भारत में हर दिन, हर घंटे रोजाना नए फ्रॉड केस सामने आते हैं। कभी साइबर फ्रॉड के रूप में तो कभी फ्रॉड कंपनियों के रूप में। भारत में अगर पिछले पांच सालों का आंकड़ा देखा जाए तो 2021-2025 तक 65.7 लाख साइबर फ्रॉड केस दर्ज कराए जा चुके है। आपको सोच कर ही हैरानी होगी कि इन साइबर फ्रॉड में कुल 11,158 करोड़ रुपये से ज्यादा रकम ठगी गई है।
ऐसा ही मामला महाराष्ट्र के ठाणे से सामने आ रहा है जहां निवेश के नाम पर सिर्फ लोगों को लूटा जा रहा था। पुलिस ने मामले में कंपनी के छह निदेशकों के खिलाफ संबंधित कानूनी धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। पूरे मामले की जांच की जा रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि निवेशकों से जुटाई गई रकम कहां इस्तेमाल की गई और इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
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क्या है यह ठगी का मामला ?
महाराष्ट्र के ठाणे जिले में एक निजी निवेश कंपनी के ऊपर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है जहां कंपनी के छह निदेशकों के खिलाफ कुल 68 निवेशकों से कथित तौर पर 7.09 करोड़ रुपये की ठगी करने का मामला दर्ज किया गया है।
मामले में अधिकारियों ने यह बात साफ की कि इन निदेशकों ने निवेशकों से हर महीने भारी रिटर्न देने का वादा कर उनसे पैसे लिए थे। जांच में पता चला है कि यह ठगी का काम यह लोग एक कंपनी के द्वारा नहीं बल्कि अलग-अलग कंपनियों के द्वारा कर रहे थे और यह कार्य पिछले कई वर्षों से चलता आ रहा था जहां लोगों को झूठा दिलासा देकर फंसाया जाता था।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह घोटाला 2018 से चलता आ रहा है। मुंबई के मालाड इलाके में वड़ा पाव की दुकान चलाने वाला एक व्यक्ति उस समय बीमा पॉलिसी खरीदना चाहता था। इसी दौरान उसके एक परिचित ने उसकी मुलाकात एक ऐसे व्यक्ति से कराई, जो उस समय शेयर ब्रोकिंग कंपनी चलाता था।
पांच हजार से शुरू किया निवेश
मामले की शुरुआत वर्ष 2018 में हुई थी, जब मुंबई के मालाड में वड़ा पाव की दुकान चलाने वाले एक व्यक्ति की मुलाकात एक ऐसे आरोपी से हुई, जो उस समय शेयर ब्रोकिंग कंपनी चला रहा था। शुरुआत में उसने 5,000 रुपये जमा किए और बाद में तीन लाख रुपये का निवेश किया। उसे छह महीने में 1.05 लाख रुपये ब्याज देने का भरोसा दिया गया था। जब निवेशक रकम लेने पहुंचे तो उन्हें कई तरह के बहाने बनाकर रोका गया और कथित तौर पर हलफनामे पर हस्ताक्षर कराकर यह दिखाने की कोशिश की गई कि निवेश की रकम कंपनी में नहीं बल्कि आरोपी को निजी कर्ज के रूप में दी गई थी।
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इसी तरह कंपनी ने दूसरे लोगों को भी ज्यादा मुनाफे का लालच देकर निवेश कराया। कुछ समय बाद जब निवेशक अपना ब्याज लेने मुंबई के कांदिवली स्थित कंपनी के कार्यालय पहुंचे तो उन्हें भुगतान के लिए करीब 45 दिन तक टालते रहे। पुलिस का आरोप है कि इस दौरान निवेशकों पर दबाव बनाकर उनसे हलफनामे पर हस्ताक्षर भी कराए गए। उनसे कहा गया कि उन्होंने जो पैसा दिया है, वह कंपनी में निवेश नहीं बल्कि आरोपी को दिया गया व्यक्तिगत कर्ज है।
बाद में कंपनी का कार्यालय बंद हो गया। पुलिस के अनुसार, 68 निवेशकों की शिकायतों में सामने आया कि कुल 7.09 करोड़ रुपये की रकम फंसी हुई है। अब पुलिस ने मामला दर्ज कर यह पता लगाने की जांच शुरू कर दी है कि निवेशकों से जुटाई गई रकम कहां गई और इस कथित धोखाधड़ी में और कौन लोग शामिल हैं।
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बता दें कि मई 2023 में भांडुप पुलिस ने इसी शेयर ब्रोकिंग कंपनी को चलाने वाले आरोपी को निवेश संबंधी धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया था। हालांकि इसके बाद उससे जमानत मिली और उसने एक नई फ्रॉड कंपनी की शुरुआत की। आरोपी ने कंपनी की शुरुआत करने के लिए एक वीडियो जारी की जिसमें उसने लोगों से नई कॉरपोरेट पहल शुरू करने की बात कही जिसके बाद लोगों को उम्मीद जगी कि उनका पैसा वापस मिल जाएगा।




