IIT कानपुर के वैज्ञानिकों ने खोजा EP67 प्रोटीन मॉलिक्यूल, अब टीके होंगे ज्यादा असरदार और सुरक्षित

आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों ने EP67 नामक एक विशेष प्रोटीन अणु की कार्यप्रणाली का सफलतापूर्वक पता लगाया है। यह खोज भविष्य में ऐसी वैक्सीन विकसित करने का रास्ता खोल सकती है जो अधिक प्रभावी होने के साथ-साथ सुरक्षित भी हों। शोध के अनुसार, EP67 शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर तरीके से सक्रिय करता है, जबकि अनावश्यक सूजन और दुष्प्रभाव की संभावना को कम करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज अगली पीढ़ी की वैक्सीन तकनीक में भारत की बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि साबित हो सकती है।

Shakshi Chauhan

22 जुलाई 2026

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IIT कानपुर के वैज्ञानिकों ने खोजा EP67 प्रोटीन मॉलिक्यूल, अब टीके होंगे ज्यादा असरदार और सुरक्षित

भारत के वैज्ञानिकों ने वैक्सीन तकनीक के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारतीय आईआईटी कानपुर के शोधकर्ताओं ने EP 67 नामक एक विशेष प्रोटीन अनु के काम करने की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया है। यह खोज भविष्य में एक ऐसी वैक्सीन विकसित करने में मदद कर सकता है जो पहले से अधिक प्रभावित होने के साथ-साथ सुरक्षित भी हो यह शोध प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल प्रोसीडिंग्स आफ नेशनल एकेडमी ऑफ़ साइंस (PNAS) मैं प्रकाशित हुआ है।

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क्या है EP 67?

यह एक ऐसा(adjuvant) है जिसे वैक्सीन मैं मिलाकर शरीर की प्रतीक्षा प्रणाली इम्यून सिस्टम को अधिक मजबूती से सक्रिय किया जा सकता है। एडज्वाइंट का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वैक्सीन लगाने के बाद शरीर संक्रमण के खिलाफ बेहतर और लंबे समय तक सुरक्षा विकसित करें।

कैसे काम करता है EP 67?

जब शरीर पर किसी वाइरस या बैक्टीरिया का हमला होता है तो इम्यून सिस्टम नमक एक प्रोटीन बनता है c5a। यह प्रोटीन शरीर की रोग प्रतिरोधक कोशिश ऑन को सक्रिय करता है लेकिन यदि इसकी मात्रा लंबे समय तक अधिक बनी रहे तो सूजन और कई सारे नुकसान भी हो सकते हैं।
आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों ने इसकी प्राकृतिक प्रक्रिया से प्रेरणा लेकर EP 67 तैयार किया है।

IIT
IIT EP67 Images: youtube

c5a का छोटा और सुरक्षित रूप है, जिसमें केवल 10 अमीनो एसिड होते हैं। लेकिन आध्यात्मिक सूजन पैदा नहीं करता यह इससे वैक्सीन का असर बढ़ता है और दुष्प्रभा भी कम होने की संभावना रहती है। शोध में पाया गया कि EP 67 मुख्य रूप से कोशिकाओं और मैक्रोफेज को सक्रिय करता है। यह दोनों कोशिकाएं शरीर में लंबे समय तक प्रति रक्षा विकसित करने में अहम भूमिका निभाती है।

सबसे खास बात यह है कि EP 67 उन न्यूट्रॉन फिल्म कोशिकाओं को बहुत कम सक्रिय करता है जो अधिक सूजन और नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार होती है। सबसे खास बात यह है कि वैज्ञानिकों ने अंत्य आधुनिक Cyro-EM तकनीक का उपयोग करके पहली बार यह देखा कि EP 67 मानव प्रतिरक्षा कोशिकाओं पर मौजूद c5aR1 रिसेप्टर से कैसे जुड़ता है।

इस तकनीक से प्राप्त तस्वीरों में स्पष्ट हुआ कि यह एक विशेष बुक जैसी संरचना बनाकर रिसेप्टर से जुड़ता है और उसे नियंत्रित तरीके से सक्रिय करता है इसे वैज्ञानिक अब और बेहतर बनाने में लगे हुए हैं ताकि उसके ढांचे में एक आवश्यक बदलाव कर सकेंगे।

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पहले भी मिले हैं सकारात्मक परिणाम।

इससे पहले जानवरों पर भी किया गया था इसका प्रयोग और वैक्सीन के साथ मिलकर यह पशु पक्षियों को दिया जाता था।
शोध में पाया गया कि जिन चूहों को EP 67 वैक्सीन के साथ दिया गया था उनमें सामान्य वैक्सीन की तुलना से अधिक मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया विकसित हुई। कॉविड-19 वायरस सहित कहीं संक्रमणों के खिलाफ भी इसके उत्साह जनक परिणाम सामने आए। शादी एक एंटीबायोटिक बैक्टीरिया के खिलाफ भी काफी अच्छा साबित हो सकता है।

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अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से हुआ शोध।

यह शोध आईआईटी कानपुर के जैविक विज्ञान एवं जैव अभीयंत्रकी विभाग के प्रोफेसर अरुण के शुक्ल के नेतृत्व में किया गया। इस परियोजना में अमेरिका की यूनिवर्सिटी आफ साउदर्न केलिफोर्निया और ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ़ क्वींसलैंड के वैज्ञानिकों ने भी काफी ज्यादा सहयोग दिया।

Shakshi Chauhan
लेखक परिचय
Shakshi Chauhan
Shakshi Chauhan is a college student. she writes with her mind completely involved in writing. Even though she is into commerce field, but she…और पढ़ें
Shakshi Chauhan is a college student. she writes with her mind completely involved in writing. Even though she is into commerce field, but she still has passion for writing. It was her hobby and now she wants to hone the same and work on it. She really enjoys articulating things in her own way