बिलासपुर के बिलासा देवी केवट एयरपोर्ट की एयर कनेक्टिविटी और विस्तार का मुद्दा एक बार फिर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के केंद्र में है। एयरपोर्ट के विकास, यात्री सुविधाओं और उड़ानों के विस्तार से जुड़े मामले की लंबे समय से न्यायिक निगरानी की जा रही है। हालिया सुनवाई में कोर्ट ने एयरपोर्ट के विकास कार्यों की प्रगति और संचालन से जुड़े मुद्दों पर अधिकारियों से जवाब मांगा है।
बिलासपुर एयरपोर्ट को क्षेत्र की बेहतर हवाई कनेक्टिविटी के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। फरवरी 2026 में एयरपोर्ट को 3C-विजुअल फ्लाइट रूल्स से 3C-ऑल वेदर ऑपरेशन के लिए अपग्रेड किया गया था। इसके बाद खराब मौसम, कोहरे और बारिश जैसी परिस्थितियों में भी उड़ानों के संचालन की संभावनाएं बेहतर हुई हैं। केंद्र सरकार ने भी इसे क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया था।
हाईकोर्ट में एयरपोर्ट के विकास का मामला
बिलासपुर एयरपोर्ट से जुड़ी जनहित याचिकाओं में लंबे समय से एयरपोर्ट के विस्तार, यात्री सुविधाओं और नियमित उड़ानों को बढ़ाने की मांग उठती रही है। हाईकोर्ट ने अलग-अलग सुनवाइयों के दौरान राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों से विकास कार्यों की स्थिति की जानकारी मांगी है।
अगस्त 2026 की पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने एयरपोर्ट परिसर के बाहर बन रहे पब्लिक यूटिलिटी बिल्डिंग के काम को जल्द पूरा करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से निर्माण कार्य की निगरानी करने और तीन महीने के भीतर इसे पूरा कराने को कहा। साथ ही एयरपोर्ट के संचालन और आगे के विकास के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) से राज्य सरकार के पत्रों पर उठाए गए कदमों की जानकारी भी मांगी गई।
एयर कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर
बिलासपुर से अधिक शहरों के लिए सीधी और नियमित उड़ानें शुरू करना इस पूरे मामले का अहम हिस्सा है। सीमित एयर कनेक्टिविटी के कारण यात्रियों को कई बार दूसरे शहरों के एयरपोर्ट पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में एयरपोर्ट का विस्तार होने से बिलासपुर और आसपास के जिलों के लोगों को बेहतर परिवहन विकल्प मिल सकते हैं।
अप्रैल 2026 में हुई सुनवाई से संबंधित रिपोर्टों में रात की उड़ानों में देरी और सीमित एयरलाइन संचालन का मुद्दा भी सामने आया था। कोर्ट ने अधिकारियों से इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करने और अन्य एयरलाइंस को बिलासपुर से उड़ान संचालन के लिए आकर्षित करने की दिशा में उठाए गए कदमों की जानकारी देने को कहा था।
विस्तार के लिए जमीन और इंफ्रास्ट्रक्चर अहम
बिलासपुर एयरपोर्ट का विस्तार लंबे समय से जमीन और आधारभूत ढांचे से जुड़े मामलों के कारण चर्चा में रहा है। पहले हाईकोर्ट ने एयरपोर्ट विस्तार के लिए जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए थे। 2023 में अदालत ने 270 एकड़ जमीन पर विस्तार कार्य के लिए केंद्र से अनुमति देने और बाकी जमीन के हस्तांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए थे।
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एयरपोर्ट के आधिकारिक विवरण के अनुसार, इसके विकास की योजना में मौजूदा सुविधाओं को 3C IFR स्तर तक बढ़ाना और नए टर्मिनल भवन का निर्माण शामिल है। आगे चलकर एयरपोर्ट को 4C IFR स्तर तक विकसित करने की योजना भी बताई गई है, जिससे बड़े विमानों के संचालन की क्षमता बढ़ सकेगी।
कारोबार और पर्यटन को भी मिलेगा फायदा
बेहतर एयर कनेक्टिविटी का असर सिर्फ यात्रियों की सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा। बिलासपुर और आसपास के क्षेत्रों में व्यापार, उद्योग, पर्यटन और निवेश को भी इससे फायदा मिलने की उम्मीद है। तेज हवाई संपर्क से कारोबारी यात्राओं में समय कम हो सकता है और क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।
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अब हाईकोर्ट की निगरानी में एयरपोर्ट से जुड़े लंबित कार्यों को समय पर पूरा करना और उपलब्ध सुविधाओं का प्रभावी संचालन महत्वपूर्ण होगा। यात्रियों की बढ़ती जरूरतों के अनुरूप उड़ानों की संख्या, एयरलाइन भागीदारी और बुनियादी सुविधाओं में सुधार होने पर बिलासपुर एयरपोर्ट छत्तीसगढ़ की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में और महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।




