ईरान में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा उसके सैन्य और सुरक्षा ढांचे में हुए बदलावों की है। अगस्त 2026 में सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने एक के बाद एक छह बड़े सैन्य पदों पर नियुक्तियां कीं। इन नियुक्तियों के जरिए सेना के जनरल स्टाफ से लेकर आईआरजीसी और बसीज तक की कमान में बदलाव हुआ।
ये नियुक्तियां ऐसे समय हुईं जब ईरान को अपने कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की मौत के बाद कमान का ढांचा दोबारा तैयार करना पड़ा। ईरानी सरकारी मीडिया और दूसरे अंतरराष्ट्रीय स्रोतों के मुताबिक, इन छह अधिकारियों को अलग-अलग लेकिन बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं।
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सबसे पहले नाम आता है अहमद वाहिदी
उन्हें आईआरजीसी यानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स का कमांडर बनाया गया है। आईआरजीसी ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य-सुरक्षा संस्थाओं में से एक है और इसकी भूमिका सिर्फ युद्ध तक सीमित नहीं है। वाहिदी पहले भी ईरान के सुरक्षा और सरकार से जुड़े कई बड़े पदों पर रह चुके हैं। उन्हें इस नियुक्ति के साथ मेजर जनरल के पद पर प्रमोट किया गया। यानी अब देश के सबसे महत्वपूर्ण सैन्य संगठनों में से एक की कमान सीधे उनके हाथ में है।
दूसरा बड़ा नाम अली अब्दोल्लाही का
उन्हें ईरान की सशस्त्र सेनाओं का चीफ ऑफ स्टाफ बनाया गया है। यह पद इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके जरिए देश की सैन्य व्यवस्था के अलग-अलग हिस्सों के बीच तालमेल की जिम्मेदारी आती है। अब्दोल्लाही पहले से ही युद्ध के दौरान सैन्य जनरल स्टाफ के कामकाज में अहम भूमिका निभा रहे थे। नई जिम्मेदारी मिलने के बाद उनकी भूमिका और ऊपर चली गई है। उनके डिप्टी के तौर पर क्यूमर हेदरी को नियुक्त किया गया है।
तीसरा बड़ा नाम क्यूमर हेदरी का
क्यूमर हेदरी ईरान की नियमित सेना यानी आर्टेश से जुड़े वरिष्ठ कमांडर हैं। वह इससे पहले सेना की ग्राउंड फोर्सेज की कमान संभाल चुके हैं। अब उन्हें सशस्त्र सेनाओं के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ की जिम्मेदारी दी गई है। इसका मतलब है कि ईरान की नियमित सेना से जुड़े अनुभव को भी नए सैन्य ढांचे में जगह दी गई है। अली अब्दोल्लाही के साथ मिलकर वह सैन्य कमान और सुरक्षा तैयारियों से जुड़े काम देखेंगे।
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चौथा चेहरा मुस्तफा इजादी का
उन्हें आईआरजीसी का डिप्टी कमांडर बनाया गया है। इजादी ईरान के सैन्य और सुरक्षा तंत्र में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं और कई वरिष्ठ पद संभाल चुके हैं। अब वह अहमद वाहिदी के साथ आईआरजीसी की कमान में काम करेंगे। उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब ईरान अपने सैन्य ढांचे को दोबारा व्यवस्थित कर रहा है। इसलिए आईआरजीसी के भीतर उनकी जिम्मेदारी काफी अहम मानी जा रही है।
पांचवां नाम अली ओजमाई का
उन्हें आईआरजीसी की नौसेना का कमांडर बनाया गया है। यह पद इसलिए खास है क्योंकि आईआरजीसी नौसेना की जिम्मेदारी फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे बेहद संवेदनशील समुद्री इलाकों में रहती है। दुनिया के लिए भी यह इलाका रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां से बड़ी मात्रा में तेल का कारोबार होता है। ओजमाई को ऐसे समय में यह जिम्मेदारी मिली है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के कारण होर्मुज को लेकर लगातार चर्चा बनी हुई है।
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छठा नाम हुसैन ताएब का
उन्हें बसीज फोर्स का प्रमुख बनाया गया है। बसीज आईआरजीसी से जुड़ा स्वयंसेवी अर्धसैनिक संगठन है, जिसकी भूमिका ईरान की आंतरिक सुरक्षा और देश के भीतर सरकार के समर्थन वाले नेटवर्क में भी रही है। ताएब इससे पहले आईआरजीसी के खुफिया संगठन के प्रमुख रह चुके हैं। इसलिए सुरक्षा तंत्र में उनका अनुभव काफी पुराना है। बसीज की कमान मिलने के बाद उनकी भूमिका सिर्फ सैन्य गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि घरेलू सुरक्षा से जुड़े मामलों में भी अहम हो सकती है।
इन छह नामों के अलावा मोहसिन रेजाई की नियुक्ति भी ध्यान खींचती है। रेजाई लंबे समय तक आईआरजीसी के कमांडर रह चुके हैं। उन्हें सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का सचिव बनाया गया है। यह संस्था ईरान की सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े बड़े मामलों में समन्वय का काम करती है और इसकी अध्यक्षता राष्ट्रपति करते हैं।
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असल तस्वीर यह है कि ईरान में इस समय सैन्य और सुरक्षा तंत्र के पुराने अनुभवी चेहरों को एक साथ महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। अली अब्दोल्लाही सेना के शीर्ष ढांचे में हैं, अहमद वाहिदी आईआरजीसी की कमान संभाल रहे हैं, अली ओजमाई आईआरजीसी की नौसेना देख रहे हैं, क्यूमर हेदरी सेना के जनरल स्टाफ में अहम पद पर हैं, मुस्तफा इजादी IRGC के डिप्टी कमांडर हैं और हुसैन ताएब बसीज की कमान संभाल रहे हैं।





