्ली हाई कोर्ट पहुंची याचिका अस्पताल में भर्ती कर फोर्स फीडिंग कराने की मांग। दिल्ली के जंतर मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर अब मामला दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंच गया है उनकी लगातार गिरती सेहत को देखते हुए जनहित याचिका दायर की गई है जिसमें अदालत से मांग की गई है कि वांगचुक को तुरंत सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया जाए। और जान बचाने के लिए आवश्यक होने पर फोर्स फीडिंग भी करवाई जाए।

याचिका में दावा किया गया है कि सोनम वांगचुक पिछले 18 दिन से लगातार भूख हड़ताल पर है और इस दौरान उनका वजन करीब 8.5 किलोग्राम तक घट चुका है याचिका करता का कहना है कि यदि जल्दी चिकित्सा नहीं दी गई तो उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है इसी आधार पर अदालत में तत्काल मांगी है कि सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाया जाए।

यह भी कहा गया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है लेकिन जब किसी व्यक्ति का जीवन खतरे में हो तो राज्य की जिम्मेदारी बनती है कि वह उनकी जान बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाए इसलिए केंद्र सरकार दिल्ली सरकार और संबंधित अधिकारियों का निर्देश है कि वह वांगचुक को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाए।

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इस मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के संकेत दिए हैं। अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है कि अब तक वांगचुक की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए हैं और उनकी मेडिकल निगरानी किस प्रकार की जा रही है।
सोनम वांगचुक लंबे समय से पर्यावरण संरक्षण जलवायु परिवर्तन और लद्दाख से जुड़े हुए विभिन्न मुद्दों को लेकर सक्रिय रहे हैं उनकी भूख हड़ताल भी इन्हीं मांगों को लेकर है।

देश भर में कहीं सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने उनके समर्थन में आवाज उठाई है और सरकार से बातचीत के जरिए समाधान निकालने के अपील की है। हालांकि फोर्स फीडिंग को लेकर कानूनी और नैतिक बहस भी बहुत ज्यादा तेज हो गई है। यह पक्ष का मान्य है कि यदि किसी व्यक्ति की जान खतरे में हो तो डॉक्टर हो और सरकारों का कर्तव्य है कि वह उसका जीवन बचाए।

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वही दूसरा पक्ष इसे व्यक्ति की स्वतंत्र इच्छा और आत्मनिर्णय के अधिकार से जोड़कर देख रहा है। ऐसे मामले में अदालत को व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जीवन के अधिकार के बीच संतुलन बनाना होता है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है की अदालत सबसे पहले मेडिकल रिपोर्ट, डॉक्टरों की राय पर विचार करेगी यदि चिकित्सा टीम यह बताती है कि वह जो की स्थिति अत्यंत गंभीर है तो अदालत जीवन बचाने के उद्देश्य से विशेष निर्देश जारी कर सकती है।

दूसरी और यदि उनकी स्थिति नियंत्रण में पाई जाती है तो अदालत सरकार और प्रदर्शन कार्यों के बीच संवाद पर अधिक जोर दे सकती है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर शांतिपूर्ण विरोध नागरिक अधिकारों और सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारियां पर राष्ट्रभाषा छोड़ दी है। अब सभी के नज़रे दिल्ली हाई कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हुई है।

Shakshi Chauhan
लेखक परिचय
Shakshi Chauhan
Shakshi Chauhan is a college student. she writes with her mind completely involved in writing. Even though she is into commerce field, but she…और पढ़ें
Shakshi Chauhan is a college student. she writes with her mind completely involved in writing. Even though she is into commerce field, but she still has passion for writing. It was her hobby and now she wants to hone the same and work on it. She really enjoys articulating things in her own way