रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत के लिए एक बार फिर से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भीतर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की उमंग उभरती नजर आ रही है। बता दें कि कल यानी 29 जुलाई को अमेरिकी सीनेट ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी थी। इसी प्रतिक्रिया को लेकर बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले उस बिल पर प्रतिक्रिया दी है।
प्रस्तावित कानून अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार दे सकता है, जो बड़ी मात्रा में रूसी तेल और गैस खरीद रहे हैं। भारत और चीन रूसी कच्चे तेल के बड़े खरीदार हैं, इसलिए दोनों देश इसके सीधे असर में आ सकते हैं।
इस बिल के तहत कई देशों पर कड़े व्यापारिक प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है। सांसदों ने 86-12 के प्रक्रियात्मक वोट से इस कानून को मंजूरी दी है। इसमें भारत शामिल है और अगर अमेरिकी संसद से भी बिल को मंजूरी मिलती है तो रूसी तेल खरीदने के लिए भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लगाया जा सकता है।
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टैरिफ का प्रस्ताव किसने रखा था ?
टैरिफ की प्रतिक्रियाओं को सबसे पहले सीनेटर लिंडसे ग्राहम लेकर आए थे जिनका अचानक से इस महीने देहांत हो गया। प्रस्तावित कानून भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान को निशाना बनाने के लिए है। यह प्रस्ताव रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले इन देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का रास्ता खोलता है।
बता दें कि यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने रूस की आय सीमित करने के लिए कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। इसके बावजूद भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए रूस से रियायती कीमतों पर कच्चे तेल का आयात जारी रखा। भारत का कहना है कि उसकी पहली प्राथमिकता देश की ऊर्जा सुरक्षा और आम लोगों को सस्ती कीमत पर ईंधन उपलब्ध कराना है। अब अमेरिकी सीनेट में आगे बढ़े नए रूस प्रतिबंध विधेयक के तहत राष्ट्रपति को ऐसे देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है, जो रूस के ऊर्जा कारोबार को जारी रखते हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने संसद को बुलाने पर क्या कहा?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सभी संसद के मेंबर्स के सामने स्पष्ट किया कि अन्य देशों के मुकाबले भारत और चीन सबसे बड़ा आयातक बना हुआ है और भारत दूसरे नंबर पर आता है। हाल ही में इस कानून को लाने का मकसद यूक्रेन पर हमले को लेकर रूसी सरकार पर भारी आर्थिक दबाव डालना है।
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रूस के साथ ईरान पर भी निशाना
हाउस मेंबर्स के संग इस मीटिंग में डोनाल्ड ट्रंप ने कानून में बदलाव लाने की भी राय दी जिसमें उन्होंने ईरान को भी लपेटे में लेते हुए टैरिफ लगाने की बात की। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने अपनी शर्तें बताईं जिनसे बिल के आगे बढ़ने में देरी हो सकती है। हालांकि संसद में उपस्थित कुछ लोगों ने इस बात का विरोध किया। डोनाल्ड ट्रंप ने साफ़ चेतावनी दी कि इन उपायों से देश में आयात की लागत काफी बढ़ सकती है और कुछ ने संकेत दिया है कि वे इस कदम का विरोध करेंगे।
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भारत को क्यों लग सकता है झटका ?
अगर अमेरिका भारत पर 100% टैरिफ लागू करता है, तो इसका असर सिर्फ रूस से तेल खरीद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत के निर्यात, ऊर्जा सुरक्षा और अमेरिका के साथ व्यापारिक रिश्तों पर भी पड़ सकता है।
- अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का अमेरिका को निर्यात लगभग 87 अरब डॉलर रहा। ऐसे में अतिरिक्त टैरिफ लागू होने पर भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में महंगे हो जाएंगे, जिससे निर्यात प्रभावित हो सकता है।
- भारत अपनी करीब 85% कच्चे तेल की जरूरत आयात के जरिए पूरी करता है। रूस फिलहाल भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता है और कई महीनों से भारत के कुल कच्चे तेल आयात में करीब 35-40% हिस्सेदारी रूसी तेल की रही है। सस्ता रूसी तेल भारत को ईंधन की कीमतें नियंत्रित रखने में मदद करता है।
- यदि भारत रूसी तेल खरीद कम करता है, तो उसे महंगे विकल्पों से तेल खरीदना पड़ सकता है। इससे पेट्रोल-डीजल की लागत, महंगाई और आयात बिल बढ़ने की आशंका रहेगी।
- प्रस्तावित अमेरिकी विधेयक अभी कानून नहीं बना है, लेकिन यदि यह लागू होता है तो यह भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता और दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों पर भी दबाव बढ़ा सकता है।





