प्रयागराज हाईकोर्ट की अधिवक्ता जागृति शुक्ला का निधन, सड़क हादसे में थीं घायल, इसी घटना में वकील-डॉक्टरों के बीच झड़प हुई थी

भयानक सड़क हादसे के कारण इलाहाबाद की काबिल वकील जागृति शुक्ला का सोमवार को हुआ निधन, सड़क हादसे के कारण हुई मौत, कई दिन तक थी अस्पताल में भर्ती।
जानी मानी वकील जागृति शुक्ला का हुआ निधन I

इलाहाबाद हाईकोर्ट की अधिवक्ता जागृति शुक्ला का निधन हो गया। बताया जा रहा है कि, गंभीर सड़क हादसे के कारण उनकी हालत काफी कमजोर थी। बचने के मौके भी कम बताए जा रहे थे, कई दिनों से तो वह अस्पताल में जीवन और मृत्यु के बीच लड़ रही थीं। 20 मई की सुबह जागृति शुक्ला अपनी क्रिकेट प्रैक्टिस के लिए जा रही थीं। इसी के बीच, मज़ार तिराहे वाले इलाके में पहुँचते ही उनका भयानक हादसा हो गया, हादसा इतना गंभीर था कि उन्हें सिर समेत शरीर के कई हिस्सों में गहरी चोटें आईं I

हादसे के तुरंत बाद उन्हें स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल में भर्ती कराया गया, हालत लगातार नाजुक बनी रही और उन्हें आईसीयू में रखा गया। शहर की जानी-मानी वकील होने के कारण काफी वकील उन्हें देखने आए, इसी बीच डॉक्टर और वकीलों के बीच इलाज को लेकर बड़ा विवाद होने लग गया, पहले तो बात तुड़क-तक चलती रही, फिर मारपीट पर वकील और डॉक्टर उतर आए। घटना होते ही पूरे अस्पताल में अशांति का माहौल बन गया और भगदड़ सी मचने लग गई थी।

दरअसल वकीलों ने आरोप लगाया था कि जागृति का सही समय पर ठीक इलाज होना चाहिए था लेकिन उन्हें पर्याप्त इलाज नहीं मिल रहा था, जबकि डॉक्टर का कहना था कि वे अपनी तरफ से निरंतर प्रयास कर रहे हैं। कई महिलाओं वकीलों का यह भी कहना है कि हाथापाई इतनी बढ़ गई कि डॉक्टरों ने उनके बाल पकड़कर उन्हें खींचा और बुरी तरह से मारपीट की। हद से बढ़कर लोग जागृति को निजी अस्पताल ले गए जहां 24 घंटे इलाज के बाद 21 मई को उन्हें लखनऊ PGI रेफर कर दिया गया। करीब 18 दिन तक इलाज चलने के बाद सोमवार को उनकी मौत हो गई।

Jagriti Shukla Prayagraj High Court Tribute

इस पूरे घटनाक्रम के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के वकीलों में भारी आक्रोश देखने को मिला। जागृति के निधन के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट एसोसिएशन ने न्यायिक कार्य से दूर रहने का फैसला कर लिया, इसी के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई गई। वकीलों ने अस्पताल कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

दूसरी तरफ डॉक्टर ने भी बदसुलूकी का आरोप लगाते हुए मुकदमा चलाने का फैसला किया। पूरे वकील समाज के बीच आक्रोश का माहौल देखने को मिल रहा था हालांकि अधिवक्ताओं का एक समूह अंबेडकर मूर्ति चौक के पास धरना-प्रदर्शन कर रहा है। उनकी मांग थी कि डॉक्टर का लाइसेंस रद्द कर दिया जाए।

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करीब दो सप्ताह तक इलाज के बाद आखिरकार जागृति शुक्ला जिंदगी की जंग हार गईं। उनके निधन से न सिर्फ एक परिवार ने अपना सदस्य खोया, बल्कि न्यायिक क्षेत्र ने एक युवा और उभरती हुई अधिवक्ता को भी खो दिया। उनके सहयोगियों के मुताबिक, वह अपने काम के प्रति समर्पित और मेहनती वकील थीं, जिन्होंने कम समय में अपनी पहचान बनाई थी।

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