11,000 करोड़ रुपये के कथित निवेश घोटाले ने जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। करोड़ों रूपये कमाने की लालसा में और कथित तौर पर लोगों से बड़ी रकम जुटाने और फिर उसे हड़पने के मामले में आरोपी समीर अग्रवाल का नाम सामने आया है। जांच एजेंसियों ने समीर के खिलाफ कई सबूतों को देखते हुए कहा है कि इस घोटाले के पिछले सिर्फ समीर ही नहीं बल्कि एक बड़ी टीम है।
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यहां तक कि घोटाले का यह मामला भारत तक सीमित नहीं बल्कि विदेश भी पहुंच गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत से फरार समीर अग्रवाल को वापस लाने के लिए मध्य प्रदेश पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां कानूनी प्रक्रिया और प्रत्यर्पण की तैयारियों पर काम कर रही हैं।
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आखिर क्या है पूरा मामला ?
जांच एजेंसियों के अनुसार यह घोटाले का खेल 2009 से चलता आ रहा है जिसमें सबसे बड़ा हाथ मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से ताल्लुक रखने वाला समीर अग्रवाल बाद में इंदौर आया था। इसके बाद उसने 2009 में ‘एंडवाजेट ट्रेड’ के जरिए निवेश से जुड़ा कारोबार शुरू किया। इसके बाद ‘ऑप्शन वन इंडस्ट्रीज’ और सागा ग्रुप सहित कई कंपनियों के जरिए निवेश योजनाओं का विस्तार किया गया। जांच से जुड़े दावों के अनुसार, इस नेटवर्क में करीब 10 चिट फंड कंपनियां शामिल थीं।
इन कंपनियों की चपेट में अभी तक 17 राज्य आ चुके थे जिसमें इन्होंने पूरे 11,000 करोड़ रुपये की धोकेबाजी की वहीं अगर मध्य प्रदेश की बात करें तो सिर्फ इस शहर में ही इन्होंने 500 करोड़ का घपला किया है। बता दें कि समीर ने 2012 में उसने ऑप्शन वन इंडस्ट्रीज नाम की दूसरी कंपनी बनाई।
आगे की कार्रवाई में पता चला कि समीर अग्रवाल 2019-20 के दौरान विदेश जाकर रहने लगा। वह पहले दुबई पहुंचा और बाद में कैरेबियाई देश सेंट किट्स एंड नेविस में रहने लगा। जांच एजेंसियों ने दावा किया है कि भारत के अलावा उसने यूएई और सेंट किट्स एंड नेविस का भी पासपोर्ट बनवाकर दौरा किया। बता दें कि उसे भारत वापस लाने की प्रक्रिया में कानूनी चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।
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कहाँ-कहाँ मिली संपत्तियां?
जांच एजेंसियों ने समीर अग्रवाल और उससे जुड़े लोगों की संपत्तियों की भी जानकारी जुटाई है। रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल, रायसेन, इंदौर, झांसी, ललितपुर और टीकमगढ़ समेत कई जगहों पर जमीन, फार्महाउस, मकान और होटल जैसी संपत्तियों का पता चला है। कुछ संपत्तियां उसकी पत्नी, ड्राइवर और कर्मचारियों के नाम पर होने की भी बात सामने आई है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन संपत्तियों को खरीदने में इस्तेमाल किया गया पैसा कहीं कथित निवेश घोटाले से जुटाई गई रकम तो नहीं था। आने वाले समय में एजेंसियां और संपत्तियां जब्त कर सकती हैं और नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों पर भी कार्रवाई हो सकती है।





