मानसून के बाद मौसम में बदलाव तबियत में भी बदलाव ला सकता है। कभी सर दर्द रहता है तो कभी नाक बंद हो जाती है और ध्यान न देने पर जब चीजें बिगड़ती है तो वह एक बड़ी बीमारी का रूप ले लेती है। ऐसी परिस्थिति में कभी-कभी हम सोचते हैं कि आम बात है, मौसम में बदलाव का कारण है और ध्यान नहीं देते। कभी ऐसा होता है कि बुखार, खांसी-जुकाम एक साथ लग जाता है और वायरल का संक्रमण खत्म भी हो जाता है लेकिन कई मामलों में संक्रमण खत्म होने के बाद सांस की नलियों में जलन और सूजन कुछ समय तक बनी रहती है, जिसकी वजह से खांसी धीरे-धीरे कम होती है।
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जब भी हमें वायरल होता है तो बुखार, इन्फेक्शन तो ठीक हो जाता है जिसमें बदन दर्द, थकान और बुखार तो दूर हो जाता है लेकिन खांसी सबसे आखिर में जाती है। कई एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर वायरल होने के बाद खांसी ठहरी रहे तो इसका मतलब यह नहीं कि इन्फेक्शन अभी भी है। दरअसल, वायरस जा चुका है बस कुछ समय के लिए सांस की नली संवेदनशील और जलन से प्रभावित हो जाती है।
सामान्य खांसी करीब 3 से 4 हफ्ते में ठीक हो सकती है, जबकि वायरल संक्रमण के बाद रहने वाली खांसी कुछ लोगों में इससे ज्यादा समय तक भी चल सकती है। अगर खांसी लगातार कम होने के बजाय बढ़ रही है, दोबारा बुखार आ गया है, सांस लेने में परेशानी हो रही है, सीने में दर्द है या खांसी के साथ खून आ रहा है तो इसे सामान्य मानकर घर पर इंतजार नहीं करना चाहिए।
ऐसे लक्षणों में जल्द ही डॉक्टर को दिखाना चाहिए खासकर कि उन लोगों को जिन्हें फेफड़ों या सांस की दिक्कत है। बता दें कि खांसी का एक पैटर्न होता है। अगर बीमारी खत्म होने के बाद भी कुछ दिनों या हफ्तों तक सूखी खांसी, गले में खराश या बार-बार खांसने की समस्या रहती है तो डॉक्टर्स इसे संक्रमण के बाद रहने वाली खांसी यानी पोस्ट-इन्फेक्शस कफ कहते हैं। यह खांसी आमतौर पर धीरे-धीरे कम होती जाती है। वहीं दूसरी ओर समय के साथ बढ़ने वाले कफ और सांस लेने में परेशानी को गंभीरता से लेना चाहिए।
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वायरल के बाद खांसी में कब रहें सतर्क?
| स्थिति | क्या समझें | क्या करें |
|---|---|---|
| 3-4 हफ्ते तक हल्की खांसी | संक्रमण के बाद रह सकती है | आराम करें और पर्याप्त पानी पिएं |
| खांसी धीरे-धीरे कम हो रही है | आमतौर पर सुधार का संकेत | निगरानी रखें |
| 3 हफ्ते से ज्यादा खांसी | लंबे समय से बनी खांसी | डॉक्टर से सलाह लें |
| खांसी बढ़ती जा रही है | सामान्य रिकवरी नहीं हो सकती | चिकित्सकीय जांच कराएं |
| दोबारा बुखार आना | संक्रमण या दूसरी समस्या की आशंका | डॉक्टर को दिखाएं |
| सांस लेने में परेशानी | गंभीर संकेत हो सकता है | तुरंत चिकित्सा सहायता लें |
| सीने में दर्द | नजरअंदाज न करें | जल्द डॉक्टर से संपर्क करें |
| खांसी में खून आना | गंभीर चेतावनी संकेत | तुरंत चिकित्सा सहायता लें |
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खांसी न जाने पर घर पर क्या करें?
वायरल के बाद होने वाली खांसी धीरे-धीरे कम हो रही है तो यह अच्छा संकेत है ऐसे में गरम पानी पीना और आराम करना ज्यादा मददगार हो सकता है। शहद-नींबू का गर्म पेय गले को राहत दे सकता है, हालांकि हर व्यक्ति में इसका असर एक जैसा नहीं होता। धूल, धुआं और तेज खुशबू जैसी चीजों से बचना भी फायदेमंद हो सकता है।
यह जानना जरूरी है कि अगर कफ दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है तो खुद डॉक्टर बनना नहीं चाहिए, बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के किसी प्रकार की एंटीबायोटिक शुरू करना सही नहीं है। ज्यादातर वायरल इन्फेक्शन में एंटीबायोटिक काम नहीं करते और इनकी जरूरत तभी होती है जब डॉक्टर को बैक्टीरियल इन्फेक्शन की आशंका हो।
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कब ज्यादा सावधानी जरूरी है?
वायरल एक ऐसा इन्फेक्शन है जो शरीर को अंदर से पूरा तोड़ देता है ऐसे में बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में सांस से जुड़ी बीमारी को लेकर ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। इसके अलावा जिन लोगों को पहले से ही अस्थमा, दिल या फेफड़ों की बीमारी है उन्हें वायरल होने के बाद वाली खांसी को वायरल न मानें बल्कि अच्छे डॉक्टर से सलाह लें।
कई बार बीमारी खत्म होने के बाद भी सांस की नलियां सामान्य होने में समय लेती हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि खांसी धीरे-धीरे कम होनी चाहिए। अगर तीन हफ्ते से ज्यादा समय तक खांसी बनी रहती है, लगातार बढ़ती है या उसके साथ सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, खून आना या दोबारा बुखार जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।





