जम्मू-कश्मीर सरकार ने कश्मीर में कश्मीरी प्रवासियों के लिए बनाए गए ट्रांजिट आवासों को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। सरकार ने राहत संगठन में तैनात तहसीलदार (मुख्यालय) कुणाल शर्मा को इन आवासों के लिए एस्टेट ऑफिसर नियुक्त किया है। यह जिम्मेदारी उन्हें कश्मीर प्रांत में बनाए गए सभी ट्रांजिट आवासों के लिए दी गई है।
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अनधिकृत कब्जे पर होगी कार्रवाई
सरकारी आदेश के मुताबिक, एस्टेट ऑफिसर को ट्रांजिट आवासों से जुड़े मामलों में कानूनी कार्रवाई करने का अधिकार होगा। इसका मकसद ऐसे लोगों की पहचान करना है जो बिना वैध अनुमति के सरकारी आवास में रह रहे हैं या जिनकी आवंटन अवधि खत्म होने के बाद भी उन्होंने आवास खाली नहीं किया है।
कुणाल शर्मा जरूरत पड़ने पर ऐसे मामलों में नोटिस जारी करने और नियमों के तहत परिसर खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर सकेंगे। यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर सार्वजनिक परिसर अधिनियम और उसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार होगी।
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6 हजार ट्रांजिट आवास बनाने की योजना
कश्मीरी प्रवासी कर्मचारियों के लिए प्रधानमंत्री विकास पैकेज के तहत कश्मीर घाटी में अलग-अलग जगहों पर ट्रांजिट आवास बनाए जा रहे हैं। सरकार ने 20 स्थानों पर कुल 6,000 आवास इकाइयों के निर्माण को मंजूरी दी है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 तक इनमें से 4,112 इकाइयों का निर्माण पूरा हो चुका था और 3,257 आवास कर्मचारियों को आवंटित किए जा चुके थे। इन आवासों का मकसद कश्मीर घाटी में काम कर रहे कश्मीरी प्रवासी कर्मचारियों को रहने की सुविधा देना है।
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आवंटन और कब्जे को लेकर उठे सवाल
रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ ट्रांजिट आवासों के इस्तेमाल और आवंटन को लेकर शिकायतें सामने आई थीं। आरोप है कि कुछ परिवार पहले से दूसरे सरकारी ट्रांजिट आवासों में रह रहे थे और बाद में उन्हें नई इकाइयां भी मिल गईं। इससे दूसरे पात्र कर्मचारियों को आवास मिलने में परेशानी की बात सामने आई।
सरकार की ओर से एस्टेट ऑफिसर की नियुक्ति का एक उद्देश्य आवासों के इस्तेमाल और आवंटन को नियमों के मुताबिक रखना भी है। इससे यह तय करने में मदद मिलेगी कि सरकारी आवास उन्हीं कर्मचारियों को मिलें जो इसके लिए पात्र हैं।
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पुराने आदेश की जगह नया फैसला
कुणाल शर्मा की नियुक्ति को लेकर नया आदेश 6 अक्टूबर 2026 को जारी किया गया। इस आदेश ने मार्च 2026 में जारी किए गए पहले आदेश को बदल दिया है। अब ट्रांजिट आवासों से जुड़े मामलों में एस्टेट ऑफिसर के तौर पर कुणाल शर्मा जिम्मेदारी संभालेंगे।
सरकार का यह फैसला कश्मीरी प्रवासी कर्मचारियों के लिए बनाए गए आवासों के सही इस्तेमाल और उनके आवंटन की व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में अनधिकृत कब्जे और आवंटन से जुड़ी शिकायतों पर इसी व्यवस्था के तहत कार्रवाई की जा सकेगी।





