बर्फीले ग्रीनलैंड में अमेरिका की बढ़ेगी सैन्य ताकत, ट्रंप ने डेनमार्क-ग्रीनलैंड से किया बड़ा समझौता

अमेरिका ने ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं ने न्यूयॉर्क में एक नए सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। समझौते के तहत अमेरिका को ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ाने और नए डिफेंस एरिया स्थापित करने की अनुमति मिलेगी।

Palak Gupta

23 सितम्बर 2026

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बर्फीले ग्रीनलैंड में अमेरिका की बढ़ेगी सैन्य ताकत, ट्रंप ने डेनमार्क-ग्रीनलैंड से किया बड़ा समझौता

अमेरिका ने ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन और ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नील्सन ने 22 सितंबर को न्यूयॉर्क में एक नए सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत अमेरिका ग्रीनलैंड में दो नए डिफेंस एरिया स्थापित कर सकेगा। इसके साथ ही वहां मौजूद पिटुफिक स्पेस बेस को भी आधुनिक बनाने और उसका विस्तार करने की अनुमति दी गई है।

दक्षिण और पूर्वी ग्रीनलैंड में बनेंगे नए मिलिट्री बेस

समझौते के तहत अमेरिका को दक्षिणी ग्रीनलैंड के नार्सारसुआक (Narsarsuaq) और पूर्वी ग्रीनलैंड के मेस्टर्सविग (Mestersvig) में नए डिफेंस एरिया स्थापित करने की अनुमति मिली है। नार्सारसुआक में पहले अमेरिकी सैन्य अड्डा मौजूद था, जिसे 1950 के दशक में बंद कर दिया गया था। वहीं मेस्टर्सविग में फिलहाल डेनमार्क की सैन्य गतिविधियां होती हैं।

इसके अलावा उत्तर-पश्चिमी ग्रीनलैंड में मौजूद पिटुफिक स्पेस बेस में अमेरिका अपनी गतिविधियों को आधुनिक और विस्तारित कर सकेगा। समझौते में भविष्य में जरूरत के मुताबिक ग्रीनलैंड में अतिरिक्त डिफेंस एरिया बनाने का रास्ता भी रखा गया है।

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अमेरिका को ग्रीनलैंड में मिलेगी व्यापक सैन्य पहुंच

समझौते के मुताबिक अमेरिकी सैन्य विमान ग्रीनलैंड के किसी भी क्षेत्र में उड़ान भरने और उतरने में सक्षम होंगे। अमेरिकी सार्वजनिक जहाजों को ग्रीनलैंड के क्षेत्रीय जल में समुद्र के भीतर आवाजाही की सुविधा भी दी गई है। हालांकि इन अधिकारों का इस्तेमाल ग्रीनलैंड के स्थानीय समाज और वहां की पारंपरिक गतिविधियों का सम्मान करते हुए करने की बात समझौते में कही गई है।

समझौते का एक अहम हिस्सा यह भी है कि NATO का सदस्य नहीं होने वाला कोई देश ग्रीनलैंड में अपना सैन्य ठिकाना या स्थायी सैन्य मौजूदगी स्थापित नहीं कर सकेगा, जब तक तीनों पक्ष इसकी अनुमति न दें। संवेदनशील क्षेत्रों में गैर-NATO देशों के निवेश पर भी सुरक्षा संबंधी प्रतिबंध लगाए गए हैं।

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ट्रंप लंबे समय से ग्रीनलैंड पर जताते रहे हैं दिलचस्पी

ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप और डेनमार्क के बीच पिछले कई महीनों से तनाव रहा है। ट्रंप ने पहले अमेरिका के लिए ग्रीनलैंड के रणनीतिक महत्व का हवाला देते हुए इस द्वीप पर अमेरिकी नियंत्रण की बात कही थी। ग्रीनलैंड डेनमार्क के अधीन एक स्वशासी क्षेत्र है और उसकी अपनी सरकार है।

नए समझौते में ग्रीनलैंड और डेनमार्क की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की पुष्टि की गई है। यानी इस समझौते से ग्रीनलैंड अमेरिका का हिस्सा नहीं बनता, बल्कि अमेरिका को वहां अपनी सैन्य और सुरक्षा गतिविधियां बढ़ाने की अनुमति मिलती है।

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रूस और चीन की मौजूदगी को रोकने पर भी जोर

समझौते के पीछे आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा भी एक अहम वजह है। दस्तावेज में आर्कटिक और हाई नॉर्थ में बढ़ती सैन्य गतिविधियों को सुरक्षा चुनौती बताया गया है और NATO की भूमिका मजबूत करने की बात कही गई है।

समझौते में गैर-NATO देशों को ग्रीनलैंड में सैन्य मौजूदगी स्थापित करने से रोकने के साथ कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में उनके निवेश को भी सीमित किया गया है। इससे अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड की ओर से आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग बढ़ाने की दिशा साफ होती है।

यह समझौता अस्थायी व्यवस्था नहीं है। दस्तावेज के मुताबिक इसकी कोई तय समाप्ति तिथि नहीं है और इसमें बदलाव आपसी सहमति से ही किया जा सकेगा। ग्रीनलैंड भविष्य में स्वतंत्र होने का फैसला करता है, तब भी समझौते में उसके NATO से जुड़े रहने और मौजूदा दायित्वों को स्वीकार करने का प्रावधान रखा गया है।

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Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate,…और पढ़ें
Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate, credible, and reader-centric reporting, driven by a commitment to ethical journalism and continuous professional growth.