जम्मू-कश्मीर में रोहिंग्याओं पर शिकंजा, सरकार ने शुरू की पहचान, बाहर भेजने की तैयारी

जम्मू-कश्मीर में रह रहे रोहिंग्याओं को लेकर सरकार की कार्रवाई एक बार फिर चर्चा में है। रोहिंग्या समुदाय के कई लोग म्यांमार में हिंसा और असुरक्षा के बाद भारत पहुंचे थे और जम्मू समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में रह रहे हैं। सरकार की ओर से अवैध रूप से भारत में रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान, दस्तावेजों की जांच और कानून के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया पहले से जारी रही है।

Palak Gupta

16 सितम्बर 2026

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जम्मू-कश्मीर में रोहिंग्याओं पर शिकंजा, सरकार ने शुरू की पहचान, बाहर भेजने की तैयारी

जम्मू-कश्मीर में रह रहे रोहिंग्या समुदाय के लोगों की पहचान को लेकर प्रशासन ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार की ओर से ऐसे लोगों का रिकॉर्ड जुटाया जा रहा है, जिनके पास भारत में रहने से जुड़े वैध दस्तावेज नहीं हैं। इस प्रक्रिया के बाद नियमों के तहत अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को देश से बाहर भेजने की कार्रवाई की जा सकती है।

यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब जम्मू क्षेत्र में रोहिंग्याओं की मौजूदगी को लेकर सुरक्षा, दस्तावेजों और स्थानीय संसाधनों से जुड़े सवाल लगातार उठते रहे हैं। हालांकि, किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई से पहले उसकी नागरिकता और दस्तावेजों की स्थिति की जांच जरूरी होगी।

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रोहिंग्याओं की पहचान का काम शुरू

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रशासन की ओर से जम्मू-कश्मीर में रह रहे रोहिंग्या लोगों की पहचान और उनके दस्तावेजों की जांच की जा रही है। इस प्रक्रिया में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि संबंधित व्यक्ति भारत में कब आया, उसके पास कौन-कौन से दस्तावेज हैं और वह किस कानूनी आधार पर यहां रह रहा है।

अधिकारियों की जांच का मुख्य उद्देश्य उन विदेशी नागरिकों की पहचान करना है, जो बिना वैध अनुमति के भारत में रह रहे हैं। प्रशासन की ओर से स्थानीय स्तर पर रिकॉर्ड जुटाने और संबंधित विभागों के साथ जानकारी साझा करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

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अवैध रूप से रह रहे लोगों पर होगी कार्रवाई

सरकार की नीति के अनुसार, भारत में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा सकती है। पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ऐसे लोगों को हिरासत में लेने, निर्धारित केंद्रों में रखने या उनके देश वापस भेजने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।

हालांकि, सभी रोहिंग्या लोगों को एक ही श्रेणी में रखना उचित नहीं होगा। किसी व्यक्ति की नागरिकता, शरणार्थी स्थिति और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच अलग-अलग आधार पर की जानी होगी। जिन लोगों के पास संयुक्त राष्ट्र या अन्य संस्थाओं से जुड़े पहचान-पत्र हैं, उनकी स्थिति भी संबंधित नियमों के तहत जांच का विषय हो सकती है।

जम्मू में पहले भी हो चुकी है कार्रवाई

जम्मू-कश्मीर में रोहिंग्या समुदाय को लेकर पहले भी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आ चुकी है। वर्ष 2021 में जम्मू में बड़ी संख्या में रोहिंग्याओं को हिरासत में लेकर उनकी पहचान और नागरिकता की जांच की गई थी। उस समय उन्हें म्यांमार वापस भेजे जाने की संभावना को लेकर भी चर्चा हुई थी।

रोहिंग्या समुदाय के लोगों का कहना है कि वे म्यांमार में हिंसा और असुरक्षा के कारण दूसरे देशों में शरण लेने को मजबूर हुए। वहीं, भारतीय अधिकारियों की ओर से अवैध प्रवास और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर जोर दिया जाता रहा है।

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सुरक्षा और मानवीय पहलुओं पर भी कड़ी नजर

जम्मू-कश्मीर में शुरू हुई पहचान प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा के साथ-साथ मानवीय पहलुओं पर भी ध्यान दिए जाने की जरूरत है। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई दस्तावेजों की जांच और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर हो। सरकार की ओर से पहचान और सत्यापन का काम आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके बाद यह स्पष्ट होगा कि कितने लोगों को अवैध प्रवासी माना जाता है और उनके खिलाफ किस तरह की कार्रवाई की जाती है।

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Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate,…और पढ़ें
Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate, credible, and reader-centric reporting, driven by a commitment to ethical journalism and continuous professional growth.