एंटीबायोटिक दवाओं का गलत निस्तारण बढ़ा सकता है AMR खतरा, गाजियाबाद में डॉक्टर की चेतावनी

दैनिक जागरण और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अभियान के तहत राजनगर एक्सटेंशन में एएमआर पर जागरूकता कार्यक्रम हुआ। डॉ. नवनीत वर्मा ने कहा कि एंटीबायोटिक दवाओं का गलत इस्तेमाल इलाज को मुश्किल बना सकता है, इसलिए इन्हें डॉक्टर की सलाह अनुसार ही लें और सही तरीके से निस्तारित करें।
Antibiotic Disposal AMR Risk Ghaziabad Warning

दैनिक जागरण और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के संयुक्त अभियान एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस पर प्रहार के अंतर्गत रविवार को राजनगर एक्सटेंशन स्थित गौर कास्केड सोसायटी में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को एंटीबायोटिक दवाओं के गलत इस्तेमाल से होने वाले खतरों और बढ़ते एएमआर के बारे में सचेत करना था।

मुख्य वक्ता डॉ. नवनीत वर्मा ने उपस्थित लोगों को बताया कि एंटीबायोटिक दवाएं तभी प्रभावी रहती हैं जब उन्हें चिकित्सक द्वारा बताई गई अवधि और खुराक के अनुसार पूरा लिया जाए।

उन्होंने समझाया कि बीच में दवा बंद कर देने या मनमाने ढंग से सेवन करने पर बैक्टीरिया मजबूत हो जाते हैं और भविष्य में दवाएं असर करना बंद कर सकती हैं। उनके अनुसार एएमआर की समस्या बढ़ने पर डॉक्टरों को अधिक भारी डोज देनी पड़ती है, जिससे उपचार जटिल हो जाता है।

डॉ. वर्मा ने कहा, “एंटीबायोटिक दवाएं तभी असर करती हैं जब उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार पूरा लिया जाए। बीच में दवा छोड़ देने से बैक्टीरिया मजबूत हो जाते हैं और भविष्य में दवाएं बेअसर हो सकती हैं।”

उन्होंने लोगों को जीवनशैली में सुधार की सलाह देते हुए कहा, “स्वाद से ज्यादा स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें। मौसमी फल और सब्जियां खाएं, व्यायाम और प्राणायाम करें ताकि संक्रमण का खतरा कम पड़े और एंटीबायोटिक की जरूरत कम हो।”

कार्यक्रम के दौरान निवासियों ने दवाओं के प्रकार, उनकी गुणवत्ता, अलग अलग कंपनियों के अंतर और सही समय तक दवा लेने जैसे विषयों पर सवाल पूछे। डॉ. वर्मा ने एक एक प्रश्न का विस्तार से उत्तर देकर लोगों की शंकाएं दूर कीं। उन्होंने यह भी बताया कि जितना जरूरी दवाओं का सही उपयोग है, उतना ही महत्वपूर्ण उनका सुरक्षित निस्तारण भी है।

दवाओं को लेकर लापरवाही पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा, “बची हुई एंटीबायोटिक को नाली में बहाना या कूड़े में फेंकना सही नहीं है। इन्हें मेडिकल स्टोर या अस्पताल में वापस करना चाहिए, तभी रेजिस्टेंस के खतरे को कम किया जा सकता है।”

कार्यक्रम में शामिल लोगों ने भी इस पहल की सराहना की। नीरज राठी ने कहा, “डॉक्टर ने एंटीबायोटिक के इस्तेमाल और निस्तारण की बहुत जरूरी जानकारी दी, जिससे लोगों को सही समझ मिली।” पुनीत गोयल ने माना कि आज हर व्यक्ति का एएमआर के बारे में जागरूक होना बेहद जरूरी है और ऐसे अभियान समय की मांग हैं। वहीं एमपी ओझा ने कहा कि दवाओं के गलत इस्तेमाल के दुष्परिणाम जानकर लोगों को स्पष्ट मार्गदर्शन मिला।

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जागरूकता सत्र के अंत में लोगों से अपील की गई कि वे बिना डॉक्टर की सलाह एंटीबायोटिक न लें और निर्धारित कोर्स को पूरा करें। आयोजकों का कहना था कि सामुदायिक स्तर पर जागरूकता बढ़ाकर ही एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस जैसी गंभीर चुनौती से प्रभावी तरीके से निपटा जा सकता है।