इमरान खान को दिए थे 50 करोड़, फिर उन्हीं ने भिजवाया जेल; कैसे जिगरी दोस्त बने कट्टर दुश्मन?

पाकिस्तान की राजनीति में दोस्ती और दुश्मनी के रिश्ते अक्सर तेजी से बदलते रहे हैं। इमरान खान की राजनीतिक यात्रा में भी ऐसे कई नाम रहे, जो कभी उनके बेहद करीब थे, लेकिन बाद में विरोधी बन गए।

Palak Gupta

18 अगस्त 2026

1 min read
इमरान खान को दिए थे 50 करोड़, फिर उन्हीं ने भिजवाया जेल; कैसे जिगरी दोस्त बने कट्टर दुश्मन?

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को आज देश की राजनीति में सबसे बड़े और सबसे विवादित चेहरों में गिना जाता है। 1992 में पाकिस्तान को वर्ल्ड कप जिताने वाले इमरान खान के लोकप्रियता पूरे देश में थी। राजनीति में आने से पहले उनकी पहचान एक शानदार क्रिकेटर के रूप में थी।

शौकत खानम हॉस्पिटल बना रिश्ते का अहम हिस्सा

पाकिस्तान की राजनीति में आज नवाज शरीफ और इमरान खान एक-दूसरे के सबसे बड़े राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी माने जाते हैं। इमरान खान के सबसे बड़े सामाजिक प्रोजेक्ट्स में से एक शौकत खानम कैंसर अस्पताल को खड़ा करने में नवाज शरीफ का भी समर्थन मिला था।

शौकत खानम अस्पताल की कहानी इमरान खान की मां शौकत खानम से जुड़ी है। इमरान खान ने अपनी मां शौकत खानम की कैंसर से मौत के बाद पाकिस्तान में एक ऐसा अस्पताल बनाने का फैसला किया था जहां गरीब मरीजों को भी इलाज मिल सके। इस दौर में नवाज शरीफ का नाम भी प्रोजेक्ट से जुड़ता है। यही वजह है कि आज दोनों नेताओं की दुश्मनी को देखकर पुरानी कहानी काफी खराब लगती है।

1985 में शौकत खानम की कैंसर से मौत हो गई थी और इस घटना का इमरान खान पर गहरा असर पड़ा और उन्हें पाकिस्तान में ऐसा कैंसर अस्पताल बनाने का फैसला किया जिसके लिए उन्हें लंबे समय तक फंडरेजिंग भी करनी पड़ी। अस्पताल के आधिकारिक इतिहास के मुताबिक इसके लिए आम लोगों से लेकर बड़े दाताओं तक ने योगदान दिया और लाखों लोगों ने इस कैंप में हिस्सा लिया।

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अस्पाताल के सपने में नवाज शरीफ का भी मिला साथ

इमरान खान के इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा था और इसी दौरान नवाज शरीफ थे, जो समय पाकिस्तान की राजनीति में एक बड़े नाम थे, वह इस प्रोजेक्ट से जुड़े थे। इसी दौर को लेकर आज यह दावा भी चर्चा में रहता है कि नवाज शरीफ ने शौकत खानम अस्पताल के लिए करीब 50 करोड़ रुपये की मदद की थी। हालांकि रकम की किसी प्रकार की आधिकारिक पुष्टि नहीं है, इसलिए इसे रिपोर्ट करते समय इसे दावा या इमरान खान से जूडी रिपोर्ट की गई बात के तौर पर देखना ज्यादा सही होगा। ऐतिहासिक रिपोर्टों के मुताबिक नवाज़ शरीफ़ ने अस्पताल के लिए जमीन उपलब्ध कराने में मदद की थी और 1990 में अस्पताल के शिलान्यास समारोह में भी शामिल हुए थे।

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अस्पताल बनने के बाद इमरान खान की जिंदगी धीरे-धीरे एक नए मोड़ पर पहुंच गई जहां उन्होनें सामाजिक कार्य के बाद राजनीति में कदम रखा। पाकिस्तान की राजनीति में नवाज शरीफ पहले से ही एक बड़ा नाम थे, दूसरी तरफ इमरान खान, धीरे-धीरे युवा और मध्यम वर्ग के मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत कर रहे थे।

1996 में उन्होंने अपनी राजनीतिक पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ यानी पीटीआई बनाई. शुरुआत में उनकी पार्टी को ज्यादा राजनीतिक सफलता नहीं मिली लेकिन इमरान को लगा भ्रष्टाचार और पारंपरिक राजनीतिक दलों के खिलाफ आवाज उथाते रहे। इमरान खान ने नवाज शरीफ और उनकी पार्टी पर भ्रष्टाचार और पारिवारिक राजनीति को लेकर सवाल उठाए।

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राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता ने बदल दिया पूरा रिश्ता

धीरे-धीरे दोनों के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा इतनी बढ़ गई कि पुराना सहयोग पीछे ही छूट गया। इमरान खान की पीटीआई पाकिस्तान में एक बड़ी राजनीतिक ताकत बन गई और 2018 के चुनाव के बाद इमरान खान प्रधानमंत्री बन गए। नवाज शरीफ और इमरान खान की कहानी पाकिस्तान की राजनीति को दिखाती है जहां पुराने व्यक्तिगत संबंधों के अलावा सत्ता की लड़ाई ने रिश्तों को पूरी तरह से बदल दिया।

यही वजह है कि आज जब नवाज शरीफ और इमरान खान का नाम एक साथ लिया जाता है तो लोगों को सबसे पहले उनकी पुरानी नफरत नहीं बल्कि उनकी लंबी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता याद आती है। इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं और उनके खिलाफ कई मामले में सजा हुई है और इमरान इन मामले में खुद को राजनीतिक लक्ष्य बता रहे हैं। यानी जिस पाकिस्तान में कभी नवाज शरीफ और इमरान खान अपने सामाजिक काम के लिए एक मंच पर नजर आए, उसी देश की राजनीति ने कुछ सालों में दोनों को एक दूसरे का कट्टर विरोधी बना दिया।

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Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate,…और पढ़ें
Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate, credible, and reader-centric reporting, driven by a commitment to ethical journalism and continuous professional growth.