जापान के कुमामोटो शहर में कुदरत का ऐसा कहर बरसता नजर आया जिसमें जमीन से लेकर आसमान दोनों को भयंकर रूप से हिला दिया। जापान में मंगलवार को एक बार फिर धरती जोरदार तरीके से कांप उठी। देश के दक्षिण-पश्चिमी इलाके को भूकंप के झटकों ने ग्रस्त कर दिया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक दक्षिणी मुख्य द्वीप क्यूशू पर सुनामी आने की चेतावनी भी दी जा रही है। बताया जा रहा है कि भूकंप समुद्र की सतह से 10 किलोमीटर (6 मील) की गहराई पर आया था। शाम के 4:30 बजे लोगों को भूकंप के झटके महसूस हुए जिसके कारण सभी अपने घरों से बाहर आ गए।
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कुमामोटो शहर जापान के मुख्य शहर टोक्यो से 900 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। अमेरिकी पैसिफिक सुनामी वॉर्निंग सेंटर ने कहा कि स्थानीय तटों से आगे सुनामी का कोई खतरा नहीं है। लेकिन सरकार ने कुमामोतो सहित नागासाकी, कागोशिमा, फुकुओका, सागा, ओइता और मियाजाकी प्रान्तों में आपातकालीन चेतावनी दी है। राहत की बात यह है कि अभी तक किसी प्रकार के बड़े नुकसान की खबर नहीं मिली है।
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सुनामी की चेतावनी के बाद हाई अलर्ट
भूकंप के तुरंत बाद जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने तटीय क्षेत्रों के लिए सुनामी एडवाइजरी जारी की। एजेंसी ने कहा कि समुद्र में लहरों की ऊंचाई लगभग 1 मीटर तक पहुंच सकती है। हालांकि यह लहरें बड़ी सुनामी जितनी विनाशकारी नहीं मानी जा रही हैं, लेकिन समुद्र तटों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं।
तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई है। इस बीच चीन में धरती हिली है। चीन के चिंगहाई में 5.0 तीव्रता भूकंप दर्ज किया गया है। जापान की सरकार ने संबंधित एजेंसियों को पूरी स्थिति पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर तुरंत राहत कार्य शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
बता दें कि जापान एक ऐसा देश है जहां भूकंप सबसे ज्यादा आते है। जापान दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित देशों में से एक है, क्योंकि यह प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ (Pacific Ring of Fire) पर स्थित है।
लोगों को सुरक्षा पहुंचाने के लिए जापान जो सिस्टम का इस्तेमाल करता है वह दुनिया में सबसे बेहतर सिस्टम माना जाता है। भूकंप के झटके महसूस करते ही यह सिस्टम लाखों लोगों को एक ही समय पर जानकारी दे देता है। इसी सिस्टम ने क्यूशू द्वीप पर रहने वाले लोगों को पहले से ही चेतावनी दे दी है और कहा है कि आने वाले घंटों में स्थिति सवर सकती है।
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पहले भी मिले भूकंप के झटके
जापान के इतिहास का सबसे विनाशकारी भूकंप 11 मार्च 2011 को आया था, जिसकी तीव्रता 9.0 मापी गई थी। इस भूकंप के बाद आई भीषण सुनामी ने करीब 20,000 लोगों की जान ले ली और फुकुशिमा परमाणु संयंत्र में गंभीर परमाणु दुर्घटना हुई। इससे पहले 1995 में कोबे (ग्रेट हंशिन) भूकंप ने भी भारी तबाही मचाई थी, जिसमें 6,400 से अधिक लोगों की मौत हुई थी।





