राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे को CJI सूर्यकांत ने मुलाकात का समय देने से किया इनकार

कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने मुलाकात का समय देने से इनकार कर दिया है। दोनों नेताओं ने 12 अक्टूबर को शाम 4 से 5 बजे के बीच मुलाकात के लिए समय मांगा था। वे कथित वोट चोरी, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे समेत कई मुद्दों पर ज्ञापन सौंपना चाहते थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीजेआई ने स्पष्ट किया कि इन मुद्दों से जुड़े मामले सुप्रीम कोर्ट में पहले से विचाराधीन हैं।

Palak Gupta

12 अक्टूबर 2026

1 min read
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे को CJI सूर्यकांत ने मुलाकात का समय देने से किया इनकार

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार, 12 अक्टूबर को भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत से मुलाकात के लिए शाम 4 से 5 बजे के बीच का समय मांगा था। दोनों नेता चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदान प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखना चाहते थे।

विपक्ष इन मुद्दों को लेकर अपनी चिंताएं मुख्य न्यायाधीश के सामने रखना चाहता था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, CJI ने बताया कि इन विषयों से संबंधित मामले पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। ऐसे में अलग से मुलाकात करने के बजाय संबंधित पक्षों को अपनी बात रखने के लिए न्यायिक प्रक्रिया अपनानी चाहिए।

इस फैसले के बाद चुनावी प्रक्रिया और SIR को लेकर विपक्ष की मांगों पर सबकी नजर है। अब इन मुद्दों पर आगे की कानूनी कार्रवाई अदालत में दायर याचिकाओं और सुनवाई के आधार पर तय होगी।

आखिर राहुल गांधी और खड़गे CJI से क्यों मिलना चाहते थे?

राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की मुलाकात की मांग ऐसे समय आई, जब विपक्ष चुनाव आयोग की भूमिका और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान कई योग्य मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका है। विपक्षी दल इसे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़ा गंभीर मामला बता रहे हैं।

दोनों नेताओं की योजना मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपकर इन चिंताओं से अवगत कराने की थी। उनकी प्रमुख मांगों में कथित ‘वोट चोरी’ पर कार्रवाई, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और एसआईआर की प्रक्रिया पर रोक लगाने जैसे मुद्दे शामिल थे। इसके अलावा विपक्ष मतपत्रों के जरिए मतदान की व्यवस्था दोबारा लागू करने की मांग भी उठा रहा है।

कांग्रेस नेताओं का मानना है कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों पर संवैधानिक संस्थाओं को ध्यान देना चाहिए। इसी सिलसिले में वे CJI के सामने अपनी बात रखना चाहते थे। लेकिन मुलाकात की अनुमति नहीं मिलने के बाद अब इन मुद्दों को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें अदालत की निर्धारित प्रक्रिया का सहारा लेना होगा।

यह भी पढ़ें: CJP प्रदर्शन के बीच दिल्ली में हाई अलर्ट, गुरुग्राम में YouTuber ध्रुव राठी को हिरासत में लेने की खबर

CJI सूर्यकांत ने मुलाकात से इनकार क्यों किया?

मुख्य न्यायाधीश के फैसले की सबसे अहम वजह न्यायिक मर्यादा बताई गई है। उपलब्ध रिपोर्ट्स के मुताबिक, CJI कार्यालय की ओर से ईमेल के जरिए दोनों नेताओं को जवाब दिया गया। इसमें कहा गया कि जिन विषयों को वे उठाना चाहते हैं, उनसे संबंधित मामले पहले से सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं।

यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। मुख्य न्यायाधीश की भूमिका केवल प्रशासनिक कामकाज तक सीमित नहीं है। वे अदालत में मामलों की सुनवाई और फैसले की न्यायिक प्रक्रिया का भी हिस्सा होते हैं। जब कोई विवाद पहले से अदालत के सामने हो, तब उससे जुड़े पक्षों के साथ अलग से मुलाकात करने पर निष्पक्षता और न्यायिक मर्यादा को लेकर सवाल उठ सकते हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, CJI ने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट प्रशासनिक स्तर पर सरकार या चुनाव आयोग के कामकाज में हस्तक्षेप करने के लिए नहीं बना है। अदालत का काम कानून और संविधान के आधार पर उसके सामने लाए गए मामलों पर सुनवाई करना है। इसलिए अगर किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल को लगता है कि उसके अधिकारों का उल्लंघन हुआ है, तो वह याचिका दाखिल कर सकता है और अदालत उस पर कानूनी प्रक्रिया के तहत विचार कर सकती है।

SIR को लेकर क्या है विपक्ष की आपत्ति?

SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन मतदाता सूची की विशेष गहन जांच और संशोधन की प्रक्रिया है। इसके तहत मतदाता सूची में दर्ज नामों और संबंधित जानकारियों का सत्यापन किया जाता है, ताकि सूची को अपडेट किया जा सके।

यह भी पढ़ें: 9 अक्टूबर की बड़ी खबरें: देश-दुनिया, राजनीति, खेल और मनोरंजन की हर अहम अपडेट

विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान कई जगह योग्य मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका है। उनका कहना है कि यदि किसी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से गलत तरीके से हटता है, तो इससे उसके मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है।

दूसरी ओर, चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी ने मतदाता सूची में जानबूझकर गड़बड़ी किए जाने के आरोपों को खारिज किया है। बता दें कि मतदाता सूची में बदलाव के पीछे मृत्यु, स्थायी रूप से दूसरी जगह चले जाने या सत्यापन के दौरान मतदाता का पता नहीं चलने जैसे कारण भी हो सकते हैं। इसलिए किसी नाम के हटने को अपने आप में चुनावी गड़बड़ी का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

विपक्ष की चिंताओं में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी शामिल है। विपक्षी दल चाहते हैं कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाली चयन समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश को भी शामिल किया जाए।

मौजूदा कानून के तहत चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री की ओर से नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में संसद की ओर से कानून बनाए जाने तक एक अंतरिम व्यवस्था तय की थी, जिसमें CJI भी चयन समिति का हिस्सा थे। बाद में संसद ने नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर कानून बनाया, जिसमें मुख्य न्यायाधीश को समिति में शामिल नहीं किया गया।

यह भी पढ़ें: आज का न्यूज़ राउंडअप: 10 अक्टूबर की बड़ी घटनाएं और दिनभर की अहम सुर्खियां

विपक्ष का तर्क है कि चुनाव आयोग जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थान की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए नियुक्ति प्रक्रिया में संतुलन और पारदर्शिता जरूरी है। हालांकि, इस मुद्दे पर कानूनी स्थिति और मौजूदा कानून की वैधता का फैसला अदालत में चल रही कार्यवाही के आधार पर ही होगा।

राहुल गांधी और खड़गे की मुलाकात की मांग खारिज होने के बावजूद विपक्ष ने अपना अभियान रोकने का संकेत नहीं दिया। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने 12 अक्टूबर को ‘मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ के तहत सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने की योजना बनाई थी।

दिल्ली में इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन और राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हुई है। विपक्ष ने पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने पर सवाल उठाए हैं। वहीं, प्रशासन की ओर से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कदम उठाए गए हैं। इस घटनाक्रम ने चुनावी प्रक्रिया और विरोध प्रदर्शन के अधिकार को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

इसके अलावा CJI सूर्यकांत की ओर से मुलाकात से इनकार विपक्ष के लिए उसके तय कार्यक्रम के लिहाज से झटका जरूर है, लेकिन इसे कानूनी रास्ता बंद होना नहीं माना जा सकता। मुख्य न्यायाधीश ने संबंधित मुद्दों पर अपनी बात रखने के लिए अदालत की प्रक्रिया अपनाने का विकल्प दिया है।

Palak Gupta
लेखक परिचय
Palak Gupta
Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate,…और पढ़ें
Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate, credible, and reader-centric reporting, driven by a commitment to ethical journalism and continuous professional growth.

Leave a Comment