नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का वार्षिक विजयादशमी उत्सव मंगलवार, 20 अक्टूबर को आयोजित किया गया। संघ के रेशिमबाग मैदान में हुए इस कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक शस्त्र पूजन से हुई। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने विधि-विधान के साथ शस्त्र पूजन किया। इस साल का आयोजन इसलिए भी खास रहा, क्योंकि इसके साथ ही संघ के शताब्दी वर्ष के समापन का अवसर जुड़ा हुआ है।
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कार्यक्रम में स्वयंसेवक पारंपरिक गणवेश में शामिल हुए। आयोजन के दौरान संघ की स्थापना, उसकी अब तक की यात्रा और आगे की दिशा को लेकर भी लोगों की नजरें टिकी रहीं। शस्त्र पूजन के बाद मोहन भागवत ने स्वयंसेवकों को संबोधित किया।
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शताब्दी वर्ष के समापन पर विशेष आयोजन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना वर्ष 1925 में नागपुर में हुई थी। विजयादशमी का दिन संगठन के लिए स्थापना दिवस के रूप में भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस वर्ष का उत्सव संघ की सौ साल की यात्रा के बाद 101वें वर्ष में प्रवेश के मौके पर आयोजित हुआ।
रेशिमबाग मैदान संघ के प्रमुख कार्यक्रमों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। विजयादशमी के मौके पर यहां स्वयंसेवक एकत्र होते हैं और परंपरागत कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं। इस आयोजन में शस्त्र पूजन के साथ अनुशासन, संगठनात्मक एकजुटता और सांस्कृतिक परंपराओं को भी प्रमुखता दी जाती है।
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मोहन भागवत ने किया पारंपरिक शस्त्र पूजन
विजयादशमी उत्सव के दौरान मोहन भागवत ने पारंपरिक शस्त्र पूजन किया। संघ में इस रस्म को शक्ति, अनुशासन और कर्तव्य के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है। आयोजन में पारंपरिक शस्त्रों को प्रदर्शित किया गया। शस्त्र पूजन संघ के वार्षिक विजयादशमी कार्यक्रम का अहम हिस्सा है।

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इस साल के कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार और दैनिक जागरण के प्रधान संपादक संजय गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और इजराइल के मुंबई स्थित कॉन्सुल जनरल यानिव रेवाच को भी आमंत्रित किया गया था। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी की भी खबरें सामने आईं।
कार्यक्रम में इन हस्तियों की मौजूदगी ने आयोजन को अतिरिक्त महत्व दिया। संघ के शताब्दी वर्ष के समापन के मौके पर आयोजित इस समारोह पर राजनीतिक, सामाजिक और संगठनात्मक क्षेत्रों की नजर रही।
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विजयादशमी उत्सव में शस्त्र पूजन के बाद संघ प्रमुख मोहन भागवत का संबोधन कार्यक्रम का प्रमुख हिस्सा रहा। संघ के वार्षिक संबोधन में आमतौर पर संगठन की प्राथमिकताओं, सामाजिक मुद्दों, राष्ट्रीय परिस्थितियों और भविष्य की योजनाओं पर विचार रखे जाते हैं।
इस बार भी उनके भाषण पर विशेष ध्यान रहा, क्योंकि संघ अपने शताब्दी वर्ष के बाद नए चरण में प्रवेश कर रहा है। ऐसे में संगठन की आगे की कार्ययोजना और सामाजिक गतिविधियों को लेकर उनके विचार महत्वपूर्ण माने गए।





